मोदी के मंत्री पर भड़के योगी के मंत्री, पढ़िए क्या है पूरा मामला

दिल्ली ब्यूरो: बीते दिनों की बात है। लगभग चार दिन पुरानी बात। योगी के मंत्री और मोदी के मंत्री आपस में भिड़ गए। पीएम मोदी के मंत्री ठहरे बिहार वाले। नाम है गिरिराज सिंह। सब जानते हैं इन्हे। इनके काम की वजह से नहीं इनके भाषण की वजह से। गिरिराज सिंह पहले इतना नहीं बोलते थे। बोलते थे तो बचाकर बोलते थे। लेकिन जब से मोदी सरकार में राज्य मंत्री बने और लघु उद्योग मंत्रालय में बैठने लगे तब से बोलने लगे। इनकी बोलती सब सुनते हैं। बीजेपी वाले भी और विपक्ष वाले भी।

पार्टी अध्यक्ष शाह भी और पीएम भी। लेकिन इन्हे कोई कुछ नहीं कहता। अभी बीते सप्ताह ही गिरिराज सिंह अचानक गरज उठे। क्यों गरजे किसी को पता नहीं। लेकिन गरज उठे। भड़काऊ भाषण देने में उनकी प्रवीणता है। खूब बोलते हैं और शर्म भी नहीं करते। उनके भाषण में निशाने पर मुस्लिम समाज होता है। मुगलिया सल्तनत होती है और उनके कारनामे। केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि मुसलमान मुग़ल के वंशज नहीं बल्कि प्रभु श्रीराम के वंशज हैं। इसलिए ये लोग राम मंदिर का विरोध न करें, और जो राम मंदिर का विरोध कर रहे हैं वो भी समर्थन में आ जाये वरना उनसे हिंदू नाराज़ हो जाएंगे।

गिरिराज सिंह जैसे ही बोले खबर फ़ैल गई। कई लोग कहने लगे कि कौन कर रहा है प्रभु श्रीराम मंदिर का विरोध ? पता लगाया गया कुछ पता नहीं चला। बात यूपी तक पहुंची। योगी के दरबार में भी इस पर बहस चली। अयोध्या के लोग भी चौंके। अयोध्या से आवाज आई कि कौन है मंदिर का विरोधी ? किसी का नाम सामने नहीं आया। फिर क्या था। योगी के मंत्री ओमप्रकाश राजभर सामने आये। राजभर ने मोदी सरकार में मंत्री गिरिराज सिंह पर निशाना साधा। राजभर ने कहा कि ”जो बिहार वाले नेता बयान दें रहे हैं वो जिस रोड पर चलते हैं उसको उनके दादा बनाए हैं? वो जीटी रोड शेर शाह सूरी ने बनाया। एक नई सड़क बना के दिखा दें बयान देना अलग बात है।”

राजभर यही नहीं रुके। योगी सरकार के कारनामो पर भी भड़क गए। बहुत कुछ कहा राजभर ने। उन्होंने कहा कि सीएम योगी जिस तरह से जगहों के नाम बदल रहे हैं महज लोगों का दिमाग भटकाने जैसा ही है। उन्होंने कहा कि योगी के पास तो कोई काम है नहीं, ये जनता का दिमाग भटकाने के लिए ये नाम बदलने का एक बहाने है। अगर हिम्मत है तो लाल किला का नाम बदल दें उसको गिरा दें। गौरतलब है कि राम मंदिर का मामला फिलहाल कोर्ट में है मगर उसे लेकर बयानबाज़ी शुरू हो चुकी है। गिरिराज से पहले संघ प्रमुख ने राम मंदिर के लिए कानून लाने की बात कही थी वहीं अब गेंद पीएम मोदी के पाले में है। ऐसे देखना ये होगा कि वो कोर्ट के फैसले का इंतजार करते है या उससे पहले ही कानून लाते है।

अगर सरकार मंदिर के लिए कुछ करती है तब उसके लिए मुश्किल है और नहीं करती है तब भी उसके लिए दबाव बढ़ेगा क्योंकि अगले साल लोकसभा चुनाव भी सर पर है और इसलिए सरकार हर कदम फूंक फूंककर रखेगी इसलिए गिरिराज सिंह जैसे नेता पहले हवा बनाने में जुटे हुए है।

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