रामायण-महाभारत की चकाचौंध में कहीं पीछे छूट गए दूरदर्शन के ये शानदार सीरियल्स

एक समय ऐसा था जब दूरदर्शन पर एक से बढ़ कर एक सीरियल्स की लाइन लगा करती थी. लोग इन सीरियल्स का आनंद भी लेते थे और इनकी तारीफ करते बिना नहीं थकते थे. ये सीरियल्स आपका एंटरटेनमेंट तो करते ही थे साथ ही इनसे आपको कई सारी सीख और समझ भी मिलती थी. आज जहां लॉकडाउन में महाभारत और रामायण जैसे सीरियल्स दिखाए जा रहे हैं, हम आपके सामने कुछ ऐसे सीरियल्स की लिस्ट लेकर आए हैं जो कि ना सिर्फ आपको एंटरटेन करेंगे बल्कि ज्ञान और समझ के साथ-साथ जीवन के कई दृष्टिकोण खोलेंगे.

मालगुडी डेज- ये टीवी सीरियल साल 1986 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ था. आर के नारायण की नॉवल पर बेस्ड इस सीरियल के 54 एपिसोड्स थे. इसका निर्देशन शंकर नाग और कविता लंकेश ने किया था. मालगुडी डेज में साउथ के एक छोटे से गांव से जुड़ी हुई कुछ ऐसी दास्तानें बताई गई थीं जो हमारे आस-पास घटित हो रही होती हैं.

वागले की दुनिया- ये टीवी सीरियल साल 1988 में टेलीकास्ट किया गया था. इसका निर्देशन महान फिल्म निर्देशक कुंदन शाह ने किया था. अंजान श्रीवास्तव ने सीरियल में लीड रोल प्ले किया था और अपनी शानदार एक्टिंग से सभी को प्रभावित भी किया था. इस सीरियल के 2 सीजन आए थे. बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान भी इसके एक एपिसोड का हिस्सा बने थे. सीरियल में दिखाया गया था कि कैसे घर की छोटी-छोटी समस्याएं हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में एक बड़ी चिंता का सबब बन जाती हैं. मगर अपने सूझ-बूझ का परिचय देकर इंसान इससे पार पा सकता है.

किरदार- महान गीतकार गुलजार द्वारा इस सीरियल का निर्देशन साल 1993 में किया गया था. सीरियल की शुरुआत में ही जब जगजीत सिंह की आवाज में इसका टाइटल सॉन्ग ”किताबों से कभी गुजरो तो कुछ किरदार मिलते हैं, गए वक्तों की ढ्योरी में खड़े कुछ यार मिलते हैं” बजता था तो मन खुद-ब-खुद ही इस सीरियल को देखने के लिए बंध जाता था. इसके बाद ओम पुरी की शानदार एक्टिंग ने इस सीरियल में चार चांद लगा दिए थे. रिलेशनशिप पर गुलजार ने कुछ सराहनीय काम किया है. फिल्मों के जरिए तो उन्होंने ऐसा किया ही है साथ ही इस सीरियल के जरिए भी रिश्तों की समझ में काफी गहराइयों तक लेकर गए और उनके मायने बताए. इस सीरियल के 13 एपिसोड थे.

ये जो है जिंदगी- ये टीवी सीरियल साल 1984 में आया था और एक कॉमेडी जॉनर का सीरियल था. इसमें शफी इनामदार, राकेश बेदी, स्वरूप संपत, सतीश शाह और टीकू तलसानिया जैसे कलाकारों ने शानदार काम किया था. इस सीरियल में सतीश शाह की एक्टिंग की खूब तारीफ की गई थी.

चाणक्य- ये सीरियल दूरदर्शन पर साल 1991 में टेलीकास्ट किया गया था. इसमें चाणक्य का रोल फिल्म निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने प्ले किया था. इसका निर्देशन भी उन्होंने ही किया था. इसके कुल 47 एपिसोड्स दिखाए गए थे. शो ने शानदार पॉपुलैरिटी दर्ज की थी और घर-घर में देखा जाता था.

मिर्ज़ा ग़ालिब- मिर्ज़ा ग़ालिब पर भारत में गुलजार ने जो काम किया है वो शायद ही किसी और ने किया हो. अपनी लेखनी के जरिए तो उन्होंने मिर्ज़ा ग़ालिब के जीवन, उनके लेखन को लोगों तक पहुंचाया ही साथ ही उन्होंने साल 1988 में मिर्ज़ा ग़ालिब नाम से एक सीरियल भी बनाया. इसमें नसीरुद्दीन शाह ने मिर्ज़ा ग़ालिब का रोल प्ले किया था. शो को काफी प्रशंसा मिली थी और इसके गाने भी काफी हिट रहे थे. शो को देख कर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि हर एक बारीक से बारीक चीज का ध्यान रखा गया था और गुलजार साहब ने इस सीरियल को बनाने में काफी मेहनत की थी. शो की प्रशंसा सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दूसरे मुल्कों में भी की गई थी.

आजतक से साभार

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