ये हैं दुनिया की सबसे पावरफुल मिलिट्री यूनिफॉर्म्स, किसी सुपरहीरो के सूट से नहीं हैं कम !

 

लखनऊ: दुनिया का हर देश अपने बजट का एक बड़ा हिस्‍सा सेना पर खर्च करता है । वजह स्‍पष्‍ट है, देश के रखवालों को हर तरह की सुविधा उपलब्‍ध कराना ताकि देश की सुरक्षा में कोई कमी ना आए । हर देश अपने जवानों के लिए उन्‍नत से उन्‍नत तकनीक की यूनिफॉर्म बनाने की कोशिश करता रहता है, लेकिन कुछ देश के पास अपने जवानों के लिए ऐसे यूनिफॉर्म हैं, जिनकी पॉवर सुपरहीरो के सूट से कम नहीं । जानें कुछ ऐसे ही मिलिट्री यूनीफॉर्म्‍स के बारे में ।

फ्यूचर फोर्स वॉरियर, अमेरिका

दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश है अमेरिका और इसकी फ्यूचर फोर्स वॉरियर अन्‍य देशों के लिए चिंता का सबब है । इस यूनिफॉर्म की सबसे खास बता है, इस प्रोजेक्‍ट में तैयार हुआ जवानों का कवच, जो महज 1 इंच मोटा है, लेकिन इसमें इस्तेमाल किया जाने वाला खास मैटीरियल आज के समय के कवच के मुकाबले इसे और ज्यादा प्रभावी बनाता है । सूट को बनाने के लिए चुंबकीय रियोलॉजिकल द्रव्‍य का इस्तेमाल किया जाता है जो शरीर से बिल्कुल चिपक जाता है, जैसे ही जवान मैग्नेटिक फील्ड के दायरे में आता है तो ये द्रव्‍य चंद सेकेंड में ही सख्त हो जाता है । यानी गोली लगते ही ये सख्त हो जाता है और जब स्ट्राइक कम होती है तो ये फिर से सॉफ्ट होने लगता है । इस यूनिफॉर्म में नैनोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है ।

रैटनिक-3, रूस

अमेरिका के इस फ्यूचर फोर्स वॉरियर प्रोग्राम की टक्कर में है रूस का रैटनिक प्रोग्राम । रैटनिक भविष्य की एक रूसी युद्ध प्रणाली है, जिसमें सुरक्षाबलों की युद्ध क्षमता और एक दूसरे से जुड़े रहने की सुविधा को बढ़ावा मिलता है । इस प्रोजेक्‍ट के तहत बेहतर कवच से लेकर हेल्मेट और आखों के लिए अलग-अलग तरह के मॉनिटर, संपर्क यंत्र और हेडफोन्स को बनाना है । रूसी जवानों की यूनिफॉर्म को एक्सोस्केलिटन या बाहरी सख्त कवच के रूप में बनाया जाता है, ये कवच इंसानी फोर्स को बढ़ा देता है । इस कवच को पहनने के बाद जवान बिना किसी परेशानी के एक हाथ से मशीनगन उठा सकते हैं । साथ ही 150 किलो तक हथियार या गोलियां भी अपने साथ ढो सकते हैं ।

फिस्ट, ब्रिटेन

FIST यानी फ्यूचर इंटिग्रेटेड सोल्जर टेकनोलॉजी ब्रिटिश आर्मी का एक प्रोजेक्ट है । इसका उद्देशय जवानों के युद्ध के तरीके को बेहतर करना और उन्हें युद्ध के लिए सर्वश्रेष्ठ चीजें उपलब्ध कराना है । हथियार, यूनिफॉर्म से लेकर रेडियो तकनीक, देखने के लिए सुविधाजनक यंत्र इसके तहत मुहैया कराए जाते हैं । इसमें शक्ति से ज्यादा मूवमेंट पर फोकस किया गया है, ब्रिटिश डेवलपर्स ने ऐसे कपड़े का इस्तेमाल किया है जिसपर कंप्यूटर यंत्र भी लग जाता है ।

कॉमफुट, स्पेन
COMFUT यानी कि Combatiente Futuro, इस स्पेनिश कवच को जीएमवी नाम की कंपनी ने स्पेनिश फ्यूचर कॉम्बैट प्रोग्राम के तहत स्पेन के जवानों के लिए बनाई है । ये कंपनी सुरक्षा यंत्रों का निर्माण करती है । कॉमफुट के तहत बनने वाली यूनिफॉर्म्स, किसी सांइस फिक्शन फिल्म के कवच जैसी लगती है । इस में जवानों को दी गई बंदूकें इतनी एडवांस होती हैं कि जवानों को गोली चलाने के लिए बंदूक अपने चेहरे के पास लाने की जरूरत ही नहीं, एक छोटे आकार के आउटलेट बंदूक से निकले रहते हैं जिसमें देखकर बंदूक चलाई जा सकती है।

फेलिन, फ्रांस
फ्रांस में FELIN यानी कि Fantassin, Équipement, Liaisons, Intégrées नाम से प्रोजेक्‍ट चलाया जाता है । फेलिन के जरिये जो यूनिफॉर्म बनाई जाती है वो नैनोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल तो नहीं करती, लेकिन इसमें इस्तेमाल किया जाने वाला टेक्सटाइल बेहद खास होता है । ये यूनिफॉर्म ना तो आग पकड़ती है, ना ही इस पर पानी का प्रभाव पड़ता है । इसके साथ ही खून चूसने वाले कीट और दूसरे कीड़ों से बचाता है । इस यूनिफॉर्म में सांस लेना बहुत ही आसान है ।  इस यूनिफॉर्म के साथ एक खास तरह का हेलमेट भी आता है, जिसमें मास्क होता है ।

आईडीजेड-ईएस, जर्मनी
फ्यूचर सोल्जर प्रोजेक्ट के तहत जर्मनी में IDZ-ES यानी Infanterist der Zukunft प्रोग्राम चल रहा है । इस सूट में वो सभी सुविधाएं हैं जो दूसरे देशों के खास सूट्स में होती हैं । लेकिन इसमें एक खास बात है कि, सूट के साथ जवानों के पास होता है पोर्टेबल मिनी कंप्यूटर । जवान युद्ध के दौरान क्षेत्र में फैली अपनी सेना की दूसरी टुकड़ी पर नजर रख सकते हैं साथ ही चीफ के कमांड भी आसानी से ले सकते हैं ।

चीन का फ्यूचर सोल्जर प्रोजेक्ट
चीन भी पीछे नहीं, अन्‍य देशों की तरह उसकी सेना का रक्षा कवच भी कमाल का है । दरअसल, चीन द्वारा बनाए गए कवच साधारण यूनिफॉर्म के ऊपर पहने जाते हैं । इसमें सुपरपावर्स हैं, जो जवानों की पॉवर को बढ़ाती है । इस कवच पर प्रयोग के दौरान पाया गया कि, इसे पहनने के बाद एक जवान 45 किलो वजन लेकर बहुत दूर तक पैदल चला गया और उसे ज्यादा जोर भी नहीं लगाना पड़ा ।

LiveKhattaMeetha.

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