…यहां कोरोना से बचाने के लिए आम को पहनाए जा रहे मास्क, देखने वालों ने कहा भाई वाह!

गोरखपुर. कोरोनावायरस महामारी के बीच हर कोई शुद्ध फल और सब्जियां खरीदना चाहता है। ऐसे में गोरखपुर के बेतियाहाता के न्यू चंद्रगुप्तनगर कॉलोनी की रहने वाली अनीता मर्तिया ने महामारी काल में आम के फलों को कीटों से बचाने के लिए उन्हें भी फ्रूट मास्क पहनाना शुरू किया है। अनीता को प्रकृति, पर्यावरण और पेड़ पौधों से खास लगाव है। उन्होंने घर के आसपास अपने क्षेत्र में छाया और ताजी हवा के लिए फलदार पौधे लगाए थे, जो अब फल दे रहे हैं। इनमें कई आम के भी पेड़ हैं।

अनीता बताती हैं कि उनके मायके में पिताजी के फल और सब्जियों के बड़े बाग रहे हैं। जब वे शादी होकर गोरखपुर आईं, तो यहां पर कॉलोनी होने के कारण उन्‍हें ऐसी संभावना नहीं दिखी। हालांकि, घर बड़ा होने के कारण उन्‍होंने पूरे घर को बागीचा बना दिया है। वे बताती हैं कि उन्‍होंने पूरी कालोनी में 25 साल पहले 200 से अधिक लीची और आम के पौधे लगाए थे, जो अब बड़े होकर फल भी देने लगे हैं। अनीता बताती है कि उनके पति की साल 2000 में मौत हो गई। उसके बाद भी उन्‍होंने हिम्‍मत नहीं हारी। उन्‍होंने ज्‍वेलरी का व्‍यापार शुरू किया और अन्‍य उद्यम को भी संभाला। अब उनके बेटे उत्‍सव सारे व्‍यापार को संभालने में उनकी मदद करते हैं। वे बताती हैं कि मर्तिया ग्रुप के नाम से ही आर्गेनिक खेती कर वे फल और सब्जियों से भी अच्‍छे रुपए कमा लेती हैं।

अनीता मर्तिया ने बताया कि लॉकडाउन में उनके परिवार का कोई भी सदस्य घर से बाहर नहीं निकला। अनीता और उनका बेटा उत्सव घर पर रहकर व्यापारिक गतिविधियों को अंजाम देते रहे। लॉकडाउन के बाद से ही घर में लगे आम के पेड़ों पर बौर आने लगे थे। उन्‍हें बचाने के लिए उन्‍होंने हल्‍के कपड़े के बने बैग यानी फ्रूट मास्‍क से कवर कर टेप लगा दिया। अब इन पेड़ों में लगी झोलियों में फल भी बड़े हो गए हैं। वे बताती है कि इससे जहां फलों की शुद्धता पर खरीदने वालों का विश्‍वास बना रहेगा। अनीता कहती हैं कि अकेले पीएम नरेंद्र मोदी के चाहने से पर्यावरण शुद्ध नहीं हो सकता है। घंटी बजाने के साथ ही हमें हर घर में दो-दो पौधे लगाने चाहिए। लॉकडाउन की शुरुआत में ऐसा होता, तो वातावरण और अधिक शुद्ध हो जाता। हम और अधिक सु‍रक्षित महसूस करते।

अनीता के पुत्र उत्सव ने बताया कि उन्होंने इसी साल फलों को मास्क पहनाया है। वे बताते हैं कि कोरोनाकाल चल रहा है। ऐसे में वे चाहते हैं कि आर्गेनिक विधि से तैयार किया गया अच्‍छा फ्रूट लोगों को खाने के लिए मिले। किसी भी तरह के केमिकल का प्रयोग नहीं किया गया है। ये फल प्राकृतिक रूप से बड़े होते हैं। कोई भी कोरोना संक्रमित इसे छू भी दे तो नुकसान नहीं होता है। उन्‍होंने बताया कि उन्‍होंने पेड़ों को उल्‍टा टेप लगाकर चारों ओर से तने को सुरक्षित किया है।जिससे कोई भी कीट उस पर चढ़ नहीं सकता है। इसके साथ ही उनके लिए ये फ्रूट बैग अपने से सड़कर खाद बन जाते हैं। इससे किसान अपने शुद्ध फसल तैयार कर अच्‍छा मुनाफा जैविक खेती के माध्‍यम से कमा सकते हैं। घर पर 10 से 11 पेड़ों पर 200 से 300 मास्‍क लगा रखे हैं। जबकि घर के आसपास सभी पेड़ों पर लगभग 2000 मास्‍क लगे हुए हैं।

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