राज्यसभा चुनाव: क्या बुआ-भतीजे के रिश्ते कायम रह पाएंगे ?

दिल्ली ब्यूरो: उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर सीट पर हुए उपचुनाव में सपा के दोनों प्रत्याशियों ने बसपा के सहयोग से जीत दर्ज की। बदले में अखिलेश यादव ने मायावती के उमीदवार को राज्य सभा में भेजने की बात कही थी। माना जा रहा था कि बुआ-भतीजे के इस मिलन से देश की आगामी राजनीति भी प्रभावित होगी लेकिन राज्यसभा चुनाव के दौरान जिस तरह खेल होते दिखे है, उसने राजनीतिक विशेषज्ञों के माथे पर बल ला दिया है कि क्या बुआ-भतीजा एक साथ आयेंगे? आखिर क्या होगा इनके नए रिश्ते का? क्या यह रिश्ता अच्छे से जमने के पहले ही मृतप्राय हो जायेगा? इसके साथ ही कई और सवाल खड़े होने लगे हैं।

पहले घटना पर गौर कीजिये। शुक्रवार दोपहर अखिलेश यादव ने ट्‌वीट किया और बाहुबली विधायक राजा भैया को अपने समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। लेकिन राजा भैया ने जो ट्‌वीट किया, वह सपा और बसपा के रिश्ते के लिए सही नहीं है। राजा भैया ने अखिलेश यादव को तो अपने समर्थन की बात कही है, लेकिन बसपा को समर्थन देने से इनकार कर दिया है। राजा भैया और मायावती के संबंध कैसे रहे हैं, यह जगजाहिर हैं। मायावती ने राजा भैया के किले को ध्वस्त किया था, जिसकी नाराजगी उनके आज के बयान में भी दिखती है।

बता दें कि समाजवादी पार्टी के नितिन अग्रवाल पहले ही भाजपा के साथ जा चुके हैं। वहीं बसपा के अनिल सिंह ने अपना वोट भाजपा को दिया है। राजा भैया के प्रभाव में कुछ और निर्दलीय विधायक भी हैं, जिनसे बसपा को भी उम्मीद है, ऐसे में इन विधायकों का वोट किसे मिलेगा इसपर संशय है। अगर बसपा के उम्मीदवार को चुनाव में हार नसीब होती है, तो कहना ना होगा कि यह सपा-बसपा गठबंधन के लिए सही नहीं होगा। बसपा ने अपना समर्थन देकर योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में भाजपा को शिकस्त दिलायी, लेकिन अगर उसे रिटर्न नहीं मिला, तो यह बनते रिश्ते में बिगाड़ लाने वाली बात हो जायेगी।

उधर बीजेपी अब किसी भी सूरत में हार मानने को तैयार नहीं है। उसने इस चुनाव को प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। सूबे के मुख्यमंत्री भी चाहते हैं कि चाहे जैसे भी हो बीजेपी का उम्मीदवार जीत हासिल करे। ऐसी हालत में सपा -बसपा की दोस्ती पर बादल मडराते दिख रहे हैं।

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