योगी जी! हमारा नाम कब बदलेगा!

दिल्ली ब्यूरो: पूर्वांचल ,अवध ,पश्चमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों से लेकर कस्बाई इलाकों को छान मारिये तो पता चलता है यहां की जनता हर रोज रोजमर्रा की परेशानी से तबाह है। लंठई ,गुंडई ,अपराध और बेरोजगारी ने लोगों को जीना मुहाल कर रखा है। कहने के लिए सरकार काम करती दिखती है लेकिन जनता को कही सरकार दिखाई नहीं पड़ती। ऊपर से हर रोज योजनाओं के ऐलान से भी जनता परेशान है। पिछले पांच सालों में जितनी योजनाएं यूपी में घोषित की गयी उसका लाभ जनता को कितना मिला कोई नहीं बताता। जनता मौन है। इधर जब आगामी लोक सभा चुनाव की बारी आ रही है ,सूबे में राममंदिर को लेकर चल रही सुगबुगाहट जनता को सहमाये हुए है। नाम बदलने की राजनीति पर जिस तरह से सूबे के मुख्यमंत्री योगी जी भीड़े हुए है उससे लगता है कि योगी जी की असली चिंता प्रदेश के विकास की नहीं है। उनका असली मिशन नाम बदलने का ही है। जिस तेजी से वे नाम बदल रहे ,कहा जा सकता है कि योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता ‘मुस्लिम नाम’ वाले शहरों को बदलने के आसपास घूमती दिखाई दे रही है। कई लोग अब कहने लगे हैं उत्तर प्रदेश में ऐसे नामों की कमी नहीं हैं और यह उन्हें 2019 तक व्यस्त रख सकता है।

यूपी के कई शहर मुस्लिम नाम से जुड़े हुए हैं। अब वे शहर भी नाम बदलने की बारी का इन्तजार कर रहे हैं। एक सूची पर नजर डालिए। गाजियाबाद को ही ले लीजिये। 1740 में सम्राट, ग़ाज़ी-उद्-दीन द्वारा बसाये गये इस शहर को इसके संस्थापक ग़ाज़ी-उद्-दीन द्वारा ग़ाज़ीउद्दीननगर नाम दिया गया। 1864 में इसका नाम गाजियाबाद हुआ। राष्ट्रीय राजधानी से सटे होने के कारण इसे ‘गेटवे आॅफ यूपी’ भी कहा जाता है। इस जिले में एक औद्योगिक क्षेत्र है जिसे साहिबाबाद के नाम से जाना जाता है। योगी जी दोनों का नाम बदल सकते हैं। इसी तरह से मुज़फ्फरनगर भी मुस्लिम नाम है। इतिहास और राजस्व प्रमाणों के अनुसार दिल्ली के बादशाह शाहजहां ने सरवट नाम के परगना को अपने एक सरदार सैयद मुजफ़्फ़र खान को जागीर में दिया था जहां पर 1633 में उसने और उसके बाद उसके बेटे मुनव्वर लश्कर खान ने मुजफ़्फ़रनगर नाम का यह शहर बसाया। इसके नाम भी बदलने की मांग उठी है। इसी तरह गाजीपुर जिला मुगल काल में शानदार इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। कुछ इतिहासकारों का कहना हैं कि हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए जाने जाने वाले मुस्लिम संत सैय्यद मसूद गाजी ने इस शहर की स्थापना की थी। इसे भी बदलना जरुरी है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित अलीगढ का नाम यहां के शासकों के हिसाब से बदलता रहा है। एक समय में कोल के नाम से जाना जाने वाले इस शहर का नाम 1524-25 में मुहम्मदगढ़ हो गया। 1753 में जाट शासक सूरजमल ने इसे रामगढ़ नाम दिया। बाद में जब शिया कमांडर नजाफ खान ने कोल पर कब्जा कर लिया, तो उन्होंने इसे अलीगढ़ नाम दिया। उधर फ़िरोज़ाबाद की कहानी भी कुछ इसी तरह की है। इस शहर का प्राचीन नाम चन्द्वार था। फिरोजाबाद का नाम फिरोज शाह मंसब डार द्वारा 1566 में अकबर के शासनकाल में दिया गया था। ऐसा कहा जाता है कि राजा टोडरमल इस शहर से गया की तीर्थयात्रा को गए थे।

बरेली से 72 किमी और लखनऊ से 160 किमी दूर है शाहजहांपुर। कहा जाता है कि मुगल बादशाह शाहजहां के नाम पर इस शहर का नाम 1647 में शाहजहांपुर रखा गया। उधर सुल्तानपुर के बारे में कई कहानी है। किवंदती है कि इस शहर की स्थापना राम के पुत्र कुश ने की थी इसलिए इसके कुशपुरा या कुशभवनपुर के नाम से भी जाना जाता है। 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेजों द्वारा क्षेत्र को कब्जा करने से पहले, गिरघाट गांव में नदी के दाहिने किनारे पर एक सैन्य स्टेशन और छावनी क्षेत्र स्थापित किया गया था। इसे आमतौर पर अधिकारियों द्वारा सुल्तानपुर के रूप में जाना जाता था। आंबेडकर नगर जिले का मुख्यालय है अकबरपुर। आंबेडकर नगर जिले का निर्माण 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने फैजाबाद को काटकर किया था. मान्यताओं के अनुसार राजा दशरथ ने यहीं पर श्रवण कुमार पर तीर चलाया था। इसके नाम भी बदले जा सकते हैं। इसी के साथ मुरादाबाद भी है। इस शहर को 1600 में मुगल बादशाह शाहजहां के बेटे मुराद ने बसाया था। उनके नाम पर इसका नाम मुरादाबाद पड़ा।

उधर मिर्जापुर भी है। यह जानकर आश्चर्य होगा कि मिर्जापुर का नाम किसी मुस्लिम शासक ने नहीं बल्कि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1735 में रखा था। पहले इसका नाम मिर्जापोर था। इस नाम की उत्पत्ति फारसी शब्द ‘अमिराजादे’ से हुई थी जिसका मतलब शासक का बच्चा है।लगे हाथ आजमगढ़ भी पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्थित है। आज़मगढ़ की स्थापना 1665 में गौतम राजपूत विक्रमजीत के बेटे ने की थी। आधिकारिक जिला वेबसाइट का कहना है कि गौतम राजपूत विक्रमजीत ने इस्लाम स्वीकार कर लिया था। उनके बेटे आजम ने इस शहर की स्थापना की। इसी तरह शिकोहाबाद ,फतेहपुर सिकरी और फर्रुखाबाद भी नाम बदलने की कतार में खड़े हैं। योगी जी अगर केवल नाम बदलने का मिशन ही चलाये तो अपने कार्यकाल में सूबे कई कई जिले नए नामो से अवतरित हो जायेंगे।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper