यूपी में अक्षम व भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की छंटनी जल्द, स्क्रीनिंग की कार्रवाई तेज

लखनऊ: गंभीर भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपित और शारीरिक रूप से अक्षम पुलिस कर्मियों को चिह्नित कर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है। डीजीपी एचसी अवस्थी ने विभागीय अधिकारियों को स्क्रीनिंग की कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं।

शासन के निर्देश पर डीजीपी मुख्यालय ने दोनों पुलिस कमिश्नरों तथा जोन, रेंज व जिला कार्यालयों के अलावा विभाग की सभी इकाइयों से 50 की उम्र पार कर चुके कर्मचारियों की सूची 30 जून तक उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। एडीजी स्थापना की तरफ से भेजे गए पत्र में कहा गया था कि 31 मार्च 2020 को 50 वर्ष अथवा इससे अधिक की आयु पूरी कर रहे कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किए जाने के लिए स्क्रीनिंग की प्रक्रिया नियमानुसार करा ली जाए।

स्क्रीनिंग में शारीरिक अक्षमता के अलावा पूर्व में दिए गए दंड और भ्रष्टाचार की शिकायतों पर हुई विभागीय कार्यवाही का भी विवरण शामिल किया जाता है। स्क्रीनिंग के दायरे में आने वाले सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक को अनिवार्य सेवानिवृत्ति पुलिस के सक्षम अधिकारियों के स्तर से दे दी जाती है, क्योंकि वही उनके नियुक्ति प्राधिकारी होते हैं। राजपत्रित पुलिस कर्मियों के प्रकरण शासन को भेजे जाते हैं। इन अधिकारियों के लिए शासन स्तर पर स्क्रीनिंग कमेटी बनी हुई है।

जिलों के स्तर से तय समय में कार्रवाई न होने पर डीजीपी मुख्यालय ने फिर से रिमांइडर भेजा है। डीजीपी मुख्यालय की नाराजगी के बाद कई जिलों के पुलिस कप्तानों ने सक्रियता दिखाई दी है। थानों से लेकर पुलिस के सभी कार्यालयों तक से इसकी सूचना मांगी गई है। इस प्रक्रिया से 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुलिसकर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है। पिछले साल भी यह प्रक्रिया अपनाई गई थी। इस कारण अनिवार्य सेवानिवृत्ति के दायरे में आने वाले पुलिसकर्मियों की संख्या ज्यादा होने की संभावना नहीं है।

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