राजधानी में शौचमुक्त अभियान को झटका, 40 पंचायतों में कागज पर बने शौचालय, सभी प्रधानों को नोटिस

लखनऊ: राजधानी की 40 पंचायतों में शौचालय की हकीकत देखी गयी तो मामला खुलकर सामने आया। पता चला कि सचिव और प्रधानों ने मिलकर कागजों में शौचालय खड़े कर डाले। सत्यापन हुआ तो पता चला कि गांवों में शौचालयों का काम आधा-अधूरा पड़ा है। कहीं शौचालय की छत नहीं तो कहीं दरवाजा गायब। कहीं शौचालय में सीट नहीं लगी तो कहीं शौचालय बना लेकिर गड्ढा खुदा ही नहीं। सत्यापन में हुए इस खुलासे के बाद जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा इन 40 पंचायतों के प्रधानों को नोटिस और सचिवों को आरोप पत्र दिया गया है।

राजधानी को खुले में शौच मुक्त बनाने की मुहिम में एक बार (दो अक्टूबर) चूकने के बाद अबभी कई प्रधान व सचिव हीलाहवाली कर रहे हैं। अधिकारियों द्वारा सत्यापन के बाद 40 ग्राम पंचायतों में तय सामने आए उससे तो प्रशासन भी सकते में आ गया। इन पंचातयों में लक्ष्य के अनुरूप शौचालय तो बने नहीं, लेकिन भारत सरकार की वेबसाइट पर सभी शौचालयों को बना दिया दिया गया।

जो शौचालय बने है उनमें 60 से 80 प्रतिशत तक शौचालय प्रयोग में नहीं हैं। यही नहीं कहीं शौचालयों में दरवाजा गायब तो कहीं छत। जबकि इन सभी पंचायतों में पैसा पूरा भेजा जा चुका है। इस तरह की लापरवाही को देखकर जिलाधिकारी और सीडीओ बहुत नाराज हुए। प्रशासन ने प्रधानों को कारण बताओ नोटिस भेजी।

वहीं बृजेश वर्मा, जेएन शर्मा, आलोक चौधरी, संजीव पाल, विनोद कुमार अवस्थी, भूपेंद्र सिंह सहित 40 ग्राम पंचायत सचिवों को आरोप पत्र जारी किया गया है। अधिकारियों की माने तो अगर इन पंचायतों में सभी शौचालय सही नहीं हुए तो प्रधानों को 95 जी यानी बर्खास्तगी और सचिवों को निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा। सीडीओ मनीष बंसल ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत थोड़ी सी चूक भी बर्दाश्त नहीं होगी। तीन दिनों में माकूल जवाब न मिला तो प्रधान और सचिवों को कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा।

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