रक्षाबंधन पर दूर करें कष्ट

श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। हिंदू धर्म के सबसे बड़े त्योहारों में से एक रक्षाबंधन इस बार 26 अगस्त को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन पर बहन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती है और उसकी लंबी उम्र की कामना करती है।

रक्षाबंधन पर दूर करें कष्ट

रक्षाबंधन का पर्व केवल भाई-बहन के लिए ही पावन दिन नहीं है, बल्कि इस दिन ग्रह दोष निवारण के लिए विशेष उपाय भी किए जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन किए गए उपाय बहुत ज्यादा फलदायक होते हैं। रक्षाबंधन के पवित्र दिन कुछ आसान, लेकिन अचूक उपायों को करके हम अपने जीवन की बहुत सी समस्याओं को दूर कर सकते हैं।

जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष हो, वे रक्षाबंधन के दिन शिवलिंग पर मीठा कच्चा दूध चढ़ाएं, नाग देवता से अपने बुरे कर्मों, जाने-अनजाने में की गई भूलों के लिए क्षमा मांगें। सबसे महत्वपूर्ण बात, उस दिन चांदी की डिब्बी में शहद भरकर कहीं वीराने में गाड़ दें। इससे कालसर्प दोष का प्रभाव कम होने लगता है। इसके अलावा जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा नीच में हो, वह रक्षाबंधन के दिन शाम को चंद्रमा के उदय होने के समय कच्चे दूध में मीठा डालकर उससे चंद्रदेव को अघ्र्य देकर ‘ऊं सोमेश्वराय नम: का जप करें। दूध का दान करें। जिन लोगों को शत्रुओं से भय है, वह रक्षाबंधन के दिन हनुमानजी को चोला चढ़ाएं और मोतीचूर के लड्डू और गुड़ का प्रसाद अॢपत करते हुए लाल गुलाब के फूल चढ़ाएं। इसके अलावा भी कई उपाय हैं, जिन्हें अपनाकर आप कष्टों से मुक्ति पा सकते हैं।

– अगर शनि देव से पीड़ा मिल रही हो, तो रक्षाबंधन के दिन कांच की एक बोतल में सरसों का तेल भरकर उसे अपने सर के उपर से वारकर बहते जल के नीचे दबा दें।
– कुंडली में राहु खराब स्थिति में हो, तो रक्षाबंधन के दिन 11 पानी वाले नारियल अपने ऊपर से उतारकर बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए।
– अगर किसी को नजर लगी हो, तो रक्षाबंधन के दिन एक फिटकरी का टुकड़ा उस नजर लगे हुए व्यक्ति पर से उतारकर चूल्हे में जला दें।
– कोई व्यक्ति लंबे समय से बीमार हो और उसकी बीमारी ठीक नहीं हो रही है, तो रात में एक सिक्का रोगी के सिरहाने रख देना चाहिए। अगले दिन सुबह ही उस सिक्के को श्मशान में फेंक देने से रोगी शीघ्र स्वस्थ हो जाता है।

पूजा की थाली हो खास

रक्षाबंधन पर बहनें अमूमन सिर्फ एक थाली लेकर उसमें राखी और मिठाइयां रख लेती हैं, जबकि इस पर्व का संबंध पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। इसलिए पूजा की थाली खास होनी चाहिए। रक्षाबंधन के दिन पूजा की थाली में जिस सामग्री का सबसे पहले होना जरूरी है, वह है कुमकुम। इसका संबंध हिंदू धर्म से भी जुड़ा है। यह लंबी उम्र और विजय का प्रतीक माना जाता है। थाली की दूसरी सामग्री है अक्षत यानी चावल। हिंदू धर्म में हर शुभ कार्य में इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए भाई के माथे पर विजय का तिलक लगाना चाहिए। इसके बाद बारी आती है नारियल की। कुछ जगहों पर रक्षाबंधन के दिन पूजा की थाली में तिलक करने के बाद बहन अपने भाई को नारियल (श्रीफल) देती है। इसे देवी लक्ष्मी का फल भी कहा जाता है।

यह भाई की तरक्की के रास्ते खोलता है। माना जाता है कि रक्षासूत्र बांधने से शरीर संबंधी दोषों से छुटकारा मिलता है। हमारे शरीर में कोई भी बीमारी इन दोषों से ही संबंधित होती है। राखी बांधने के बाद पूजा की थाली में मिठाई भी खिलाने के लिए होनी चाहिए। मान्यता है कि इससे भाई-बहन के रिश्ते में हमेशा मिठास बनी रहती है। अन्य सामग्री है दीपक से आरती उतारना। ऐसा कहा जाता है कि राखी बांधने के बाद दीपक जलाकर भाई की आरती उतारने से भाई को बुरी नजर नहीं लगती।

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