राजस्थान में बीजेपी को बड़ा झटका ,दौसा के सांसद हरीश मीणा कांग्रेस में शामिल

दिल्ली ब्यूरो: राजस्‍थान में आया राम गया राम का खेल चरम पर है। कोई पार्टी से नाराज होकर अलग हो रहे हैं तो कुछ बागी बने पार्टी को चुनौती दे रहे हैं। किसी को अब कांग्रेस से चीढ़ होने लगी है तो कोई बीजेपी के चाल ढाल से आजिज आकर पाला बदल रहा है। 7 दिसंबर को राज्य में चुनाव है। पिछले दिनों बीजेपी ने कांग्रेस के कई नेताओं को अपने पाले में किया था और आज कांग्रेस ने बीजेपी सांसद हरीश मीणा को ही अपने पाले में कर लिया। बीजेपी के लिए यह बड़ा झटका हो सकता है। हरीश मीणा अब कांग्रेस ज्वाइन कर चुके हैं और ऐलान किया है कि बीजेपी को धूल छटा देंगे। माना जा रहा है कि राजस्‍थान के पूर्व डीजपी रह चुके हरीश मीणा का इस्‍तेमाल कांग्रेस किरोड़ीलाल मीणा की काट के तौर पर करेगी। बता दें कि दौसा की राजनीति करने वाले हरीश मीणा पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता नमोनारायण मीणा के भाई है और 2014 के चुनाव में हरीश ने अपने भाई को ही हराया था।

हरीश मीणा की जीत के साथ दौसा में भाजपा को 25 साल बाद विजय नसीब हुई थी। 1989 में नाथू सिंह गुर्जर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। दौसा लोकसभा सीट पर अधिकतर कांग्रेस ही दबदबा रहा है। पूर्वी राजस्‍थान में कांग्रेस को मिल गई दोधारी तलवार पूर्वी राजस्थान की राजनीति में मीणा और गुर्जर वोट बेहद प्रभावी है। पूर्वी राजस्थान के भरतपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, अलवर, करौली और धौलपुर जिलों में मीणा और गुर्जर वोटों का खासा असर है।अब तक हुए चुनावों का इतिहास देखने से पता चलता है कि मीणा और गुर्जर वोट एक पार्टी को नहीं पड़ता है। दोनों परस्‍पर विरोधी माने जाते हैं।

पूर्वी राजस्‍थान की बात करें तो इस बार यहां गुर्जर वोट कांग्रेस के पक्ष में जा सकता है, कारण- सचिन पायलट हैं। वह कांग्रेस के पार्टी अध्‍यक्ष हैं और गुर्जुर समुदाय से आते हैं। अब बचा मीणा वोट बैंक जिसे साधने के लिए कांग्रेस हरीश मीणा को पार्टी में लाई है। मतलब कांग्रेस के पास अब दोनोां वोट बैंक साधने के लिए बड़े नेता हैं। सचिन पायलट गुर्जर तो हरीश मीणा, जो कि मीणा वोटरों पर असर डालेंगे। 50 सीटों पर असर डालते हैं मीणा वोटर राजस्‍थान में गुर्जर समुदाय बीजेपी के पक्ष में वोट करता है और मीणा समुदाय कांग्रेस के पक्ष में। इस बार गणित बदलता दिख रहा है। कांग्रेस के पास पार्टी अध्‍यक्ष के तौर पर सचिन पायलट हैं, जो गुर्जर समुदाय से आते हैं और अब हरीश मीणा भी कांग्रेस में आ गए हैं। मतलब कांग्रेस का मीणा वोट बैंक और मजबूत होने की संभावना है और बीजेपी के गुर्जर वोट बैंक में कांग्रेस सेंध लगा सकती है, पायलट के सहारे।

राजस्‍थान की मौजूदा विधानसभा में 13 गुर्जर विधायक हैं और 30 से 40 सीटों पर इनका असर है। वहीं, कम से कम 50 सीटों पर मीणा वोटरों का प्रभाव है। सबसे बडे मीणा नेता माने जाने वाले किरोड़ी लाल मीणा इस बार बीजेपी में हैं। हरीश मीणा के लोकसभा क्षेत्र में आती हैं पांच विधानसभा सीटें हरीश मीणा के लोकसभा क्षेत्र दौसा में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं। 2013 में दौसा जिले की 3 सीटें बीजेपी ने जीतीं, जबकि 2 सीटें नेशनल पीपुल्‍स पार्टी ने जीतीं। दौसा लोकसभा क्षेत्र के बारे में एक और अहम बात यह है कि यहां पर 3 विधानसभा सीटें सामान्‍य हैं, जबकि 1 अनुसूचित जाति और 1 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। राजस्‍थान की कुल 200 विधानसभा सीटों में से 142 सीट सामान्य हैं, जबकि 33 सीटें अनुसूचित जाति और 25 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। देखना होगा कि हरीश मीणा के कांग्रेस में जाने से उसे कितनी सीटों पर फायदा होता है। हालांकि, इतना तो तय है कि कम से कम उनके लोकसभा क्षेत्र की 5 विधानसभा सीटों पर तो बीजेपी का वोट प्रभावित होगा ही, लेकिन किस हद तक प्रभावित होता है, यह चुनाव नतीजे आने के बााद ही पता चलेगा।

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