यूपी में सामने आया एक और बड़ा घालमेल, अफसरों ने चहेती फर्म को ऑर्डर देने के लिए गुपचुप तरीके से बदल दी टेंडर प्रक्रिया

लखनऊ: योगी सरकार भले ही भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है, लेकिन अधिकारियों का ‘खेल’ जारी है। युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल निदेशालय में खेल सामग्री खरीदने के नाम पर बड़ा घालमेल सामने आया है। अफसरों ने चहेती फर्म को ऑर्डर देने के लिए गुपचुप तरीके से टेंडर प्रक्रिया ही बदल दी। इसी आधार पर उस हंस रबर स्पोर्ट्स कंपनी को भी बाहर कर दिया, जिसे 2017 में भारत में आयोजित फीफा वर्ल्ड कप (अंडर-17) में उत्कृष्ट खेल सामग्री आपूर्ति के लिए सम्मानित किया गया था।

यही नहीं, चहेती फर्मों को बाजार दर से दोगुने अधिक दाम पर करीब 25 करोड़ रुपये की खेल सामग्री खरीदने का ऑर्डर जारी कर दिया गया। अब इस मामले पर कोई भी अधिकारी मुंह खोलने को तैयार नहीं है। गांवों में गठित नवयुवक मंगल दलों को खेल के प्रति प्रोत्साहित करने को खेल सामग्री उपलब्ध कराने के लिए हर साल करोड़ों रुपये की खरीदारी होती है। निदेशालय ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के शुरुआती महीनों के बजाय अंतिम समय में खेल सामग्री खरीदने का टेंडर निकाला। इस मुद्दे पर जानकारी के लिए प्रमुख सचिव युवा कल्याण डिंपल वर्मा और उप निदेशक सीपी सिंह को कई बार फोन किया गया लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। पहली बार टेंडर 25 अक्तूबर, 2019 को निकाला गया था। इसमें चहेती फर्मों को ऑर्डर देने के लिए सिर्फ उसी फर्म को पात्र मानने की शर्त लगा दी गई, जिसने यूपी में सिंगल ऑर्डर से 2 करोड़ की खेल सामग्री की आपूर्ति की होगी। ऐसी शर्त देश की किसी भी टेंडर प्रकिया में नहीं लगाई जाती। इस पर कुछ प्रतिभागी फर्मों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो अधिकारियों ने रातोंरात टेंडर रद्द कर दिया।

तीसरी बार 5 फरवरी को टेंडर जारी किया गया। इसका टेक्निकल बिड गत 14 फरवरी और फाइनेंसियल बिड 17 फरवरी को खोला गया तो पाया गया कि तीन चहेती फर्मों स्टर्लिंग स्पोर्ट्स, आई-फिट स्पोर्ट और सॉकर इंटरनेशनल को ही पात्र घोषित कर दिया गया है। स्टर्लिंग स्पोर्ट्स ने टेंडर फॉर्म में 2.59 करोड़ के सिंगल ऑर्डर की कॉपी लगाई थी, जो वास्तव में 2.26 करोड़ की ही थी। इस फर्म द्वारा दाखिल कंप्लीशन सर्टिफिकेट पर न तो जारी करने की तारीख थी और न ही पत्रांक संख्या ही अंकित थी। फिर भी अधिकरियों ने इस फर्म को पात्र घोषित कर दिया।

निदेशालय ने 19 दिसंबर, 2019 को टेंडर निकाला तो उसमें सिर्फ यूपी में सामग्री आपूर्ति की जाने वाली शर्त को हटा दिया। पांच फर्मों को फाइनेंसियल बिड में पात्र माना गया। मगर, चहेती फर्मों के इशारे पर अधिकारियों ने टेक्निकल बिड की दोबारा जांच कराने का आदेश दे दिया। ऐसा फैसला भी टेंडर के इतिहास में पहली बार ही हुआ। जांच के आधार पर नोएडा की कॉस्को इंडिया और मेरठ की खालसा एक्सपोर्ट को अपात्र कर दिया गया, जबकि इन दोनों फर्मों का रेट पात्र घोषित की गई फर्मों स्टर्लिंग स्पोर्ट्स (मेरठ) और आई-फिट स्पोर्ट्स (लखनऊ) से काफी कम था। इस तरह टेंडर प्रक्रिया में सिर्फ दो ही फर्में बच गईं।

टेंडर खोलने के लिए न्यूनतम तीन फर्मों का कोरम पूरा करने के लिए जालंधर की ‘सॉकर इंटरनेशनल’ को बैकडोर से पात्र करार दिया गया। प्रतिभागी अन्य फर्मों ने आपत्ति की तो उन्हें भी अपात्र कर टेंडर ही निरस्त कर दिया गया। न्यूनतम दर पर खेल सामग्री की आपूर्ति करने वाली खालसा एक्सपोर्ट्स (कॉस्को प्रोडक्ट) और हंस रबर स्पोर्ट्स को कई तरह के अड़ंगे लगा दिए गए। हंस रबर स्पोर्ट्स को फीफा सम्मानित कर चुकी है। वहीं, टेंडर के लिए अपात्र घोषित स्टर्लिंग स्पोर्ट्स, आई-फिट स्पोर्ट और सॉकर इंटरनेशनल को ऑर्डर दे दिया गया। जबकि इन तीनों फर्मों ने 10 से 15 करोड़ रुपये अधिक का रेट ऑफर किया था। इन फर्मों से जो सामग्री ली जानी है, उनका दाम भी बाजार दर से दोगुना है।

जो फुटबॉल ऑनलाइन 599 रुपये में मिल रहा है, उसे 832 से 953 रुपये में खरीदने का ऑर्डर दिया गया है। इसी तरह 389 रुपये के बॉलीवॉल की आपूर्ति 895 से 930 रुपये में ली जा रही है। 199 रुपये का डिप्स स्टैंड 483 से 524 रुपये और 579 रुपये का डंबल 1825 से 2340 रुपये में खरीदने का ऑर्डर दिया गया है।

अमर उजाला से साभार

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