ये हैं बीजेपी के नॉन परफॉर्मर सीएम, जिन्हें हटाने की मांगें उठती हैं

बीजेपी शासित राज्यों में राजस्थान, झारखण्ड ,उत्तराखंड और हरियाणा ऐसे राज्य हैं जहां के मुख्यमंत्री शुरू से ही पार्टी संगठन नेताओं और जनता की आँखों में चुभते रहे हैं। इन प्रदेशों की जनता अपने अपने मुख्यमंत्रियों के काम से खुश हो या ना हो लेकिन वहाँ की पार्टी इकाई से जुड़े नेता और कार्यकर्ता खुश नहीं हैं। ऐसी कोई उपलब्धि इन सरकारों की नहीं है जिसके दम पर पार्टी के लोग जनता को विश्वास में ले सके। कई राज्यों में तो जनता भी मुख्यमंत्री के विरोध में उतर रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को हटाने के लिए पार्टी संगठन से जुड़े नेता शीर्ष नेतृत्व से लम्बे शिकायत भी कर रहे हैं लेकिन पार्टी नेतृत्व इस मसले पर चुप्पी मारे सब कुछ देख रही है।

मुख्यमंत्री बदलने की सबसे ज्यादा मांग झारखंड से होती रही है। झारखंड में रघुबर दास मुख्यमंत्री है और सरकार के तीन साल गुजर गए हैं। मुख्यमंत्री हमेशा कहते हैं कि सरकार बहुत कुछ कर रही है लेकिन उनकी अभी तक की कोई उपलब्धि सामने नहीं है। जब से रघुबर दास मुख्यमंत्री बने है तभी से उनकी शिकायत पार्टी नेतृत्व के पास पहुंची रही है। संघ के लोग भी उनकी शिकायत ऊपर तक कर चुके हैं लेकिन रघुबर दास की कुर्सी हिलती नहीं दिख रही। राज्य बीजेपी के नेता कहते हैं कि जिस तरह से मुख्यमंत्री काम करते दिख रहे हैं उससे अगला चुनाव जितना मुश्किल हो जाएगा।

एक वरिष्ठ बीजेपी नेता का कहना है कि जब तक रघुबर दास को हटाया नहीं जाता तब तक बीजेपी की जीत पक्की नहीं हो सकती। कई लोगों ने इस बात की सुचना केंद्रीय नेतृत्व को दी है अब फैसला उनके हाथ में है। कुछ इसी तरह की कहानी हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खटटर को लेकर भी है। हरियाणा में अगले साल चुनाव होने हैं लेकिन पार्टी से जुड़े नेता निराश हैं। प्रदेश के नेता कहते हैं कि यह बिना काम का सीएम है। अभी तक कोई काम ऐसा नहीं हुआ जो इनकी उपलब्धि बतायी जाए। बता दें कि खटटर को लेकर भी शुरू से ही पार्टी नेताओं को नाराजगी रही है। खटटर को लेकर भी कई शिकायते की गयी लेकिन पार्टी नेतृत्व चुप्पी साढ़े बैठे हैं।

राजस्थान में वसुंधरा राजे भाजपा सरकार का नेतृत्व कर रही हैं। लेकिन वहां हुए उपचुनावों में भाजपा की हार से पार्टी के अंदर वसुंधरा को हटाने की मांग तेज हुई है। यह मांग पहले भी उठ रही थी। जब ललित मोदी प्रकरण सामने आया तो उस वक्त भी वसुंधरा राजे का नाम विवादों से घिरा था। वसुंधरा के इस कार्यकाल में हुए कामकाज को खुद पार्टी के नेता संतोषजनक नहीं मानते। वे कहते हैं कि अगर वसुंधरा के चेहरे के साथ ही पार्टी इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों में गई तो उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के प्रति भी असंतोष की शुरुआत पार्टी के अंदर हो गई है। लेकिन उन्हें हटाने के लिए अभी भाजपा में राष्ट्रीय स्तर पर हटाने के लिए उस तरह का संगठित अभियान नहीं चल रहा जिस तरह का अभियान राजस्थान, हरियाणा और झारखंड के मुख्यमंत्री को हटाने के लिए चल रहा है।

अब सवाल यह उठता है कि इसके बावजूद पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ये बदलाव क्यों नहीं कर रहा है। इसके जवाब में पार्टी के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी कहते हैं, ‘इसकी दो वजहें हैं। पहली तो यह कि अगर हम मुख्यमंत्री बदलते हैं तो विपक्ष को एक मुद्दा मिल जाएगा। उसकी तरफ से यह प्रचारित किया जाएगा कि पिछला मुख्यमंत्री ठीक से काम नहीं कर रहा था, इसलिए उसे बदल दिया गया। अगर विपक्ष इसे ठीक से मुद्दा बना ले तो इससे इन राज्यों में अगले लोकसभा चुनावों में पार्टी की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं पार्टी नेताओं में इन मुख्यमंत्रियों के खिलाफ आवाज तो उठ रही है लेकिन शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी को मौन स्वीकृति मान कर सब चुप भी हो जा रहे हैं।

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