राज्यसभा चुनाव: UP में BJP ने इन 2 नेताओं को दे ही दिया ‘मीठा फल’

लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उत्तर प्रदेश (UP) से राज्यसभा चुनाव के लिए 6 उम्मीवारों की घोषणा की है। फिलहाल, दो और नामों को लेकर अटकलों का दौर जारी है। लेकिन इस सूची में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी और गोरखपुर से पूर्व विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल के नाम ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं बढ़ा दी हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा ने इस उम्मीदवारी के जरिए अपने इन दो दिग्गजों को पार्टी के प्रति मेहनत का इनाम दिया है।

गोरखपुर सदर से चार बार के विधायक अग्रवाल ने साल 2002 से क्षेत्र के प्रतिनिधि थे। लेकिन हाल ही के चुनावों में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए यह सीट छोड़ दी थी। पहली बार उन्होंने हिंदू महासभा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। बाद में वह भाजपा में शामिल हुए और चुनावी मैदानों में बड़ी भूमिका निभाई। वहीं, यूपी की राजनीति का लोकप्रिय चेहरा होने के बावजूद लंबे समय से वाजपेयी के सियासी तारे गर्दिश में थे। उन्होंने 2014 में भाजपा की कमान ऐसे समय पर संभाली थी, जब पार्टी जमीन मजबूत करने की जद्दोजहद कर रही थी।

लगातार हो रही थी तारीफें
पेशे से बाल रोग विशेषज्ञ अग्रवाल का सियासी कद योगी के समर्थन से लगातार बढ़ता रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और प्रदेश चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने सार्वजनिक तौर पर अग्रवाल की तारीफ की थी। पार्टी के बड़े नेताओं की तरफ से डॉक्टर अग्रवाल को लेकर मिल रही इस प्रतिक्रियाओं को भी बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा था। सीएम योगी के तस्वीर में आने के बाद चुनावी मैदान से पीछे हटे डॉक्टर अग्रवाल के सियासी भविष्य को लेकर उस दौरान चर्चाएं तेज हो गई थीं। इतना ही नहीं समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव भी उन्हें टिकट देने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उनका भाजपा के साथ जुड़ाव बरकरार रहा। साल 2002 में आदित्यनाथ ने भाजपा उम्मीदवार शिव प्रताप शुक्ला के खिलाफ अग्रवाल का समर्थन किया था। इसके बाद उन्होंने भाजपा उम्मीदवार के तौर पर 2007, 2012 और 2017 चुनाव जीते।

लक्ष्मीकांत वाजपेयी: जिनके नेतृत्व में मजबूत हुए भाजपा के सियासी तारे
यूपी और खासतौर से पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति का मजबूत ब्राह्मण चेहरा वाजपेयी की भी राज्यसभा चुनाव में एंट्री हो गई है। लंबे समय से सियासी तौर पर संघर्ष कर रहे वायपेयी को टिकट मिलने को पार्टी के बड़े फैसले के तौर पर देखा जा रहा है। यूपी के मौजूदा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने साल 2016 में भाजपा के प्रदेश प्रमुख का जिम्मा संभाला था। इसके बाद से ही उनकी राजनीति गुमनामी में चली गई थी।

इसके अलावा साल 2017 के विधानसभा चुनाव में मेरठ से मिली हार ने भी उन पर काफी असर डाला। एक ओर जब पार्टी अपने वफादारों को विधान परिषद या राज्यसभा भेज रही थी, तब वाजपेयी को कई मौकों पर नजरअंदाज किया गया। लेकिन विधानसभा चुनाव 2022 से कुछ समय पहले ही उन्हें एक समिति का प्रमुख बनाया गया, जो विपक्षी दलों से भाजपा में जुड़ने वाले नेताओं की प्रक्रिया देख रही थी। वहीं, उम्मीदवार के तौर पर उनके चुनाव के कई कारण हो सकते हैं। पहला, वाजपेयी के जरिए भाजपा पश्चिम यूपी को भी बड़ा नेतृत्व देने की तैयारी कर रही है। दूसरा, भाजपा इनके जरिए पार्टी के ब्राह्मण नेताओं को एकजुट करने की भी कोशिश कर रही है। इन दोनों वरिष्ठ नेताओं के अलावा पार्टी ने सुरेंद्र सिंह नागर, बाबूराम निषाद, दर्शना सिंह और संगीता यादव को उम्मीदवार बनाया है। 10 जून को होने वाले चुनाव के लिए भाजपा ने रविवार को 8 राज्यों के लिए 16 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है।

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