रामगढ़झील झील के 500 मीटर दायरे में मकान बनाने को मिल सकती है मंजूरी

गोरखपुर: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा रामगढ़झील के 500 मीटर दायरे में मानचित्र स्वीकृत करने पर लगी रोक अब हट सकती है। वन विभाग द्वारा घोषित वेटलैंड क्षेत्र में ही प्रतिबंध रहेगा। बुधवार को जीडीए बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव रखा जाएगा जहां मंजूरी मिलने की भी पूरी उम्मीद है।

एनजीटी की तरफ से गठित हाई पावर कमेटी ने रामगढ़झील के 500 मीटर दायरे को वेटलैंड बताते हुए इस क्षेत्र में नए निर्माण नहीं कराने और पुराने सभी निर्माण ध्वस्त करने की संस्तुति की थी। इसके बाद जीडीए ने करीब डेढ़ साल से इस दायरे में नए मानचित्र स्वीकृत करने पर रोक लगा दी थी। झील के ज्यादातर क्षेत्रों में सिर्फ 50 मीटर के दायरे की ही जमीन को वेट लैंड घोषित किया गया है। इस मामले में 12 जनवरी 2021 को एनजीटी में हुई सुनवाई में भी जीडीए को इस मामले में राहत मिल गई है। अब प्राधिकरण बोर्ड में यह प्रस्ताव रखेगा कि वेट लैंड का क्षेत्र छोड़कर 500 मीटर के दायरे में अब मानचित्र स्वीकृत किया जाए।

सिटी डेवलपमेंट प्लान और मानबेला किसानों पर भी होगी चर्चा
गोरखपुर। सुनियोजित विकास का प्लान तैयार कर जिस तरह से अयोध्या नगरी के कायाकल्प की तैयारी है ठीक उसी तरह गोरक्षनगरी को भी और विकसित कर चमकाने की योजना बनने जा रही है। मेट्रो सिटी की तरह यहां सभी जरूरी सुविधाएं और संसाधन विकसित किए जाएंगे। इसके लिए सिटी डेवलपमेंट प्लान तैयार किया जाएगा। इसे तैयार करने की जिम्मेदारी कंसलटेंसी फर्म को दी जाएगी।

झील के 500 मीटर दायरे में निर्माण, मानबेला किसान, सिटी डेवलपमेंट प्लान समेत कुछ महत्वपूर्ण एजेंडों को लेकर 10 मार्च को जीडीए बोर्ड की बैठक आयोजित है। नागरिकों को राहत देने वाले निर्णय होने की संभावना है।
राम सिंह गौतम, सचिव, जीडीए

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