राजनीति का नया बवाल, हिन्दू महासभा ने मुग़लकालीन स्मारकों को बताया मंदिर

सबकी राजनीति अलग अलग है लेकिन कई राजनीति आगे जाकर एक ही हो जाती है। भारत में कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हे जातीय और धार्मिक राजनीति करने में खूब मजा आता है। जब समाज के दो वर्ग आपस में लड़ते भिड़ते हैं तब इनकी राजनीति सफल होती है। एक तरफ देश कई समस्यायों से जूझ रहा है तो दूसरी तरफ देश में धार्मिक उन्माद खड़ा करने की कोशिश जारी है। ऐसी ही कोशिश अभी हिन्दू महासभा अलीगढ की तरफ से की गई है।

असल में हिंदू महासभा अलीगढ़ ने हिंदू नव वर्ष पर अपना एक विवादित कैलेंडर जारी किया है। इस कैलेंडर में ताज महल सहित 7 मस्जिदों और मुगलकाल के स्मारकों को मंदिर बताया गया है। इतना ही नहीं इस कैलेंडर में मुस्लिमों के सबसे बड़े तीर्थ स्थल मक्का को मक्केश्वर महादेव का मंदिर बताया है. साथ ही इस फोटो में ये भी लिखा हुआ है कि यहां कभी भगवान शिव का मंदिर हुआ करता था, इसलिए शिवलिंग आज भी खंडित अवस्था में मौजूद है।

मक्का के अलावा अयोध्या में मौजूद विध्वंस बाबरी मस्जिद को राम जन्मभूमि दिखाया गया है। इसी के साथ ही इसमें ये भी लिखा है कि यहां मिले राम मंदिर के अवशेष इस बात का ठोस प्रमाण है कि यहां कभी भव्य मंदिर हुआ करता था। इसके अलावा हिंदू महासभा के इस कैलेंडर में कुतुब मीनार को विष्णु स्तंभ बताया गया है। इस बारे में हिंदू महासभा की राष्ट्रीय सचिव पूजा सकुन पाण्येय ने कहा कि देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए ही इस कैलेंडर को जारी किया गया है। इस कैलेंडर में ताजमहल को तेजो महालय शिव मंदिर, काशी की ज्ञानव्यापी मस्जिद को विश्वनाथ मंदिर और मध्य प्रदेश के कमल मौला मस्जिद को भोजशाला बताया गया है।

इस बारे में पूजा ने कहा कि विदेशी आक्रमणकारियों ने देश में बने हुए हिंदू स्मारकों को लूटा था और उन्हें मस्जिद बना दिया। लेकिन अब समय आ गया है कि अब इन सभी धार्मिक स्थलों को हिंदुओं को वापस कर देने चाहिए। बता दें कि देश पहले से कई धार्मिक मसलों को लेकर चिंतित है। अयोध्या विवाद का मसला आज भी अदालत में है जहां लगातार इस पर सुनवाई चल रही है। जानकार मान रहे हैं कि हिन्दू महासभा का यह खेल आगामी चुनाव को लेकर किया गया खेल है ताकि जनता को धरम के आधार पर बांटकर राजनीतिक लाभ लिया जा सके।

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