यूपी में आधार की वजह से अधर में फंसा एक हजार नेपाली मदरसा छात्रों का भविष्य

दिल्ली ब्यूरो

लखनऊ ट्रिब्यून दिल्ली ब्यूरो: आधार की अनिवार्यता मदरसा में पढ़ रहे नेपाली छात्रों के लिए मुसीबत बन गयी है। नेपाल में आधार कार्ड की जरूरत नहीं होती और भारत में आधार कार्ड के बिना इम्तिहान में नहीं बैठ सकते। ऐसे में यूपी के मदरसा में पढ़ रहे नेपाली छात्रों के सामने संकट खड़ा हो गया है। मदरसा शिक्षकों के एक संगठन ने मदरसा बोर्ड को पत्र लिखकर आधार का विकल्प देने की गुजारिश की है। राज्य सरकार का कहना है कि उसके सामने अभी ऐसा कोई प्रकरण नहीं आया है, जब आयेगा तो कानूनन जो सही होगा, वह किया जायेगा। मदरसा बोर्ड की आगामी परीक्षाओं के लिये भरे जा रहे फार्म में आधार कार्ड की जानकारी देने के लिये अलग कॉलम बनाया गया है.आधार का कोई विकल्प भी नहीं दिया गया है।

प्रदेश के मदरसों में बड़ी संख्या में नेपाल के छात्र भी पढ़ते हैं। नेपाल में आधार कार्ड की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में वे परीक्षा फार्म में आधार की जानकारी कैसे देंगे। टीचर्स एसोसिएशन मदारिसे अरबिया उत्तर प्रदेश के महासचिव दीवान साहब जमां खां ने मीडिया को बताया कि उनके संगठन ने कल मदरसा शिक्षा बोर्ड के रजिस्ट्रार राहुल गुप्ता को पत्र लिखकर उनसे परीक्षा फार्म में आधार की अनिवार्यता खत्म करने या उसका विकल्प देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मदरसा बोर्ड मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल और फाजिल कक्षाओं की परीक्षा आयोजित कराता है। अगर आधार की पाबंदी खत्म नहीं की जाती है तो नेपाली मूल के करीब एक हजार परीक्षार्थी इस बार बोर्ड की परीक्षा नहीं दे पाएंगे।

खां ने बताया कि नेपाल में नागरिकों को जन्म प्रमाणपत्र और नागरिकता प्रमाणपत्र ही मिलता है। इनके आधार पर ही भारत के मदरसों में उनका दाखिला होता है। परीक्षा फार्म भरने की अंतिम तिथि 10 फरवरी है। आधार कार्ड की जानकारी दिये बगैर फार्म स्वीकार नहीं किया जायेगा। उन्होंने बताया कि मदरसा बोर्ड के साथ माध्यमिक शिक्षा परिषद में भी पहली दफा परीक्षा में परीक्षार्थियों के लिये आधार कार्ड अनिवार्य किया गया था, लेकिन उच्चतम न्यायालय में आधार कार्ड की अनिवार्यता पर चल रही सुनवाई पर फैसला नहीं आने और अनेक भारतीय विद्यार्थियों के आधार कार्ड नहीं बने होने के कारण माध्यमिक शिक्षा परिषद ने आधार कार्ड की अनिवार्यता खत्म कर दी थी, लेकिन मदरसा बोर्ड ने ऐसा नहीं किया। खां ने दलील दी कि वर्ष 1950 में भारत और नेपाल के बीच वीजा संधि के कारण बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक भारतीय विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और मदरसों में तालीम हासिल कर रहे है। .

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper