राजनीति का बदलापुर

सियासत के खेल में किसी को नहीं पता कि कब कौन ताकतवर होगा और कब कौन कमजोर। भारतीय राजनीति में कई ऐसे उदाहरण हैं, जब दिग्गज सियासतदानों को सत्ता जाने के बाद ऐसा खराब समय भी देखना पड़ा जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। आज के समय में यह बात एकदम सही बैठती है केंद्र में वित्त और गृह जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुके कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम पर। चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया मामले में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिए जाने के बाद करीब 24 घंटे तक गायब रहे। सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियां उनके घर पर दबिश देती रहीं, लेकिन वह नहीं मिले। आखिरकार 21 अगस्त की शाम चिदंबरम कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय में मीडिया के सामने आए और फिर दिल्ली के जोरबाग स्थित अपने घर गए। लेकिन इस दौरान सीबीआई और विजिलेंस की टीमों को उनकी भनक नहीं मिल पाई। रात करीब 8 बजे सीबीआई टीम चिदंबरम के घर पहुंच गई और दीवार फांदकर पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री को गिरफ्तार करने का ‘करिश्मा’ कर दिखाया। इसके बाद 22 अगस्त को चिदंबरम को सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 26 अगस्त तक सीबीआई की कस्टडी में दे दिया गया।

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कई दिनों से तेजी से चल रहे इस ड्रामे की अगर तह में जाया जाए, तो कुछ अलग ही हकीकत बयां होती है। इसकी पटकथा लिखी गई थी 5 दिसम्बर, 2018 को राजस्थान के सुमेरपुर की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के साथ। उस रैली में पीएम मोदी ने चिदंबरम का नाम लिए बगैर जमकर निशाना साधा था। मोदी ने कहा था, ‘नामदार की बड़ी सेवा करने वाले, वे मानते हैं कि बुद्धि भगवान ने सिर्फ उन्हें ही दी है। वह गृह मंत्री रहे, वित्त मंत्री रहे। हुआ क्या, भाइयों और बहनों….यह चायवाले की ताकत देखिए…जो सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते थे। डंका बजता था, बड़े से बड़े लोगों का काम खुद करते थे…मोदी ने ऐसा खेल खेला, मोदी ने ऐसी चाल चली…पन्ने-पन्ने खोजकर निकाले, उनका खुद का बेटा जेल चला गया। जमानत पर निकला है अभी…। …यह महाशय भी अपने सुप्रीम कोर्ट के वकील के नाते, ….जो भी दुनिया रही होगी, उसका फायदा उठाकर कोर्ट में गिड़गिड़ाते हैं। अगली डेट दे दो, अगली डेट दे दो। कोर्ट कहती है कि फलानी तारीख तक अरेस्ट नहीं कर सकते हो। अरे कितने दिन तक मदद लेते रहोगे। एक दिन न्याय निकलने वाला है। तुम भी जेल की सलाखों में होंगे।’

पीएम मोदी के बयान के अलावा भी चिदंबरम के मन में एक और डर था। वह डर था केंद्रीय गृह मंत्री और वर्तमान राजनीति के ताकतवर शख्स अमित शाह का। दरअसल, शाह और चिदंबरम की यह कहानी बेहद दिलचस्प है। जो आज चिदंबरम के साथ हो रहा है, कुछ वैसा ही 9 साल पहले अमित शाह के साथ हुआ था। उस समय सीबीआई शाह के पीछे पड़ी थी। हुआ यूं था कि यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान जब चिदंबरम देश के गृह मंत्री थे, उस वक्त गुजरात में सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर का मामला बेहद जोर-शोर से गूंजा था। साल 2005 में अमित शाह गुजरात के गृह मंत्री थे और शेख को एक कथित एनकाउंटर में पुलिस ने मार गिराया था। लेकिन 2014 में मोदी सरकार आते ही हालात बदल गए और सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने शाह को आरोपों से मुक्त कर दिया। केस में गवाह मुकरते गए थे। इसे लेकर देश भर में लोगों को खासी हैरानी हुई थी।

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इस मामले में 25 जुलाई, 2010 को सीबीआई ने अमित शाह को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। शाह को तीन महीने तक जेल में रहना पड़ा था। अमित शाह को कोर्ट के आदेश पर गुजरात से भी बाहर रहना पड़ा था। लेकिन अब करीब 9 साल बाद अमित शाह देश के गृह मंत्री हैं और सीबीआई-ईडी चिदंबरम को जेल में डालने के लिए तैयार हैं। तब अमित शाह खुद को निर्दोष बताते थे और आज चिदंबरम खुद को निर्दोष बता रहे हैं। इसके अलावा जिस तरह कांग्रेस आज चिदंबरम पर कार्रवाई को लेकर भाजपा पर निशाना साध रही है, ठीक उसी तरह उस समय भाजपा ने अमित शाह पर कार्रवाई को लेकर कांग्रेस पर बदले और राजनीतिक पूर्वाग्रह की भावना से काम करने का आरोप लगाया था।

ट्रिब्यून डेस्क

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