मोदी और योगी सरकार के कार्यकाल में जनता व अधिकारियों का बढ़ा उत्पीड़न: मसूद

लखनऊ ब्यूरो। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. मसूद अहमद ने बुधवार को कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार और सूबे की योगी सरकार में जनता के साथ विभागीय अधिकारियों का उत्पीड़न बढ़ा है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की उथल-पुथल के साथ रिजर्व बैंक के गर्वनर उर्जित पटेल का इस्तीफा एक ओर मोदी सरकार की कूटनीति उजागर कर रहा है तो दूसरी ओर अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष सीबी पॉलीवाल का इस्तीफा योगी सरकार की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है।

उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री ने सीबीआई जैसी एजेन्सी की स्वयत्तता पर कुठाराघात किया है। ठीक उसी प्रकार रिजर्व बैंक आॅफ इण्डिया के गर्वनर उर्जित पटेल के इस्तीफे से केन्द्र सरकार के अनावश्यक दबाव की कहानी उजागर हो रही है।

डाॅ. मसूद अहमद ने कहा कि मीडिया की खबरों से पता चला कि रिजर्व बैंक के रिजर्व फण्ड से एक तिहाई धनराशि (लगभग साढ़े तीन लाख करोड़) की मांग केन्द्र सरकार उर्जित पटेल से कर रही थी। उनके इनकार करने पर धारा-7 के प्रयोग की धमकी दी थी। इसलिए उर्जित पटेल ने इस्तीफा दिया है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मोदी की ही नीति पर चलकर योगी आदित्यनाथ ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष पर सरकारी नौकरियों से सम्बन्धित अनावश्यक दबाव बनाकर मनमानी करना चाहा जिसकी वजह से सीबी पॉलीवाल ने इस्तीफा दे दिया और आरोप लगाने के बजाय व्यक्तिगत कारणों का हवाला दे दिया। उन्होंने कहा कि केन्द्र और प्रदेश की इन्हीं सब नीतियों का परिणाम है कि भाजपा को पड़ोसी राज्यों में सरकार से बेदखल होना पड़ा है।

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