रंगकर्मी जेसी पालीवाल और एस आर एम ट्रस्ट के संस्थापक देव मूर्ति जी ने किया थिएटर फेस्टिवल इंद्रधनुष का उद्वघाटन

बरेली: श्री राममूर्ति स्मारक रिद्धिमा में थिएटर फेस्टिवल इंद्रधनुष रंग महोत्सव 2022 का कल शानदार आगाज हुआ। रंगकर्मी जेसी पालीवाल और एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक चेयरमैन देव मूर्ति जी ने दीप प्रज्वलित कर इसका उद्घघाटन किया। पालीवाल ने कला के जरिये समाज के विकसित होने और एकता की बात कही। उन्होंने कहा कि कला ही लोगों को जोड़ती है और समाज का विकास करती है। भागदौड़ भरी जिंदगी में इससे जुड़ना शरीर और मानसिक सेहत के लिए भी जरूरी है। देव मूर्ति जी ने रिद्धिमा की स्थापना की वजह बताई। उन्होंने कहा कि गंगा जमुनी तहजीब, सांस्कृतिक विरासत और शास्त्रीय संगीत व शास्त्रीय नृत्य को बचाने के साथ युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और संस्कारों को जोड़ने के लिए पिछले वर्ष 8 फरवरी को रिद्धिमा की स्थापना की गई थी। कोरोना काल में स्थापित इस संस्थान ने कम समय में ही शास्त्रीय नृत्य, शास्त्रीय और सुगम संगीत, नाट्य कला, ललित कला एवं रंगमंच के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना ली है।

पहले दिन थिएटर फेस्टिवल इंद्रधनुष रंग महोत्सव में जॉन मोर्टिमर के ‘डॉक- ब्रीफ़’ के हिंदी रूपांतरण “मैन डिस्पोजेज, गॉड प्रपोजेज” का मंचन हुआ। इसका रूपांतरण और निर्देशन सलीम शाह ने किया। उन्होंने एडवोकेट कमल कांत त्रिपाठी की मुख्य भूमिका भी निभाई। उनका साथ जय सिंह ने हिमाकत कुरैशी के किरदार में दिया। जिस पर अपनी पत्नी की हत्या का इल्जाम है। सारे सबूत उसके खिलाफ हैं और उसे सजा मिलना तय है। लेकिन इसी बीच एक वकील कमल कांत त्रिपाठी का उससे सामना होता है, जो छोटा और ‘हलफनामा बनाने’ वाला वकील है। हिमाकत का मामला कमल को सौंपा जाता है। कमल अपने पूरे जीवन में कोई मुकदमा नहीं जीता। फिर भी उन्हें उम्मीद है कि वह मुकदमा जीतेंगे और कोई एक मामला उन्हें प्रसिद्ध कर देगा। इसी सोच से वह हिमाकत कुरैशी का मामले की पैरवी करना स्वीकार करते हैं। फिर शुरू होता है कोर्ट रूम का कभी नहीं देखा गया ड्रामा।

इसमें एडवोकेट त्रिपाठी और हिमाकत कोर्ट रूम की रिहर्सल करते हैं। लेकिन जज के सामने त्रिपाठी अपने तर्क नहीं रख पाता और न ही वह किसी से कोई पूछताछ ही कर पाता है। ऐसे में हिमाकत को फांसी की सजा हो जाती है, लेकिन सही पैरवी न होने का हवाला देकर राज्यपाल उसे बरी कर देते हैं। इस फैसले पर एडवोकेट त्रिपाठी और हिमाकत खुश होते हैं। हिमाकत वकील को कोर्ट में उनके खामोश रहने की वजह पूछता है और इसी को अपने बरी किए जाने का क्रेडिट देता है। इस मौके पर ट्रस्टी आशा मूर्ति, आदित्य मूर्ति, इंजीनियर सुभाष मेहरा, डा.अनुज कुमार सहित शहर के गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।

बरेली से ए सी सक्सेना ।

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