योगी का चुनावी रिपोर्ट कार्ड

मुखियाजी

जैसा सभी सरकारें करती हैं, वैसा ही यूपी की योगी सरकार ने भी किया। चुनावी दुदुंभी के बीच योगी ने यूपी सरकार के दो साल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। सब कुछ हरा-हरा पेश किया। कहा- ऐसा कभी नहीं हुआ, जो कहा सो किया। एक तरफ योगी रिपोर्ट कार्ड पेश कर रहे थे, तो दूसरी तरफ भाजपा समर्थक नारे लगा रहे थे। ‘भूतो ना भविष्यति’ वाली सरकार की मुनादी की जा रही थी। बड़ा विचित्र नजारा था। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी योगी सरकार के साथ ही मोदी सरकार की बखिया उघेड़ रही थीं और सपा-बसपा योगी सरकार को श्राप दे रही थी। रिपोर्ट कार्ड के चार दिन बाद बसपा सुप्रीमो बहन जी का बयान सामने आया। होली के दिन का यह बयान रसीला और कसैला भी रहा। मायावती ने 21 मार्च को प्रदेश के लोगों को होली की बधाई दी।

बसपा प्रमुख ने ट्वीट किया, ‘रंगों के पर्व होली की देशवासियों और खासकर यूपी में सर्वसमाज को हार्दिक बधाई और अनेक शुभकामनाएं। होली पूरे उमंग के साथ जरूर मनाएं और साथ ही गरीबों को अपनी खुशी में शामिल करने का फर्ज और वोट के अमूल्य अधिकार का इस्तेमाल करने के संवैधानिक दायित्व को भी जरूर निभाएं।’ मायावती ने आगे लिखा, ‘भाजपा का दावा कि यूपी दो वर्षों में दंगा-मुक्त रहा, अद्र्धसत्य है। इस दौरान भाजपा के सभी महारथी मंत्री और नेतागण अपने ऊपर से जघन्य आपराधिक मुकदमे हटाने में ही ज्यादा व्यस्त रहे। मॉब लिंचिंग आदि को क्यों भूल गए, जिससे देश शर्मसार हुआ और अंतत: कोर्ट को दखल देना पड़ा।’ मायावती ने इस बार भी लोकसभा चुनाव न लडऩे की घोषणा की है। साथ ही महागठबंधन को सबसे ज्यादा मजबूत बताया है। सपा-बसपा ने योगी सरकार को उखाड़ फेकने का ऐलान किया है। हालांकि इस बीच योगी का रिपोर्ट कार्ड बहुत कुछ कहता दिखता है।

यूपी में सरकार के दो साल पूरे होने पर सीएम योगी ने प्रेस कांफ्रेंस कर खुद अपनी पीठ थपथपाई। इस दौरान उन्होंने बीते दो सालों में अपने शासन के दौरान सामने आए विवादों का जिक्र तक नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार में राज्य के अंदर एक भी दंगा नहीं हुआ। उन्होंने प्रदेश में पुलिस द्वारा किए गए एनकाउंटर को अपनी उपलब्धि बताया। लेकिन इस दौरान योगी आदित्यनाथ यह भूल गए कि जिस एनकाउंटर को लेकर पीठ थपथपा रहे हैं, उसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सवाल उठ चुकी है। इतना ही नहीं, इस सरकार के कार्यकाल में कई ऐसी घटनाएं हुईं जिनको लेकर सीएम योगी की किरकिरी हुई।

योगी सरकार में एनकाउंटर की ज्यादातर घटनाएं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हुई हैं। कई एनकाउंटर को लेकर सवाल उठ चुके हैं। इनमें 5 अक्टूबर, 2018 को ग्रेटर नोएडा में सुमित गुर्जर का एनकाउंटर भी शामिल है। इस मामले में यूपी पुलिस पर आरोप लगे थे कि यह एनकाउंटर नहीं था, बल्कि सुमित की हत्या की गई थी। सुमित के ऊपर कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं था। उसके परिवार वालों ने पुलिस पर आरोप लगाए थे कि किसी अन्य सुमित गुर्जर के शक में पुलिस ने उसकी हत्या कर दी थी। एक अन्य मामले में नोएडा में एक दरोगा ने फर्जी एनकाउंटर दिखाते हुए 25 साल के एक जिम संचालक को गोली मार दी थी। मीडिया में चर्चा होने के बाद पता चला कि यह हमला व्यक्तिगत दुश्मनी में किया गया था। 10 अगस्त, 2017 को बागपत के बड़ौत इलाके के 40 साल के फल विक्रेता इकराम की मौत शामली में पुलिस की गोली लगने से हुई थी। पुलिस का दावा था कि लूट के सामान के साथ इकराम के भागने की उसे सूचना मिली थी। जब इकराम को रोकने की कोशिश की गई, तो उसने पुलिस पर गोलियां चलाईं।

इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई और इकराम की मौत हो गई थी। इस एनकाउंटर पर भी सवाल उठे थे। इकराम के परिवार वालों का कहना था कि उसे बाइक चलानी ही नहीं आती थी। गोलियों के अलावा इकराम के शरीर पर गंभीर चोट के निशान भी मिले थे। मामला उस समय और गरम हो गया, जब यूपी पुलिस ने अलीगढ़ में दो एनकाउंटर कर दिए। इनके लिए मीडिया को मौके पर बुलाकर शूटिंग कराई गई थी। उनमें से एक एनकाउंटर में मारे गए नौशाद की मां ने इस मुठभेड़ को फर्जी करार दिया था। लखनऊ के पॉश इलाके गोमती नगर विस्तार में यूपी पुलिस के कान्सटेबल प्रशांत चौधरी ने एप्पल मोबाइल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। इस मामले में मृतक का परिवार लगातार पुलिस पर सवाल उठाता रहा, जिसके बाद गोमती नगर थाने में आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस मामले को लेकर भी योगी सरकार की पुलिस की काफी किरकिरी हुई थी।

3 दिसम्बर, 2018 को बुलंदशहर के गांव महाव में गोकशी की सूचना मिलने के बाद पहुंची पुलिस टीम पर हमला कर दिया गया था। वहां गोकशी के शक में जमा भीड़ का नेतृत्व बजरंग दल का जिला संयोजक योगेश राज कर रहा था। योगेश राज और उसके साथ मौजूद लोगों ने गोकशी के विरोध में रास्ता जाम कर रखा था। रास्ता खुलवाने और लोगों को समझाने के लिए स्याना थाने के प्रभारी निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह कई पुलिसकॢमयों के साथ मौके पर पहुंचे थे। वहां उन पर जानलेवा हमला कर दिया गया। पुलिस की गाडिय़ों में आग लगा दी गई। इस दौरान इंस्पेक्टर सुबोध की पिस्टल और मोबाइल लूट लिया गया। फिर उन्हें गोली मार दी गई, जिससे उनकी मौत हो गई।

2017 में अंबेडकर की प्रतिमा का अपमान किए जाने के बाद दलित और क्षत्रिय आपस में भिड़ गए थे। हिंसा में आशीष नामक युवक की गोली लगने से मौत हो गई थी। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया था। इस हिंसा को लेकर यूपी पुलिस और सरकार को लेकर कई सवाल उठे थे। 26 जनवरी पर तिरंगा यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश का कासगंज जल उठा था। मामला 2018 का है, जब गणतंत्र दिवस के दिन झंडा यात्रा में गीत बजाने और नारेबाजी के बाद दो गुटों के बीच हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान उपद्रवियों की गोली से एक युवक की मौत हो गई थी। इस मामले में सरकार की काफी किरकिरी हुई थी। इस मामले में पुलिस पर एक वर्ग विशेष के लोगों को एक तरफा मदद करने और दूसरे के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप भी लगे थे।

इन सबके बीच गंगा की सफाई से लेकर शहरों के नाम बदलने की बातें योगी ने कीं। कुंभ को सफल करने की बातें भी कहीं। नकलविहीन परीक्षा को सफल करने की बात कही। गाय की हिफाजत की बातें कहीं और अवैध बूचडख़ानों को बंद कराने का दावा किया। लेकिन कहीं भी रोजगार के आंकड़े नहीं दिए। बुंदेलखंड से लेकर पूर्वी यूपी से लगातार पलायन क्यों जारी है, इस पर कोई बात नहीं हुई।

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