यूपी की इकॉनमी 1000 अरब डॉलर की बनाने के लिए सलाहकार नियुक्त करेगी योगी सरकार

लखनऊ: कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन से लगे झटके के बाद अर्थव्यवस्था को फिर से मजबूत कर उसे एक हजार अरब (एक खरब) डॉलर की बनाने का अभियान तेज करने की कवायद के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने सशक्त रणनीतियां बनाने के लिए एक सलाहकार नियुक्त करने का फैसला किया है. राज्य सरकार ने इस सलाहकार की नियुक्ति के लिए एक विस्तृत प्रपत्र तैयार किया है. करीब 41 पन्ने के इस दस्तावेज़ में प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आकार एक हजार अरब डॉलर बनाने के काम को बहुत चुनौतीपूर्ण बताया गया है

एक न्यूज एजेंसी’ को मिले इस दस्तावेज में कहा गया है कि इस बेहद मुश्किल काम को अंजाम देने के लिए राज्य सरकार को कुछ बहुत बड़े कदम उठाने होंगे. इसके लिए गहन चिंतन-मनन करके तैयार की गई दीर्घकालिक रणनीतियों पर निरंतरता के साथ काम करना होगा. इसके लिए मजबूत सांगठनिक ढांचे, लक्ष्य पर केंद्रित नीतियों और अधिक प्रभावी सुशासन से संबंधित नियमों, तेजी से निर्णय लेने की प्रक्रिया तथा अधिक जवाबदेही की जरूरत पड़ेगी.

उत्तर प्रदेश देश का सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य है और देश को 5000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की पूर्ति में इस राज्य का बहुत बड़ा योगदान होगा. सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी)में उत्तर प्रदेश का योगदान आठ प्रतिशत है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश की अर्थव्यवस्था को 5000 अरब डॉलर की बनाने के लक्ष्य से खुद को संबद्ध करते हुए उत्तर प्रदेश को एक हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य तय किया है. इसके लिए मौजूदा विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि किए जाने की जरूरत है. इसके अलावा मूलभूत ढांचे में भी व्यापक सुधार करना होगा.

राज्य सरकार द्वारा तैयार दस्तावेज के मुताबिक उसने अर्थव्यवस्था के विकास की दिशा में जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. इसके परिणाम स्वरूप वर्ष 2018-19 में प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 230 अरब डॉलर यानी 15.80 लाख करोड़ रुपये का हो चुका है. पिछले साल राज्य की विकास दर सात प्रतिशत रही. प्रपत्र में कहा गया है कि अगले पांच साल के दौरान प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक हजार अरब डॉलर की बनाने के लिए प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद को करीब पांच गुना तक बढ़ाना होगा. साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक रुख के हिसाब से खुद को ढालने की क्षमता विकसित करनी होगी. इससे चुनौती काफी बढ़ जाती है.

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