रहस्यमयी पेड़ को काटने पर निकला सबसे जहरीला तरल धातु

दुनियाभर में कुदरत के ऐसे कई नमूने है जिसे देख अपनी आंखों पर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है। हम सभी ने किताबों या इंटरनेट में अजीबोगरीब पेड़ों के बारे में पढ़ा है जिसे काटने पर अजीब तरल पदार्थ निकलता है। हाल ही में ऐसा ही एक नया पेड़ वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बना हुआ है जिसे काटने पर विशेष तरह का तरल धातु निकला। दक्षिण प्रशांत में न्यू कैलेडोनिया के द्वीप पर उगने वाले वर्षावन पेड़ से कुछ ऐसा निकला जो अब रहस्य बना हुआ है।

पेड़ से निकलता है चमकदार नीले-हरे रंग का धातु

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक द्वीप पर मौजूद पेड़ को काटने पर उसमें से खून की तरह एक तरल बाहर निकलता है जो बेहद जहरीला है। Pycnandra acuminata नाम के इस पेड़ की छाल को काटने पर उसमें से चमकदार नीले-हरे रंग का तरल निकलता है। रिपोर्ट के मुताबिक इस विशेष तरल में 25 फीसदी धातु होता है जो इसे जहरीला बनाता है। पेड़ से निकलने वाले इस तरल की छोटी मात्रा भी दूसरे पेड़ों के लिए बेहद जहरीला साबित होता है।

क्या होता है हाइपरएक्यूमुलेटर?
एक अनुमान के अनुसार लगभग 700 पौधों की प्रजातियों में यह जहरीला तरल असामान्य रूप से पाया जाता है। इस तरल को हाइपरएक्यूमुलेटर्स (hyperaccumulators) कहा जाता है। हाइपर-एक्यूमुलेटर एक तरह का धातु होता है, इसी नाम से उन पौधों को भी जाना जाता है जिसमें से यह निकलता है। यह धातु ऐसे पेड़-पौधे मे पाया जाता है जो अपनी विशेष रचना के कारण धरती से अत्यधिक प्रदूषक अवशोषित करते है।

अपने आप में दुर्लभ है ये पेड़
इस तरह के पेड़ को सुखाकर ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जाए तो यह कम प्रदूषण पैदा करता है। इसके अलावा पारंपरिक खनन में आवश्यकता से कम ऊर्जा का उपयोग करता है। इससे अत्यधिक समृद्ध, उच्च श्रेणी के धातु अयस्क भी प्राप्त किए जा सकते हैं। क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता डॉ. एंटनी वैन डेर एनट के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि न्यू कैलेडोनिया में पाइकेनेंड्रा एक्यूमिनटा एक बड़ा (20 मीटर तक ऊंचा) दुर्लभ वर्षावन वृक्ष है, जो न्यू कैलेडोनिया में वर्षावन के शेष हिस्सों तक सीमित है।

दशकों बाद पेड़ पर लगते हैं फूल और फल
डॉ. एंटनी ने आगे कहा, ‘सामान्य पौधों की प्रजातियों की तुलना में हाइपरसैकुम्युलेटर्स 100-1000 गुना अधिक प्रदूषकों को अवशोषित कर सकते है। इसके अलावा इस तरह के पेड़ एक या एक से अधिक मृदा प्रदूषक को एक साथ भी अवशोषित कर सकते हैं। इनके बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी होती है इसलिए इनके टेस्ट और विषयों के बारे में शोध करना चुनौतीपूर्ण होता है। इस पेड़ को फूल और बीज पैदा करने में दशकों का समय लगता है।’

पेड़ के विकास में लाखों साल का लगा समय

डॉ. एंटनी ने आगे कहा कि खनन, जंगल की आग और पेड़ों की लगातार हो रही कटाई की वजह से इस तरह के दुर्लभ पेड़ों का अस्तित्व खतरे में है। हाइपरएक्यूमुलेटर्स पौधों का विकास कई अलग-अलग परिवारों के पेड़ों से हुआ है, इस प्रक्रिया में लाखों वर्षों का समय लगा है। ये पौधे प्राकृतिक रूप से धातु से समृद्ध मिट्टी में पाए जाते हैं। वैज्ञानिक अभी भी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ये पौधे इस तरह से क्यों विकसित हुए हैं। हो सकता है इन्होंने कीट के हमले से बचने के लिए या शायद फंगल संक्रमण से अपना बचाव करने के लिए यह तरीका अपनाया हो।

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