राम मंदिर के समर्थक मौलाना नदवी अयोध्या विवाद से हुए अलग

लखनऊ: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के समर्थक मौलाना सलमान नदवी ने अब खुद को अयोध्या विवाद से अलग कर लिया है। नदवी ने कहा है कि वह इस मामले में अदालत के फैसले का इंतजार करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि वह तभी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में लौटेंगे, जब असदुद्दीन ओवैसी और कमल फारूकी सहित चार लोगों को बोर्ड से बाहर नहीं निकाल दिया जाता। नदवी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से निष्कासित किए जा चुके हैं।

नदवी निष्कासित होने के बावजूद वह अदालत से बाहर अयोध्या विवाद सुलझाने में जुटे हुए थे। गुरुवार को ही आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने उनसे लखनऊ में मुलाकात की थी। इस मीटिंग के बाद श्री श्री ने कहा था कि उन्हें मुसलमानों का समर्थन है और जल्द ही अयोध्या विवाद सुलझा लिया जाएगा।

खुद नदवी ने कहा था कि वह कोर्ट के बाहर अयोध्या विवाद सुलझाने का प्रस्ताव तैयार करेंगे। इसके लिए उन्होंने मानव कल्याण बोर्ड का गठन करने का ऐलान किया था। नदवी के इस नए बोर्ड की पहली बैठक 8 मार्च को लखनऊ में आयोजित होने वाली थी। अब अयोध्या विवाद से खुद को अलग करने के फैसले से मानव कल्याण बोर्ड की योजना भी अधर में लटक गई है।

मौलाना नदवी ने अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए तीन प्रस्ताव रखे थे। पहले प्रस्ताव में उन्होंने कहा था कि निर्मोही अखाड़े के कब्जे वाली 10 एकड़ की विवादित जमीन मुसलमानों को दे दी जाए और उसके बदले में हिंदुओं को विवादित जमीन दे दी जाए। उनका दूसरा प्रस्ताव था कि गोरखपुर हाइवे पर बहादुर शाह जफर के नाम से एक इंटरनैशनल यूनिवर्सिटी बनाई जाए और उसी के कैंपस में मस्जिद को जगह दी जाए। तीसरे और अंतिम प्रस्ताव में उन्होंने कहा था कि विवादित जमीन के पास जहां लकड़ी काटने की यूनिट लगी है, वहां पर मस्जिद बनाई जाए।

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