योगी जी! अंग्रेजी टीचर तो हैं नहीं, कैसे चलेंगी क्लासें

अखिलेश अखिल

देश के सबसे बड़े सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कोई मामूली आदमी तो हैं नहीं। उनकी एक आवाज ना सिर्फ प्रदेश वासियों को चौंकाती है बल्कि देश के अन्य सूबे के मंत्री -संतरी भी ध्यान से सुनते हैं। दिल्ली की राजनीति भी योगी के बयान और ऐलान पर नज़रे लगाए रहती है। यूपी केवल योगी जी की ही राजनीतिक भूमि नहीं है ,पीएम मोदी की भी कर्मभूमि और राजनीतिक भूमि अब यूपी ही है। यूपी की सत्ता से जुड़ी बहुत सारे निर्णय दिल्ली से भी लिए जाते हैं क्योंकि यूपी देश को सबसे ज्यादा सांसद भी देता है। मामला यही तक नहीं है। यूपी भगवान राम का जन्म स्थल भी है भगवान बुद्ध का भी। अयोध्या, यूपी में ही है और मथुरा बृन्दावन भी वही है। वही है ज्ञान की नगरी इलाहाबाद भी और यही बिराजते हैं बाबा विश्वनाथ भी। यह यूपी ही है जहां से देश को सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री भी मिले हैं। इसलिए यूपी ना मामूली है और ना ही यहां की राजनीति। इसलिए यूपी की सरकार पर सबकी नजरे टिकी है।

सरकार बनाते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुछ ही दिनों बाद एक बड़ा ऐलान किया। ऐलान शिक्षा में सुधार को लेकर था। सीएम ने कहा कि अब प्रदेश के बच्चों को अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा दी जायेगी। सरकार की समझ थी कि अंग्रेजी माध्यम से बच्चे पढ़ेंगे तो दुनिया को अच्छी तरह से समझ पाएंगे और खासकर इस प्रयोग से उन गरीब बच्चो को ज्यादा लाभ मिलेगा जो पैसों के अभाव में निजी अंग्रेजी स्कूलों में नही पढ़ पाते हैं। योगी जी के इस ऐलान की काफी सराहना हुयी। दिल्ली के राजनीतिक गलियारों से लेकर मीडिया में भी इस पर काफी चर्चा हुयी और खबरे छपी। गरीब लोग भी चहकने लगे कि योगी के रूप में यह पहला सीएम मिला है जो बच्चो को अंग्रेजी शिक्षा देने पर उतारू है। बच्चे भी चहके। योगी जी ने कहा था कि इस साल के अप्रैल से शुरू होने वाले सत्र से प्रदेश के 5000 सरकारी प्राइमरी स्कूल इंग्लिश मीडियम से संचालित होंगे। लेकिन योगी सरकार का यह फैसला मुसीबत बनता दिख रहा है। जो खबरें मिल रही है उसके मुताविक स्कूलों में अंग्रेजी पढ़ाने वाले टीचर खोजने से भी नहीं मिल रहे हैं। लिहाजा ऐसे में नए सत्र में अंग्रेजी मीडियम की क्लासेस लगनी मुश्किल लग रही है।

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री योगी के इस ऐलान के बाद बेसिक शिक्षा विभाग को बड़े स्तर पर तैयारी करने के आदेश मंत्रालय की तरफ से दिए गये थे। विभाग के अमले इस काम में जुटे भी। दौड़ भाग शुरू हुयी और तरह तरह के उपाय किये जाने लगे। कई कमेटी बनी और तय हुआ कि अंग्रेजी पढ़ाने वाले स्कूलों को चिन्हित किया जाय और अंग्रेजी पढ़ाने वाले टीचर को तैयार किया जाय। जिन स्कूलों को इंग्लिश मीडियम से संचालित किया जाएगा, उनमें बच्चों की किताबें भी इंग्लिश की होंगी और लेक्चर भी। फिर टीचरों को बड़े स्तर प्र प्रशिक्षण देने की बातें भी की गयी। तमाम तरह के हथकंडे अपनाये गए और इस प्रक्रिया में नया सत्र सामने आ गया।

अब जो जानकारी जिलों के शिक्षा विभाग से मिल रही हैं, वे चौंकाने वाले हैं। राज्य के सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने इस व्यवस्था को शुरू करने में अपने हाथ खड़े करने शुरू कर दिए हैं। अफसरों का कहना है कि जिलों में अंग्रेजी पढ़ाने के लिए टीचर नहीं मिल रहे हैं। अगर टीचर ही पढ़ाने के लिए नहीं होंगे तो बच्चा क्या पढ़ेगा। बता दें कि राज्य के ज्यादातर प्राइमरी स्कूल शिक्षा मित्रों के सहारे चल रहे। इस योजना के अनुसार प्रत्येक ब्लॉक में 5 स्कूल इंग्लिश मीडियम से संचालित होने थी। उसके बाद स्कूलों की संख्या को बढ़ाने की योजना थी।

गौरतलब है कि अभी यूपी में करीब 1.59 लाख सरकारी प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूल हैं। इनमें करीब 1.54 करोड़ छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं और इनमें से 5000 स्कूलों को इंग्लिश मीडियम में बदला जाना था। लेकिन जिस तरह की तैयारी दिख रही है वैसे में माना जा रहा है कि योगी सरकार की बच्चो को अंग्रेजी पढ़ाने की इच्छा शायद इस सत्र में पूरा नहीं हो सके। अभी इसका इन्तजार करना पड़ सकता है।

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