यूपी में अब बाबा साहब का नाम हुआ ‘भीमराव रामजी अंबेडकर‘

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अब बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर ‘भीमराव रामजी आंबेडकर‘ के नाम से जाने जायेंगे। सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार ने यह परिवर्तन प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक की सलाह पर किया है। राज्य सरकार ने इस सिलसिले में शासनादेश जारी किया है। जिसके बाद सरकारी अभिलेखों में भी बाबा साहब का नाम अब ‘भीमराव रामजी आंबेडकर‘ लिखा जायेगा। सरकार के इस कदम की विपक्ष ने कड़ी आलोचना की है।

प्रमुख सचिव (सामान्य प्रशासन) जितेन्द्र कुमार ने प्रदेश के सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों और विभागाध्यक्षों को जारी शासनादेश में कहा है कि संविधान की आठवीं अनुसूची (अनुच्छेद 344(1) और-351) भाषाएं में अंकित नाम का संज्ञान लेते हुए शासन ने विचार के बाद उत्तर प्रदेश से सम्बन्धित सभी दस्तावेजों में अंकित ‘डाॅक्टर भीमराव अम्बेडकर‘ का नाम संशोधित करके ‘डाॅ. भीमराव रामजी आंबेडकर‘ करने का निर्णय लिया है। शासनादेश में सम्बन्धित सभी अधिकारियों से अपने-अपने विभाग के अभिलेखों में अम्बेडकर का नाम संशोधित करके भीमराव रामजी आंबेडकर करने के निर्देश दिये गये हैं। 28 मार्च 2018 को जारी शासनादेश की प्रति राज्यपाल राम नाईक के प्रमुख सचिव, सभी मण्डलायुक्तों और सभी जिलाधिकारियों को भी भेजी गयी है।

विदित हो कि राज्यपाल राम नाईक पूर्व में भी अम्बेडकर के स्थान पर आंबेडकर लिखने की यह कहते हुए वकालत कर चुके हैं कि इस महापुरुष ने संविधान के दस्तावेज पर जो हस्ताक्षर किये थे उसमें अम्बेडकर के बजाय आंबेडकर ही लिखा था। नाईक ने इस बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बाबा साहब डाॅ. भीमराव अम्बेडकर महासभा को पत्र लिखकर अपनी चिंता भी जाहिर की थी।

उधर, राज्य सरकार के इस कदम की विपक्ष ने तीखी आलोचना की है। प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के नेता अनुराग भदौरिया ने सरकार पर आंबेडकर के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि वह दलित मतदाताओं को लुभाने के लिये ऐसा कर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत ने कहा कि भाजपा सिर्फ नामों का अनुसरण करती है, उस व्यक्ति के काम का अनुसरण नहीं करती। उन्होंने कहा कि बेहतर है कि भाजपा संविधान को बचाने और उसे मजबूत करने का काम करें।

वहीं राज्य सरकार के प्रवक्ता स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि लोगों को देखना चाहिये संविधान की आठवीं अनुसूची में बाबा साहब ने किस तरह अपने हस्ताक्षर किये हैं। जो जिसका सही नाम है, उस सही नाम से ही लिखा करें। बस, इतना ही किया गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग उनके सिद्धान्तों के दिखावे का छल करते हैं। वे उनका सही नाम ले ही नहीं पा रहे थे। आज वह सही तरीके से बुलाया जा रहा है। कम से कम जो सही किया गया है उसकी सराहना करें।

राज्यपाल ने पूर्ववर्ती सपा सरकार को भी आंबेडकर का नाम ठीक लिखने का सुझाव दिया था। उस सरकार ने यह सुझाव क्यों नहीं माना। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में पिता का नाम बीच में लिखा जाता है। इसमें भी अगर विपक्ष को अयोध्या दिखता है तो इससे पता लगता है कि उसकी राजनीति कितनी गिर चुकी है। हमें खुशी है कि हमने आंबेडकर का सही नाम लिखा। उन्होंने यह भी कहा कि अगले महीने से प्रदेश के हर कार्यालय में बाबा साहब आंबेडकर का फोटो भी लगेगा। इसमें कोई राजनीति नहीं है। हमारा हर कार्यकर्ता बाबा साहब को अपना आदर्श मानता है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper