यादव सिंह की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज, अब हाईकोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही होना होगा पेश

नई दिल्‍ली. 116 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले के आरोपी नोएडा अथॉरिटी के इंजीनियर यादव सिंह को सुप्रीम से राहत नहीं मिली है. यादव सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) द्वारा वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई करने का विरोध किया था. उन्‍होंने इस बाबत शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ठुकरा दिया. सर्वोच्‍च अदालत ने यादव सिंह को VC के जरिये इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई में शामिल होने का आदेश दिया है. करोड़ों रुपये के टेंडर घोटाले में यादव सिंह समेत 11 लोगों और तीन कंपनियों को आरोपी बनाया गया है.

यादव सिंह नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर थे. वे साल 2007 से 2012 तक नोएडा प्राधिकरण में चीफ इंजीनियर रहे थे. इनके ऊपर आरोप है कि अपने कार्यकाल में निजी कंपनियों को गलत तरीके से यह टेंडर दिया गया था. उन्होंने पद पर रहते हुए 29 निजी फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये के टेंडर पास किया था. साथ ही इन फर्म में से कई उनके परिवार के सदस्यों और करीबी दोस्तों के नाम पर रजिस्टर्ड थे. इस मामले में यादव सिंह समेत 11 लोगों और 3 कंपिनयों को आरोपी बनाया गया है. इसके बाद ईडी ने यादव सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. यादव सिंह को सबसे पहले साल 2016 में गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था.

सीबीआई का आरोप है कि 14 दिसंबर 2011 से 23 दिसंबर 2011 तक नोएडा अथॉरिटी के विभिन्न इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट यादव सिंह के कंट्रोल में थे. वह नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर थे और उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए 954.38 करोड़ रुपये के एग्रीमेंट बांड जारी किए जो 1280 प्रोजेक्ट के लिए थे. सीबीआई के आरोप-पत्र में कहा गया है कि सिंह ने अप्रैल 2004 से चार अगस्त, 2015 के बीच आय से अधिक 23.15 करोड़ रुपये जमा किए, जो उनकी आय के स्रोत से लगभग 512 प्रतिशत अधिक है.

1995 में यादव सिंह को असिस्टेंट प्रोजेक्ट इंजीनियर से प्रोजेक्ट इंजीनियर के तौर पर प्रमोशन दिया गया. जबकि यादव सिंह के पास सिर्फ इंजीनियरिग का डिप्लोमा था. नियम के हिसाब से इस पद के लिए इंजीनियरिंग की डिग्री जरुरी है, लेकिन दस्तावेजों के मुताबिक यादव को बिना डिग्री के प्रमोशन दिया गया था. इस हिदायत के साथ कि वो अगले तीन साल में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर लें.

राजनीतिक सरपरस्ती भी खूब मिली
जानकार के मुताबिक यादव सिंह को राजनीतिक सरपरस्ती भी खूब मिली. सत्ता किसी की भी रही, उनका बाल बांका नहीं हुआ. एक समय आयकर विभाग ने यादव सिंह के गाजियाबाद और दिल्ली के 20 ठिकानों पर छापा मारे थे. तब आयकर विभाग ने खुलासा किया था कि यादव सिंह ने मायावती सरकार के दौरान अपनी पत्नी कुसुमलता, दोस्त राजेन्द्र मिनोचा और नम्रता मिनोचा को डायरेक्टर बनाकर करीब 40 कम्पनी बना डालीं और कोलकाता से बोगस शेयर बनाकर नोएडा अथॉरिर्टी से सैकडो बड़े भू-खण्ड खरीदे. बाद में उन्हें दूसरी कम्पनियों को फर्जी तरीकों से बेच दिया.

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