राजनीति में उतरने से पहले अपनी लोकप्रियता जांचेंगे कमल हासन

लखनऊ: तमिल फिल्मों के सुपर स्टार कमल हासन भी तमिलनाडु के अगले विधानसभा चुनाव में उतरेंगे। वह अगले महीने फरवरी में अपनी पार्टी के नाम और उसके सिद्धांत सार्वजनिक करेंगे। इससे पहले वह पूरे प्रदेश का भ्रमण करेंगे। भ्रमण की शुरुआत 21 फरवरी से होगी। इस दौरान वह जनता के बीच अपनी लोकप्रियता परखना चाहेंगें। उनसे पहले उनके परदे के साथी सुपर स्टार रजनीकांत राजनीतिक जीवन में पदार्पण करने की घोषणा कर चुके हैं।

कमल हासन के भ्रमण की शुरुआत उनके गृह शहर रामनाथपुरम से होगी। प्रथम चरण के भ्रमण कार्यक्रम में रामनाथपुरम के बाद वह मदुराई, डिंडीगुल और सिवगंगई जाएंगे। अपने भ्रमण के दौरान हसन यह जानना चाहेंगे कि वास्तव में लोगों की क्या जरूरते हैं। लोग किन चीजों से प्रभावित हो रहे हैं। लोगों की अपेक्षाएं क्या हैं। यह जानने के लिए वह जगह-जगह मीटिंग करेंगे। हालांकि वह इस बाबत कहते हैं कि उनका यह कदम न तो सरकार के विरोध स्वरूप होगा और न ही ग्लैमर के जरिए लोगों की भीड़ जुटाना। वह राज्य में महज राजनीतिक शक्ति को स्थापित करना चाहेंगे।

दोनों अभिनेताओं के कैम्प से मिले संकेत के मुताबिक कमल हासन के लिए रजनीकांत के मुकाबले पार्टी के लांच और राज्यव्यापी टूर के लिए लोगों के बीच जाना कठिन कार्य होगा। वजह यह कि रजनीकांत के मुकाबले कमल हासन के पास संसाधन और धन की व्यवस्था बेहतर नहीं है। रजनीकांत के पास संसाधन और फंड्स के लिए कारपोरेट घराने हैं और राजनीतिक दोस्त भी हैं।

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कमल हासन कैम्प से जुड़े एक शख्स के मुताबिक हासन राज्यव्यापी भ्रमण के दौरान परखना चाहेंगे कि उनके लोगों के बीच पॉपुलिरटी कितनी है। पॉपुलिरटी को मापने के बाद ही वह फाइनली राजनीति की तरफ कदम उठाएंगे। प्रथम चरण में लिये गये चार जिलों के मुख्यालयों पर होने वाली मीटिंग से यह अंदाजा हो जाएगा कि राज्य के अन्य भागों में हासन की जनता के बीच क्या स्थिति होगी।

हाल में एक फिल्म के इवेंट अवसर पर दोनों अभिनेताओं की एक साथ मौजूदगी के मद्देनजर चर्चा है कि रजनीकांत और कमल हासन राजनीतिक गठबंधन कर सकते हैं। बहरहाल इस सिलसिले में रजनीकांत से जब सवाल किया गया था, तो उन्होंने प्रत्यक्ष जवाब न देकर कहा था, यह तो समय ही बताएगा। बहरहाल जब ३१ दिसम्बर को रजनीकांत ने राजनीति में पदार्पण का ऐलान किया था, तभी से यह भी कयास लगाया जा रहा है कि वह गठबंधन करना चाहेगा, तो भारतीय जनता पार्टी के साथ, क्योंकि उनकी प्रस्तावित पार्टी का स्वरूप भाजपा से मिलता जुलता होने की संभावना है।

दक्षिणी राज्यों को करना चाहते हैं एकजुट

आगे जो भी हो, पर हासन द्गविड़यन झंडे के तहत दक्षिणी राज्यों तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल को एकजुट करने की ख्वाहिश रखते हैं। इस एकजुटता के पीछे उनकी मंशा है कि दक्षिणी राज्य एकजुट हो जाएंगे, तो वे केन्द्ग पर राजनीतिक और आर्थिक परिप्रेक्ष्य में सौदेबाजी की सूरत में होंगे। उनका कहना था कि कुछ लोग कहते हैं कि केन्द्ग टैक्स यहां (तमिलनाडु) से जुटाता है और उसे उत्तरी राज्यों के विकास पर खर्च करता है। हासन ने एक तमिल मैगजीन में अपने साप्ताहिक कॉलम में यह सवाल उठाते हैं कि भला संयुक्त परिवार में यह कैसे हो सकता है?..बड़ा भाई, बेशक रोटी जुटाता है, लेकिन यह भी तो नहीं हो सकता है कि उसका छोटा भाई भूखा रहे?

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तब हमारी आवाज सुनने को बाध्य होगा केन्द्ग

आगे लिखा है चंद्गबाबू नायडू (सीएम आंध्र प्रदेश), चंद्गशेखर राव (सीएम तेलंगाना), सिद्धारमैया (कर्नाटक) और पिनराई विजयन (सीएम केरल) सभी द्गविड़यन हैं। यदि पूरे दक्षिण भारत में द्गविड़यन की पहचान आत्मसात कर ली जाए, तो पक्षपात (केन्द्ग द्वारा) जिसकी हम शिकायत करते हैं, समाप्त हो जाएगी। साथ खड़े होइए, हमारी आवाज जब एक होकर गूंजेगी, तो दिल्ली बात करने के लिए बाध्य हो जाएगा। द्गविड़यन पहचान के लिए यह जरूरी नहीं कि भाषा तमिल ही हो, अन्य भाषाई लोगों के साथ खड़े होने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उनके इस नजरिये से प्रतीत होता है कि यदि द्गविड़यन एकता बन गई, तो हासन वर्ष २‚१९ के लोकसभा चुनाव में भी उतर सकते हैं।

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