ये हैं वैदिक इतिहास की पांच पवित्र स्त्रियां, जिनके स्मरण से मिलती है पवित्रता!

भारतवर्ष में हज़ारों लाखों ऐसी पौराणिक कथाएं हैं जो आज के समय में भी सबको प्रेरती करती हैं। उस काल में अनेकों ऐसी स्त्रियां हुई हैं जिनके पतिव्रता धर्म का वर्णन आज भी किया जाता है। ऐसे ही पौराणिक इतिहास से चुनी गयी हैं पांच पतिव्रता स्त्रियां जिनकी पवित्रता और पतिव्रता धर्म की मिसालें युगो युगों तक दी जाती है- ​

1. अनुसुइया: महर्षि अत्रि की पत्नी देवी अनुसुइया का नाम पतिव्रता स्त्रियों में सबसे ऊपर लिया जाता है। इनके पतिव्रता धर्म के आगे तो देवता भी हार गए। एक बार त्रिदेवी अर्थात देवी लक्ष्मी, पार्वती और सरस्वती में इस बात की बहस छिड़ गयी कि संसार में सबसे अधिक पतिव्रता कौन है? अंत में तीनों की सहमति से यह प्रश्न नारद जी से पूछा गया, उन्होंने उत्तर दिया कि अत्रि ऋषि की पत्नी अनुसुइया ही सर्वश्रेष्ठ पतिव्रता हैं।​

देवियों के हठ पर त्रिदेव देवी अनुसुइया की परीक्षा लेने ब्राह्मण के वेश में भिक्षा मांगने चले गए और जब देवी अनुसुइया भिक्षा देने के लिए आगे बढ़ी तो त्रिदेवों ने एक शर्त रख दी, की यदि देवी अनुसुइया को उन्हें भिक्षा देनी है तो वे अपने सम्पूर्ण वस्त्र उतार दें तभी वे भिक्षा स्वीकार करेंगे। तब अनुसुइया सोच में पड़ गयी, क्योकि ब्राह्मणों को द्वार से लौटाना पाप था, इसलिए उन्होंने अपने सतीत्व के प्रभाव से त्रिदेवों को अबोध बालक बना दिया और उन्हें भिक्षा में अपना दूध पिलाया और त्रिदेवों के अंश से एक पुत्र की भी प्राप्ति की। माता अनुसुइया ने देवी सीता को पतिव्रता का उपदेश दिया था।

2. द्रौपदी : द्रौपदी का दूसरा नाम यज्ञसैनी भी है, क्योकि वह यज्ञ द्वारा अग्नि से उत्त्पन्न हुई थी। वह पांचाल नरेश द्रुपद की कन्या थीं और एक प्रतियोगिता में उन्होंने अर्जुन का वरण किया था। अर्जुन और अन्य पांडव भिक्षा मांगने के उद्देश्य से उस दिन कुटिया से निकले थे, और द्रौपदी को लेकर अपनी माँ के पास वापस लौटे। जब अर्जुन ने ध्यान में मग्न अपनी माता से कहा, ‘देखो माँ हमे आज क्या दान मिला’, कुंती ने उसी अवस्था में अनजाने में यह बोल दिया, ‘जो भी तुम्हे प्राप्त हुआ अपने भाइयों के साथ बाँट लो’। बाद में यह ज्ञात होने पर कि भिक्षा कोई वास्तु नहीं वर्ण वधू के रूप में हैं, कुंती को अत्यंत दुख हुआ किंतु माता के वचनों मान रखने के लिए द्रौपदी ने पाँचों पांडवों को पति के रूप में स्वीकार कर लिया। और सभी के प्रति अपना पत्नी धर्म पूर्ण निष्ठा से निभाया।​

3. सुलक्षणा : लंकापति रावण का पुत्र इंद्रजीत केवल बल का ही धनि नहीं था, बल्कि भाग्य का भी धनी था जो उसे सुलक्षणा जैसी पत्नी मिली थी। उसी के सतीत्व से वह इतना बलशाली था की इंद्रलोक भी जीत गया था। लक्ष्मण के मूर्छा से जागने के बाद अगले दिन जब मेघनाद युद्ध करने गया तब उसे उसकी पत्नी ने रोका था किन्तु वह नहीं रुका और उसकी मृत्यु हो गयी। मेघनाद की चिता पर ही सुलक्षणा भी सती हो गयी। इसलिए इन्हे भी पांच सतियों में गिना जाता है। ​

4. सावित्री : सावित्री को कौन नहीं जानता, उन्ही के नाम तथा सतीत्व पर आज के समय में भी स्त्रियां वट सावित्री का व्रत करती हैं। सावित्री के पति सत्यवान की मृत्यु निश्चित थी और यह जानते हुए भी सावित्री ने उनके साथ विवाह किया। और जब यमराज सत्यवान की आत्मा को लेने आये तो सावित्री के सतीत्व के आगे उन्हें भी हारना पड़ा। और सत्यवान के प्राण छोड़ने पड़े।​

5. मंदोदरी : रावण की पत्नी मंदोदरी एक ऐसा चरित्र है जिसे सदा काम आँका जाता है। किन्तु मंदोदरी भी उन पांच सतियों में शामिल है जिनमे कई महान स्त्रियां भी अपनी जगह नहीं बना पाई। मंदोदरी अत्यंत सुन्दर होने के साथ साथ बुद्धिमान और पतिव्रता स्त्री थी। वह सदैव रावण को अच्छे कार्यों के प्रेरित करती थी और बुरे कामों का विरोध भी करती थी। किन्तु रावण ने अपनी पत्नी की कभी नहीं सुनी और अंत में मृत्यु को प्राप्त हुआ।

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