योगी कैबिनेट में इन महत्वपूर्ण निर्णयों पर लगी मोहर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:-

पुलिस आयुक्त प्रणाली के क्रियान्वयन हेतु जनपद आगरा, गाजियाबाद और प्रयागराज को महानगर क्षेत्र (मेट्रोपॉलिटन एरिया) घोषित किये जाने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद द्वारा जनपद आगरा, गाजियाबाद और प्रयागराज को महानगर क्षेत्र (मेट्रोपॉलिटन एरिया) घोषित किये जाने हेतु पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के 23 नवम्बर, 2022 के प्रस्ताव के सन्दर्भ में विभिन्न प्रस्तावों को अनुमोदित कर दिया है। इसके अनुसार जनपद आगरा, गाजियाबाद एवं प्रयागराज में नगरीय क्षेत्रों की जनसंख्या 10 लाख से अधिक है। इसके दृष्टिगत दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-8 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पुलिस जनपदों आगरा, गाजियाबाद एवं प्रयागराज के अधीन आने वाले थानों के गठन सम्बन्धी अधिसूचना को निर्गत किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।
इसके अलावा पुलिस एक्ट की धारा-2 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर सम्पूर्ण आगरा जनपद, सम्पूर्ण गाजियाबाद जनपद तथा सम्पूर्ण प्रयागराज जनपद में पुलिस आयुक्त तथा सहयोगी पदों का गठन किये जाने विषयक अधिसूचना को निर्गत किये जाने की स्वीकृति भी मंत्रिपरिषद द्वारा प्रदान की गई है। जनपद आगरा, गाजियाबाद एवं प्रयागराज की नगरीय जनसंख्या 10 लाख से अधिक होने के दृष्टिगत मंत्रिपरिषद ने दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-8 में प्रदत्त शक्तियों के अन्तर्गत जनपद आगरा, गाजियाबाद एवं प्रयागराज को महानगर क्षेत्र (मेट्रोपॉलिटन एरिया) घोषित किये जाने विषयक अधिसूचना के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। मंत्रिपरिषद ने तीनों महानगरीय क्षेत्रों में भविष्य में सृजित होने वाले नगरीय क्षेत्र के थानों को सम्मिलित किये जाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित कर दिया है।
ज्ञातव्य है कि विगत वर्षों में लखनऊ, गौतमबुद्धनगर, कानपुर (नगर) एवं वाराणसी जनपदों में पुलिस आयुक्त प्रणाली की स्थापना की गई है। इससे इन जनपदों मंें अपराध नियंत्रण की स्थिति तथा कानून-व्यवस्था में गुणात्मक सुधार आया और नागरिक सेवाएं सुदृढ़ हुई है। इन जनपदों में पुलिस आयुक्त प्रणाली की सफलता के दृष्टिगत मंत्रिपरिषद द्वारा जनपद आगरा, गाजियाबाद एवं प्रयागराज में यह व्यवस्था लागू किये जाने का निर्णय लिया गया है।

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पुलिस जनपद-आगरा, गाजियाबाद एवं प्रयागराज में पुलिस आयुक्त प्रणाली के क्रियान्वयन एवं इस सम्बन्ध में अधिसूचना के प्रख्यापन का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने पुलिस जनपद-आगरा, गाजियाबाद एवं प्रयागराज में पुलिस आयुक्त प्रणाली के क्रियान्वयन के प्रस्ताव सहित इस सम्बन्ध में अधिसूचना के प्रख्यापन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके तहत दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (अधिनियम संख्या 2 सन् 1974) की धारा 20(1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करके आगरा, गाजियाबाद एवं प्रयागराज महानगरीय क्षेत्रों में नियुक्त सहायक पुलिस आयुक्त, अपर पुलिस उपायुक्त, पुलिस उपायुक्त, अपर पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त तथा पुलिस आयुक्त को कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त किये जाने की अनुमति प्रदान की गई है।
इसके अतिरिक्त दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (अधिनियम संख्या 2 सन् 1974) की धारा 20(2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अन्तर्गत आगरा, गाजियाबाद एवं प्रयागराज महानगरीय क्षेत्रों में नियुक्त सभी अपर पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त और पुलिस आयुक्त को अपर जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त किये जाने तथा इन अपर जिला मजिस्ट्रेट को अपने क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973, उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम 1970, विष अधिनियम 1919, अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम 1956, पुलिस (द्रोह-उद्दीपन) अधिनियम 1922, पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम 1960, विस्फोटक अधिनियम 1884, कारागार अधिनियम 1894, शासकीय गुप्त बात अधिनियम 1923, विदेशियों विषयक अधिनियम 1946, गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967, पुलिस अधिनियम 1861, उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम 1944, उत्तर प्रदेश अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा अधिनियम 2005, उत्तर प्रदेश गिरोह बन्द और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1986 के अन्तर्गत, जिला मजिस्ट्रेट की समस्त शक्तियां प्रदान की गई हैं।

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उ0प्र0 श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद विधेयक-2022 को विधान मण्डल में प्रस्तुत किये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद के गठन हेतु उत्तर प्रदेश श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद विधेयक-2022 को विधान मण्डल में प्रस्तुत किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। मंत्रिपरिषद द्वारा प्रश्नगत प्रायोजना के सम्बन्ध में अग्रतर आवश्यक निर्णय लेने हेतु मुख्यमंत्री जी को अधिकृत भी किया गया है।
ज्ञातव्य है कि नैमिषारण्य की समस्त प्रकार की सांस्कृतिक, पारिस्थितिकीय तथा स्थापत्य सम्बन्धी विरासत की सौन्दर्यपरक गुणवत्ता को परिरक्षित, विकसित तथा अनुरक्षित करने की योजना तैयार करने, ऐसी योजना के क्रियान्वयन का समन्वय एवं अनुश्रवण करने और क्षेत्र में एकीकृत पर्यटन विकास तथा विरासत-संरक्षण एवं प्रबन्धन हेतु संगत नीतियां विकसित करने तथा इस विषयक किसी योजना, परियोजना या किसी विकासगत प्रस्ताव के सम्बन्ध में परामर्श एवं मार्गदर्शन प्रदान करने के लिये श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद का गठन किया जाना प्रस्तावित है।
इसका विस्तार उत्तर प्रदेश में राजस्व जिला सीतापुर/हरदोई के भीतर स्थित नैमिषारण्य क्षेत्र में होगा। नैमिषारण्य के अधीन क्षेत्र में सीतापुर के छत्तीस ग्राम सम्मिलित हैं, जिसका क्षेत्रफल 8511.284 हेक्टेयर है और जिसमें ग्यारह गंतव्य स्थान सम्मिलित हैं, जिसमें से सात गंतव्य स्थान जिला सीतापुर के अधीन आते हैं। यह कोरोना, जरीगवां, नैमिषारण्य, देवगंवा, मदरूवा, कोलूहता बरेठी और मिश्रीट हैं। चार अवस्थान जिला हरदोई के अधीन आते हैं, जो हरैया, नगवा कोठावां, गीरधरपुर उमरारी और साक्षी गोपालपुर हैं। सम्पूर्ण परिपथ 209 मील अथवा 84 कोस का है। छत्तीस ग्राम-अर्वापुर, सहसामऊ, ठाकुरनगर, लकैरामऊ बीठौली, नरसीधौली, मधवापुर, नरायनपुर, परसौली, सनजराबाद, घरवासपारा कला, घरवासपारा खुर्द, मिश्रीख, सरैयबीबी, जसरायपुर, करमैसपुर, लक्षरपुर, रूपपुर, ऊतरधौना, खरगपुर, कल्ली, लोकनापुर, करखीला, मरैली, तरसवां, लोहगांपुर, बीजगरांट, बीनौरा, भानपुर, अटवा, मनिकापुर, लेखनपुर, लक्ष्मणनगर, नैमिषारण्य, भैरमपुर और अजीजपुर हैं।
मुख्यमंत्री जी परिषद के अध्यक्ष तथा पर्यटन मंत्री परिषद के उपाध्यक्ष होंगे। मुख्यमंत्री जी द्वारा परिषद के कार्यपालक उपाध्यक्ष को नियुक्त किया जाएगा। प्रमुख सचिव पर्यटन परिषद के पदेन सहसंयोजक होंगे। आवास एवं नगर नियोजन, वित्त, संस्कृति, धमार्थ कार्य, नगर विकास, परिवहन, वन एवं जलवायु परिवर्तन, लोक निर्माण विभागों के प्रमुख सचिव व मण्डलायुक्त लखनऊ, जिला मजिस्ट्रेट सीतापुर, कार्यपालक अधिकारी नैमिषारण्य नगर पालिका परिषद तथा मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक उत्तर प्रदेश, परिषद के पदेन सदस्य होंगे।
परिषद का मुख्य कार्यपालक अधिकारी सदस्य सचिव होगा। मुख्य कार्यपालक अधिकारी राज्य सरकार के विशेष सचिव की श्रेणी से अनिम्न अधिकारियों में से राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा। इसके अलावा नैमिषारण्य क्षेत्र के विरासत के संरक्षण का ज्ञान, अनुभव, अभिदर्शन तथा तद्निमित्त कृत प्रयासों के ट्रैक अभिलेख वाले ऐसे 05 व्यक्ति राज्य सरकार के परामर्श से अध्यक्ष द्वारा परिषद के लिए नाम निर्दिष्ट किये जाएंगे। 01 करोड़ रुपये या उससे अधिक का दान करने वाले दानकर्तागण, परिषद के अनुमोदन से 03 वर्ष की अवधि के लिए नाम-निर्दिष्ट सदस्य के रूप में विचार किये जाने हेतु पात्र होंगे। परिषद की कार्यपालक समिति एवं नियोजन तथा विकास समिति भी होगी। परिषद का मुख्यालय सीतापुर में होगा।
इस प्रायोजना से नैमिषारण्य की पहचान अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो सकेगी तथा पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार का सृजन होगा।

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 ‘मुख्यमंत्री बुनकर सौर ऊर्जा योजना’ संचालित किये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने ‘मुख्यमंत्री बुनकर सौर ऊर्जा योजना’ संचालित किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। योजना में किसी प्रकार के संशोधन के लिए मुख्यमंत्री जी अधिकृत होंगे। यह योजना लागू होने की तिथि से 05 वर्ष के लिए कार्यान्वित की जाएगी। 05 वर्ष के उपरान्त योजना का बुनकरों की स्थिति पर पड़े प्रभाव का अध्ययन कराने के उपरान्त योजना को आगे गतिमान रखने पर मुख्यमंत्री जी के अनुमोदन से निर्णय लिया जाएगा।
प्रदेश में 02 लाख 50 हजार पावर लूम कार्यरत हैं, जिनके माध्यम से 05 लाख 50 हजार पावर लूम बुनकर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। वर्तमान में स्थापित पावर लूमों को सामान्यतः विद्युत से संचालित किया जा रहा है। पावर लूम बुनकरों की परम्परागत ऊर्जा स्रोत (बिजली) पर निर्भरता समाप्त/कम कर सौर ऊर्जा की ओर ले जाने हेतु योजना का संचालन किया जाना आवश्यक है। अतः पावर लूम बुनकरों को गैर पारम्परिक ऊर्जा/सौर ऊर्जा का लाभ दिलाने, पर्यावरण की रक्षा एवं बुनकरों को वस्त्र उत्पादन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा में बनाये रखने हेतु अनुदानित दर पर यूपीनेडा के माध्यम से सौर ऊर्जा संयंत्र दिये जाने का प्रस्ताव है। प्रदेश में वर्तमान में पावर लूम बुनकरों द्वारा 05 किलोवॉट से अधिक 12,486 विद्युत कनेक्शन लिये गये हैं, जिन्हें योजनान्तर्गत लाभान्वित कराये जाने का प्रस्ताव है।
पावर लूम संचालन हेतु सौर ऊर्जा सम्बन्धित सोलर प्लाण्ट की स्थापना से पावर लूम बुनकरों को अनवरत विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। योजना का उद्देश्य प्रदेश सरकार द्वारा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर अनवरत विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर बुनकरों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना तथा प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग करना है। योजना के संचालन से लगभग 50 हजार बुनकरों को लाभ मिलेगा तथा लगभग 75 हजार प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।
सामान्य पावर लूम बुनकरों हेतु सोलर प्लाण्ट की कुल लागत का 50 प्रतिशत शासकीय अनुदान देय होगा। इस लागत में संयंत्र की लागत के साथ, यूपीनेडा की 03 प्रतिशत अनुषंगिक आय एवं जी0एस0टी0 सम्मिलित है। शेष 50 प्रतिशत या अतिरिक्त लगने वाली धनराशि लाभार्थी स्वयं अपने स्रोतों से अथवा बैंक से ऋण लेकर वहन करेगा। अनुसूचित जाति/जनजाति के पावर लूम बुनकरों हेतु सोलर प्लाण्ट की कुल लागत का 75 प्रतिशत राज्य के अनुदान के रूप में देय होगा। शेष प्रति 25 प्रतिशत या अतिरिक्त लगने वाली धनराशि लाभार्थी स्वयं अपने स्रोतों से अथवा बैंक से ऋण लेकर वहन करेगा।
योजना के क्रियान्वयन के लिए यूपीनेडा को कार्यदायी संस्था बनाया जाएगा। यूपीनेडा द्वारा अनुषंगिक आय के रूप में प्रति संयंत्र 03 प्रतिशत धनराशि ली जाएगी। योजनान्तर्गत लाभार्थियों की संख्या वित्तीय वर्ष में प्राविधानित बजट के सापेक्ष निर्धारित की जाएगी। बजट प्राविधान अनुदान संख्या-06 के अन्तर्गत कराया जाएगा। सम्बन्धित वित्तीय वर्ष में बजट की उपलब्धता के आधार पर बुनकरों को प्रथम आगत प्रथम पावत के आधार पर लाभान्वित किया जाएगा। योजना में कम से कम 10 प्रतिशत महिला बुनकरों को लाभान्वित किया जाएगा।
वर्तमान में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग के 04 दिसम्बर, 2019 के शासनादेश के अनुसार पावर लूम एवं हथकरघा बुनकरों को विद्युत आपूर्ति अनुदान दिया जाता है। मुख्यमंत्री बुनकर सौर ऊर्जा योजना का लाभ प्राप्त करने वाले पावर लूम एवं हथकरघा बुनकरों को सौर ऊर्जा संयंत्र से उत्पादित होने वाली बिजली यूनिट्स तक विद्युत आपूर्ति अनुदान देय नहीं होगा। मुख्यमंत्री बुनकर सौर ऊर्जा योजना के लाभार्थियों की सूचना हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड को दी जाएगी।
सर्वप्रथम योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाएगा। पावर लूम बुनकरों की संस्था/यूनिट/लाभार्थी की पात्रता के अनुसार लाभार्थी से आवेदन-पत्र सहायक आयुक्त हथकरघा के परिक्षेत्रीय कार्यालय द्वारा प्राप्त किया जाएगा। कार्यालय स्तर पर पात्रता की जांच की जाएगी। इसके बाद परिक्षेत्र स्तरीय कमेटी के समक्ष परीक्षण एवं अनुमोदन हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा। 10 किलोवॉट तक के सोलर प्लाण्ट के लिए परिक्षेत्र स्तरीय कमेटी से अनुमोदन के उपरान्त जनपदवार प्रस्तावों पर सम्बन्धित परिक्षेत्रीय सहायक आयुक्त, हथकरघा स्वीकृति प्रदान करेंगे तथा निदेशालय को सूचित करेंगे।

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उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम के 23 बस स्टेशनों को पी0पी0पी0 पद्धति पर विकसित किये जाने हेतु संशोधित/परिमार्जित बिड डॉक्यूमेंट्स अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के 23 बस स्टेशनों को निजी सार्वजनिक सहभागिता (पी0पी0पी0) पद्धति पर डिजाइन बिल्ड फाइनेंस ऑपरेट एण्ड ट्रांसफर मॉडल पर विकसित किये जाने हेतु अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग द्वारा निर्गत निजी सार्वजनिक सहभागिता (पी0पी0पी0) गाइडलाइन्स 2016 द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अन्तर्गत संशोधित/परिमार्जित बिड डॉक्यूमेंट्स (आर0एफ0क्यू0, आर0एफ0पी0 एवं कन्सेशन एग्रीमेंट्स) को अनुमोदित कर दिया है। परियोजना के महत्ता के दृष्टिगत तथा इसकी समयबद्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस परियोजना के क्रियान्वयन के प्रयोजनार्थ निजी सार्वजनिक सहभागिता (पी0पी0पी0) के मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अन्तर्गत मंत्रिपरिषद को प्रदत्त अधिकारों का प्रतिनिधायन मुख्यमंत्री जी को करने का निर्णय भी लिया गया है।
इन 23 बस स्टेशनों में कौशाम्बी जनपद गाजियाबाद (डिपो कार्यशाला/बस स्टेशन), गाजियाबाद, साहिबाबाद (डिपो कार्यशाला/बस स्टेशन), बुलन्दशहर (नई भूमि), ट्रांसपोर्ट नगर जनपद आगरा, ईदगाह जनपद आगरा, आगरा फोर्ट जनपद आगरा, मथुरा (पुराना), कानपुर सेण्ट्रल (झकरकटी), वाराणसी कैण्ट (बस स्टेशन/क्षेत्रीय डिपो कार्यशाला), सिविल लाइन्स जनपद प्रयागराज, जीरो रोड जनपद प्रयागराज, मिर्जापुर (डिपो कार्यशाला/बस स्टेशन), विभूति खण्ड जनपद लखनऊ (बस स्टेशन/क्षेत्रीय डिपो कार्यशाला), अमौसी जनपद लखनऊ (बस स्टेशन/डिपो कार्यशाला), चारबाग जनपद लखनऊ, रायबरेली (बस स्टेशन/डिपो कार्यशाला), बरेली (सेटेलाइट्स) (बस स्टेशन/क्षेत्रीय कार्यशाला), सोहराब गेट जनपद मेरठ (बस स्टेशन/डिपो कार्यशाला), गढ़ मुक्तेश्वर (नई भूमि) जनपद हापुड़, रसूलाबाद जनपद अलीगढ़ (बस स्टेशन/डिपो कार्यशाला), अयोध्या धाम बस स्टेशन जनपद अयोध्या तथा गोरखपुर सम्मिलित हैं।

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वाहनों के स्क्रैप के लिए निर्गत ‘निक्षेप प्रमाण-पत्र’ के सापेक्ष नया वाहन क्रय कर पंजीकृत कराने पर व्यावसायिक/गैर-व्यावसायिक वाहनों पर अधिरोपित किये जाने वाले कर में छूट के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने वाहनों के स्क्रैप के लिए निर्गत ‘निक्षेप प्रमाण-पत्र’ के सापेक्ष नया वाहन क्रय कर पंजीकृत कराने पर व्यावसायिक/गैर-व्यावसायिक वाहनों पर अधिरोपित किये जाने वाले कर में छूट के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
इसके तहत उत्तर प्रदेश मोटर यान कराधान अधिनियम, 1997 के सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत वाहनों के ‘निक्षेप प्रमाण-पत्र’ के सापेक्ष मोटर यान कर में छूट ‘निक्षेप प्रमाण-पत्र’ की तिथि से 01 वर्ष की अवधि तक के लिए ही गैर-व्यावसायिक यानों के प्रकरण में 15 प्रतिशत तथा व्यावसायिक वाहनों के प्रकरण में 10 प्रतिशत प्रदान किये जाने का निर्णय लिया गया है।
ज्ञातव्य है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की अधिसूचना संख्या-जीएसआर 653(अ), दिनांक 23.09.2021 द्वारा मोटरयान (यान स्क्रैपिंग सुविधा का रजिस्ट्रीकरण और कार्य) नियम, 2021 प्रख्यापित किया गया है, जो 25 सितम्बर, 2021 से प्रवृत्त है। इस नियमावली में ‘पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा केन्द्र’ (आर0वी0एस0एफ0) द्वारा वाहनों के स्क्रैप के लिए ‘निक्षेप प्रमाण-पत्र’ निर्गत करने का प्राविधान है। इस प्राविधान के फलस्वरूप ‘पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा केन्द्र’ (आर0वी0एस0एफ0) में वाहन को स्क्रैप कराने के सापेक्ष सम्बन्धित आर0वी0एस0एफ0 द्वारा वाहन के प्रति एक ‘निक्षेप प्रमाण-पत्र’ निर्गत किया जायेगा।
इसके क्रम में ‘पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा केन्द्र’ (आर0वी0एस0एफ0) को प्रोत्साहित करने हेतु सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की अधिसूचना संख्या-जीएसआर 720(अ), दिनांक 05.10.2021 द्वारा केन्द्रीय मोटर यान नियमावली, 1989 में नियम-51क जोड़ते हुए यह प्राविधानित किया गया है कि यदि ‘निक्षेप प्रमाण-पत्र’ के सापेक्ष कोई वाहन पंजीकृत किया जाता है तो उन वाहनों के कर में छूट प्रदान की जायेगी, जो गैर-व्यावसायिक वाहनों के प्रकरण में 25 प्रतिशत तक और व्यावसायिक वाहनों के प्रकरण में 15 प्रतिशत तक दी जा सकती है। यह छूट व्यावसायिक वाहनों के प्रकरण में 08 वर्ष तक एवं गैर-व्यावसायिक वाहनों के प्रकरण में 15 वर्ष तक उपलब्ध होगी।
भारत सरकार की 05 अक्टूबर, 2021 की इस अधिसूचना के प्राविधानों के क्रम में वाहनों के ‘निक्षेप प्रमाण-पत्र’ के सापेक्ष नया वाहन क्रय कर पंजीकृत कराने पर मोटर यान कर में छूट दिये जाने सम्बन्धी प्रकरण पर सम्यक विचारोपरान्त यह पाया गया कि उत्तर प्रदेश मोटर यान कराधान अधिनियम, 1997 की धारा 3(1) में राज्य सरकार को कर में छूट देने की शक्ति प्रदत्त है।
पुराने वाहनों के संचालन से उत्सर्जित धुआँ, वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारक है। इसके दृष्टिगत स्वच्छ एवं वायु प्रदूषण मुक्त वातावरण के निर्माण हेतु भारत सरकार द्वारा यान स्क्रैपिंग नीति लागू की गयी है। इस नीति के क्रियान्वयन के फलस्वरूप न केवल प्रदूषणकारी वाहन अस्तित्वहीन हो जायेंगे, बल्कि नये वाहनों की मांग बढ़ने से रोजगार के नये अवसर उत्पन्न होंगे एवं राजस्व में अभिवृद्धि भी होगी।

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केन्द्र सहायतित योजना स्टैबलिशमेंट ऑफ न्यू मेडिकल कॉलेजेज अटैच्ड विथ एक्जिस्टिंग डिस्ट्रिक्ट/रेफरल हॉस्पिटल्स (फेज-3) के अन्तर्गत स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों से सम्बद्ध जिला चिकित्सालय अथवा रेफरल अस्पताल की चल-अचल सम्पत्ति एवं कार्मिकों के हस्तांतरण के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने केन्द्र सहायतित योजना स्टैबलिशमेंट ऑफ न्यू मेडिकल कॉलेजेज अटैच्ड विथ एक्जिस्टिंग डिस्ट्रिक्ट/रेफरल हॉस्पिटल्स (फेज-3) के अन्तर्गत स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय यथा-अमेठी, औरैया, कानपुर देहात, कुशीनगर कौशाम्बी, गोण्डा, चन्दौली, पीलीभीत, बुलन्दशहर, बिजनौर, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, सुल्तानपुर एवं सोनभद्र से सम्बद्ध जिला चिकित्सालय अथवा रेफरल अस्पताल की चल-अचल सम्पत्ति एवं कार्मिकों के हस्तांतरण के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
इसके तहत, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के नियंत्रणाधीन जिला चिकित्सालय/रेफरल अस्पताल यथा-अमेठी, औरैया, कानपुर देहात, कुशीनगर कौशाम्बी, गोण्डा, चन्दौली, पीलीभीत, बुलन्दशहर, बिजनौर, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, सुल्तानपुर एवं सोनभद्र की समस्त अचल सम्पत्तियों को चिकित्सा शिक्षा विभाग के पक्ष में निःशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गयी है। साथ ही, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के नियंत्रणाधीन इन जिला चिकित्सालयों/रेफरल अस्पतालों यथा-अमेठी, औरैया, कानपुर देहात, कुशीनगर, कौशाम्बी, गोण्डा, चन्दौली, पीलीभीत, बुलन्दशहर, बिजनौर, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, सुल्तानपुर एवं सोनभद्र की समस्त चल सम्पत्तियों को यथास्थिति क्रमशः स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, सोसाइटी अमेठी, औरैया, कानपुर देहात, कुशीनगर, कौशाम्बी, गोण्डा, चन्दौली, पीलीभीत, बुलन्दशहर, बिजनौर, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, सुल्तानपुर एवं सोनभद्र के पक्ष में हस्तान्तरित करने का निर्णय लिया गया है।
इसके अतिरिक्त, इन 14 जिला चिकित्सालयों/रेफरल अस्पतालों में तैनात मानव संसाधन यथा-चिकित्सा अधिकारी संवर्ग से कार्यरत मुख्य चिकित्सा अधीक्षक/चिकित्सा अधीक्षक, ई0एम0ओ0 तथा 15 अन्य चिकित्सक सम्बन्धित स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय सोसाइटी के अन्तर्गत योगदान की तिथि से प्रतिनियुक्ति पर 03 वर्ष के लिए माने जायेंगे, जिसे आवश्यकतानुसार 05 वर्ष की अवधि के लिए नियमों की परिधि में बढ़ाए जा सकने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही इन 14 जिला चिकित्सालयों/रेफरल अस्पतालों में तैनात अन्य संवर्गों के मानव संसाधन यथा-नर्सेज, टेक्नीशियन, वार्ड ब्वाय, वाहन चालक आदि के सापेक्ष कार्यरत नियमित कार्मिक चिकित्सा शिक्षा विभाग, उ0प्र0 शासन के अधीन सम्बन्धित स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय सोसाइटी के अन्तर्गत योगदान की तिथि से प्रतिनियुक्ति पर 03 वर्ष के लिए माने जायेंगे जिसे आवश्यकतानुसार 05 वर्ष की अवधि के लिए नियमों की परिधि में बढ़ाये जाने की स्वीकृति प्रदान की गयी है।
यह निर्णय भी लिया है कि इन 14 जिला चिकित्सालयों अथवा रेफरल अस्पतालों में प्रतिनियुक्ति पर आने वाले इन कार्मिकों को वेतन संरक्षण का लाभ देय होगा। इनकी सेवायें राज्य सरकार के कर्मचारियों की भाँति बनी रहेगी। इन कार्मिकों के वित्तीय वर्ष 2022-2023 तक के समस्त वेतन एवं भत्ते चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा एवं तदनन्तर वित्तीय वर्ष 2023-2024 से देय वेतन एवं भत्ते का भुगतान चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा किया जाएगा। इन समस्त कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों हेतु सोसाइटी में समकक्ष वेतनमान में सृजित हो रहे पदों के सापेक्ष इन्हें प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ किया जायेगा। इसके अतिरिक्त, इन 14 जिला चिकित्सालयों अथवा रेफरल अस्पतालों के अनुरक्षण, विद्युत देयक, सम्पत्ति कर एवं जल कर तथा अन्य समस्त देयकों का भुगतान वित्तीय वर्ष 2022-23 तक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग एवं तदनन्तर वित्तीय वर्ष 2023-24 से चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा किया जाएगा।

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 अयोध्या नगर निगम के कार्यालय भवन के निर्माण हेतु नजूल भूमि के आवंटन/हस्तांतरण के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने जनपद अयोध्या स्थित मोहल्ला सिविल लाइन में नगर निगम कार्यालय भवन के निर्माण हेतु नजूल भूमि के आवंटन/हस्तांतरण के सम्बन्ध में प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि मंत्रिपरिषद के अनुमोदन से राज्य सरकार के सेवारत विभागों को निःशुल्क तथा राज्य सरकार के गैर-सेवारत विभागों व भारत सरकार के विभागों को नजूल भूमि प्रभावी जिलाधिकारी सर्किल रेट पर सशुल्क आवंटित/हस्तांतरित की गयी है। इसी सिद्धान्त के आधार पर जिलाधिकारी अयोध्या से प्राप्त प्रस्ताव/संस्तुति के क्रम में वित्त (लेखा) अनुभाग-2 के कार्यालय ज्ञाप संख्या-ए-2-75/10-77 -14(4)/74 दिनांक 03.02.1977 के प्राविधानों को शिथिल करते हुए अपवादस्वरूप जनपद अयोध्या मोहल्ला सिविल लाइन्स स्थित गाटा संख्या-4069मि0, क्षेत्रफल
9875.76 वर्गमीटर नजूल भूमि नगर निगम कार्यालय भवन के निर्माण हेतु नगर विकास विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के पक्ष में कतिपय शर्ताें एवं प्रतिबन्धों के अधीन तथा प्रभावी जिलाधिकारी सर्किल दर पर सशुल्क आवंटित/हस्तांतरित किये जाने का निर्णय लिया गया है।

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जनपद उन्नाव में शहीद गुलाब सिंह लोधी प्रशिक्षण विद्यालय की क्षमता को दोगुना किये जाने हेतु आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण कार्याें को स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने वित्त विभाग के शासनादेशों-13 दिसम्बर 2019, 06 जून 2022 के प्रस्तर-2(19)(ग) तथा 26 अगस्त, 2014 के शासनादेश के प्रस्तर-4/5 में विहित व्यवस्था के क्रम में जनपद उन्नाव में शहीद गुलाब सिंह लोधी प्रशिक्षण विद्यालय की क्षमता को दोगुना किये जाने हेतु आवासीय भवनों के निर्माण हेतु 16120.90 लाख रुपये एवं अनावासीय भवनों के निर्माण हेतु 6285.30 लाख रुपये कुल 22388.20 लाख रुपये की लागत पर प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति तथा इस सीमा तक पुनरीक्षित प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति विभागीय मंत्री के अनुमोदन से निर्गत किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
ज्ञातव्य है कि वर्तमान में पुलिस कर्मियों की व्यापक भर्ती एवं कार्यरत पुलिस कर्मियों को रिफ्रेशर कोर्स तथा इनसर्विस ट्रेनिंग प्रदान कर उनकी कार्यकुशलता बढ़ाये जाने के दृष्टिगत प्रशिक्षण प्रदान करने एवं वर्तमान चुनौतियों का सामना करने हेतु सक्षम बनाये जाने के दृष्टिगत प्रशिक्षण संस्थानों में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए क्षमता बढ़ाये जाने का निर्णय लिया गया है। इस क्रम में जनपद उन्नाव में शहीद गुलाब सिंह लोधी प्रशिक्षण विद्यालय की क्षमता को दोगुना किये जाने हेतु आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण कार्य की स्वीकृति दी गयी है।

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