राष्ट्रपति ने काशी को दी 3473 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात

वाराणसी: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को धर्म नगरी काशी में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की 3473 करोड़ की दो परियोजनाओं के शिलान्यास सहित कुल पांच परियोजनाओं का शुभारंभ कर शहर को बड़ी सौगात दी है।

बड़ा लालपुर स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति कोविंद ने कौशल विकास मिशन के तहत प्रशिक्षित 10 युवाओं को विभिन्न कंपनियों के नियुक्ति पत्र सौंपे। उन्होंने कहा कि दुनिया का प्राचीनतम आध्यात्मिक शहर अब स्मार्ट सिटी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। काशी की आध्यात्मिक पहचान और विशेषता का जिक्र कर कोविंद ने कहा कि शहर बदलते हुए युग में प्राचीन परम्पराओं को अपने में समेटने के साथ आधुनिक परम्पराओं को भी अपना रहा है। वाराणसी में प्राचीन भारत के साथ 21वीं सदी की भी झलक देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि काशी में एक ओर गंगा आरती और अन्य धार्मिक गतिविधियां हैं तो दूसरी ओर आईआईटी बीएचयू भी है। यह शहर कुछ वर्षों से बदलाव का प्रतीक भी बन गया है।

काशी और उत्तर प्रदेश से जुड़ाव का ज्रिक कर राष्ट्रपति ने कहा कि यह प्रदेश मेरा गृह प्रदेश है। पूर्व में जब मैं वाराणसी आता था तो शहर में लटके जर्जर विद्युत तारों को देखकर कष्ट होता था। मगर केन्द्र की सरकार के सहयोग से शहर में भूमिगत विद्युत तार बिछाने की योजना से शहर प्रगति की दिशा में बढ़ रहा है। इस कार्य में प्रदेश सरकार के सक्रियता को सराहते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज जिन परियोजनाओं का शिलान्यास और शुभारंभ हुआ है, उससे शहर का विकास तो होगा ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

काशी में भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश, यहां का विभुतियां आदि शंकराचार्य, संत कबीर, रैदास, गोस्वामी तुलसीदास, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, मदन मोहन मालवीय को याद कर कहा कि इस शहर के पांच सपूतों को भारत रत्न पाने का गौरव मिला है। इस शहर ने मुख्यमंत्री भी दिया है लेकिन पहली बार इस शहर के सांसद देश के प्रधानमंत्री बने। वाराणसी के सांसद ने शहर को अपने प्रयासों से विश्व पटल पर ला दिया है। पिछले दिनों काशी में जापान के प्रधानमंत्री, फ्रांस और जर्मनी के राष्ट्रपति के आने का जिक्र कर बताया कि जब मैं फ्रांस के राष्ट्रपति से मिला तो मैंने उन्हें काशी पर आधारित पुस्तक दी। इस पर फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि मैं काशी से लौट आया, सोच रहा था कि काशी के यादों को कैसे सहेजू लेकिन पुस्तक देकर आपने इसे आसान कर दिया।

केन्द्र सरकार के सहयोग से शहर में चल रहे विभिन्न परियोजनाओं को गिनाते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि अब वाराणसी में आर्थिक विकास तो होगा ही पूर्वी भारत में व्यापार के रास्ते भी खुल जाएंगे। समारोह में सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल राम नाईक ने राष्ट्रपति का स्वागत कर प्रदेश में चल रही विकास योजनाओं और विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक गतिविधियों को बताया।

राष्ट्रपति ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण(एनएचएआई) की जिन परियोजनाओं का शिलान्यास किया, इन परियोजनाओं के पूरा होने से वाराणसी और पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से मध्य प्रदेश की सीमा तक आवागमन आसान हो जाएगा। परियोजना में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-सात पर वाराणसी-हनुमाना (मध्य प्रदेश की सीमा तक) खंड पर 125.165 किलोमीटर लंबे सड़क चौड़ीकरण (चार लेन) एवं उन्नयन कार्य और 44.25 किलोमीटर लंबे वाराणसी रिंग रोड फेज-दो के निर्माण कार्य शामिल हैं। परियोजना में वाराणसी-हनुमाना सड़क खंड पर 2,118 करोड़ रुपये और रिंग रोड परियोजनाओं पर 1,355 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान हैं।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper