यह है उत्तर प्रदेश का व्यापमं घोटाला, 600 अयोग्य छात्रों को बना रहे थे डॉक्टर

लखनऊ ब्यूरो: पिछले चार साल से यूपी में भी मध्य प्रदेश की तरह व्यापमं घोटाले की खबर मिल रही है। एसटीएफ के हालिया भंडाफोड़ से पता चलता है कि प्रदेश में 2014 से ही एक बड़ा गैंग मेडिकल छात्रों को एमबीबीएस की परीक्षा पास करवाने में मदद कर रहा था। इसके बदले छात्रों से एक से डेढ़ लाख रुपये लिए जाते थे। इस मामले में मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के दो छात्रों को गिरफ्तार किया गया है। इन दोनों पर नकल कराने वाले हरे एक माफिया को एक लाख रुपये देने का आरोप है।

खबर के मुताबिक़, माफियाओं ने परीक्षा में दोनों छात्रों की ओर से दिए गए जवाबों की जगह विशेषज्ञों द्वारा लिखी गई कॉपियां जमा कराई थीं। गिरफ्तार छात्रों में से एक का नाम आयुष कुमार (21) है। उसके पिता गुड़गांव स्थित एक बड़े अस्पताल में डॉक्टर हैं। आयुष हरियाणा के पानीपत का रहने वाला है। दूसरे छात्र का नाम स्वर्णजीत सिंह (22) है और वह पंजाब के संगरूर का रहने वाला है। इन दोनों को पुलिस ने तब गिरफ्तार किया जब एक गुप्त सूचना के आधार इन दोनों की असल उत्तर पुस्तिकाएं बरामद की गईं। पुलिस का कहना है कि आगे की पूछताछ के बाद और छात्रों के नाम सामने आ सकते हैं।

इस मामले में 9 और लोगों की पहचान की गई है जो मेडिकल छात्रों को पास कराने के लिए बड़े पैमाने पर हो रही इस बेईमानी का हिस्सा हैं। इनमें छह लोग मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अधिकारी हैं। पुलिस ने बताया कि साल 2014 से चल रहे इस रैकेट के तहत अब तक 600 अयोग्य छात्रों को एमबीबीएस परीक्षा पास करवाने और डॉक्टर बनवाने में मदद की गई है. रैकेट का भंडाफोड़ करने वाले एसटीएफ ने बताया कि द्वितीय वर्ष की एक मेडिकल छात्रा ने दोनों आरोपित छात्रों को नकल माफिया के सदस्यों से मिलवाया था।

एसटीएफ के सूत्रों ने बताया कि इस मिलीभगत में शामिल विश्वविद्यालय के परीक्षा मूल्यांकन विभाग के लोग छात्रों की कॉपियों को हटाकर उनकी जगह विशेषज्ञों द्वारा लिखी गई कॉपियों को रख देते थे। इस काम के लिए वे छात्रों से एक से डेढ़ लाख रुपये लेते थे। अब विश्वविद्यालय की 2017 की छमाही परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं को सील कर दिया गया है। इस पूरे रैकेट के मुख्य आरोपित कविराज सिंह के अलावा विश्वविद्यालय के पांच कर्मचारियों के खिलाफ मामला भी दर्ज कर लिया गया है। इनमें से तीन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बाकी दो फरार हैं। एसटीएफ ने राज्य सरकार से लिखित अपील की है कि वह इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल बनाए।

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