ये हैं बाबू झक्की; हर मजहब की गरीब बेटी के पिता बन कराते हैं शादी

कानपुर: आज के दौर में जब लोग अपनी ही जरूरतों के बोझ तले दबे हैं, ऐसे में दूसरों की जरूरतों का ख्याल किसे होगा, लेकिन ऐसा नहीं है। रावतपुर गांव के बाबू झक्की नमाज से ज्यादा समाज सेवा को महत्व देते हैं। बेटियां किसी भी मजहब की हों, लेकिन उनकी शादी अपनी बेटी मानकर करते हैं। न केवल पूरे गांव को दावत देते हैं, बल्कि गृहस्थी का सामान देकर पिता की तरह बेटी को विदा करते हैं।

रावतपुर गांव के मोहम्मद शफीक उर्फ बाबू झक्की साबरी वर्ष 2013 में हज करने गए थे। उसी दौरान संकल्प लिया कि अब दोबारा तभी आऊंगा जब 20 बेटियों की शादी करा दूंगा। यह संकल्प चार साल बाद साल 2017 में पूरा हुआ। दो मार्च, 2017 को उन्होंने गरीब परिवारों की 10 बेटियों की शादी धूमधाम से कराई। निकाह पढ़ाने के लिए काजी बुलाए तो सात फेरों की रस्म पूरी करने को मंडप सजवाए। इतना ही नहीं, पूरे रावतपुर गांव को दावत दी।

साढ़े चार हजार कार्ड बांटे गए। करीब 20 हजार लोग विवाह समारोह में शामिल हुए। बेटियों की विदाई में एक तोला सोने की चेन के साथ टीवी, फ्रिज, अलमारी, बेड, बर्तन समेत गृहस्थी का हर सामान उपहार स्वरूप दिया। पूरा आयोजन उन्होंने अपनी जेब से किया। बाबू बताते हैं कि 23 फरवरी, 2018 को भी 10 बेटियों की शादी धूमधाम से कराई। जिसके बाद वह हज करने गए।

बाबू झक्की बताते हैं कि 1972 में रिक्शा चलाते थे। एक वक्त खाना मिलता था तो दूसरे वक्त भूखे रहना पड़ता था। उनकी भी सात बेटियां थीं। बेटियों की परवरिश और शादी की बहुत चिंता थी। उसी दौर को याद कर वह कहते हैं कि जब मैं बेटियों की चिंता करता था तो दूसरे लोग भी परेशान होते होंगे। इसलिए जब अल्लाह ने नेमत बरती तो गरीब बेटियों का विवाह कराने का संकल्प लिया।

जागरण से साभार

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