राजनीति की काल कोठरी के झांसेबाजों से आहत होता बिहार

अखिलेश अखिल


बिहार केवल राजनीति का ही प्रयोगशाला नहीं है। यह दगाबाज राजनीति का भी अड्डा है। एक गीत है – ‘किसने दिया ,किसने लिया ,किसने कहाँ माल छुपा रखा है ,बिहार की जनता ने अपने दिल में सबका हाल छुपा रखा है। ‘ ज्यादा पीछे मत जाइये। पिछले तीन सालों की बीती राजनीति पर ही गौर करिये तो तमाम राजनीतिबाजों के चेहरे कालिख पुते नजर आएंगे। किसने कब किसको सटाया और कब किसको हटाया ,किसने किये झूठे खेल ,किसने किया विरोधी से मेल। पार्टी के भक्ति और गोदी मीडिया की शक्ति अपनी जगह है लेकिन पीछे में असलियत से कौन परिचित नहीं।

बिहार के ठग और गिरहकट के रूप में नामधारी नेताओं की चर्चा और उनकी सोच को लेकर देश के अन्य इलाकों में जब चर्चा होती है तो चुप रह जाने के सिवा कुछ बचता ही नहीं। अब बिहार में एक नई राजनीति चल रही है। पार्टी तोड़ने और जोड़ने की राजनीती। पार्टी टूटे या जुटे इससे जनता को क्या मतलब ? कौन सी सरकार जनता के लिए कल्याणकारी काम कर रही है असली मुद्दा तो यही है। चुनावी राजनीती में हार जीत एक अलग बहस है लेकिन कोई कमजोर सरकार भी जनता की उम्मीदों पर खड़ी उतरकर चली जाती है तो वह ऐतिहासिक हो जाता है। लेकिन ऐसी सरकार अभी देश में नहीं है। कहीं नहीं।

अब बिहार की राजनीति को देखिये। बीजेपी के एक नेता हैं मंगल पांडेय। सरकार उनकी ही चल रही है लेकिन उनके पेट का पानी नहीं पच रहा है। रोज कांग्रेस और राजद के टूटने ऐलान कर रहे हैं। पता नहीं चलता कि इस टूट से उन्हें क्या हासिल होगा। यही ना कि उनकी पार्टी और बलवान होगी और दूसरी पार्टी जमींदोज होगी। फिर क्या होगा ? क्या बिहार की जनता की तस्वीर बदल जायेगी ? बिहार में बहुत सी पार्टियां आयी और गयी। बहुत से नेता आये और गए। समय के साथ सब काल के गाल में समाते रहे हैं। हम सब का हाल वही होना है। लेकिन देखिये राजनीती ने व्यक्तिगत सम्बन्धो को भी तार तार किया है। मंगल पांडेय का ऐलान सुनिए – ”कांग्रेस बहुत जल्द टूटकर बिखर जायेगी। यह लोग भले आज राहुल गांधी और महात्मा गांधी का सपना पूरा करने के लिए निकले हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि खुद ही कांग्रेस को समाप्त करने में जुटे हैं। इनके कई नेता दूसरे दलों के संपर्क में बने हुए हैं। तेजस्वी यादव को कोई भी राजद का नेता नहीं स्वीकार करना चाहता।

गुजरात व हिमाचल में भाजपा की जीत के बाद सबकी नजर एनडीए पर बनी हुई है। लालू यादव के एक और दामाद को नोटिस थमा दी है, उससे साफ हो गया है कि अवैध तरीके से संपत्ति बनाने के काम में लालू ने अपने परिवार को भी नहीं छोड़ा।” आपको बता दें कि मंगल पांडये का यह बयान इन दिनों रोज ही आता है। इधर कांग्रेस वाले 18 जनवरी से राज्य में आमंत्रण यात्रा पर निकलने वाले थे ताकि पार्टी को मजबूत किया जा सके। किसी कारण से यह यात्रा रुक सी गई है। माना जा रहा है कि कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी कांग्रेस से नाराज है और अपने साथ कुछ साथियों को लेकर दूसरी जगह तलाश कर रहे हैं। इसमें क्या सच्चाई है यह तो अशोक चौधरी ही जाने लेकिन अशोक आजकल कांग्रेस के लिए विलेन बने हुए हैं।

बताया जा रहा है कि बिहार में राज्यसभा और विधान परिषद का चुनाव होने वाला है। जानकार मान रहे हैं कि कांग्रेस और राजद के सभी विधायक और विधान पार्षद एकजुट रहते हैं, तो राजद-कांग्रेस गठबंधन को फायदा होना तय है। जबकि,एनडीए और जदयू की कोशिश होगी कि कांग्रेस के असंतुष्ट गुट को अपनी ओर लाया जाये और ज्यादा सीटों पर एनडीए का कब्जा हो। असली खेल यही है। इसी खेल को देखते हुए राजनितिक गोटियां बिछाई जा रही है।

उधर बीजेपी वाले मंगल पांडेय के आरोप के जवाब में प्रभारी अध्यक्ष कौकब कादरी भी खूब बोल रहे हैं। कादरी कहते हैं कि ”वास्तव में भाजपा के बड़े नेता पार्टी के अंदर घुटन महसूस कर रहे हैं। महाराष्ट्र के लोकसभा सदस्य पटोले ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है। गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल अपने 17 विधायकों के साथ भाजपा छोड़ने वाले थे। पंजाब एवं कर्नाटक में भाजपा में भगदड़ मची है। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी, भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद लगातार भाजपा के खिलाफ बयान दे रहे हैं।” इन बयानों से आखिर क्या मिल रहा है ? लेकिन कोई काम नहीं है तो कुछ बोलना पडेगा ही।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper