राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना और राफेल पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई 10 मई को

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राफेल मामले पर दायर रिव्यू पिटीशन पर सोमवार को सुनवाई टाल दी। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 10 मई को होगी। सुनवाई के दौरान राफेल पर दायर रिव्यू पिटीशन के साथ राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना याचिका के न लिस्ट होने पर चीफ जस्टिस ने हैरानी जताई। चीफ जस्टिस ने कहा कि हमने दोनों केसों को एक साथ लिस्ट करने का आदेश दिया था, ताकि दोनों केसों की सुनवाई एक साथ की जा सके। इसके बावजूद राहुल मामला 10 मई को कैसे डाल दिया गया, ये समझ नहीं आ रहा है। अब दोनों सुनवाई 10 मई को होगी। पिछले 4 मई को केंद्र सरकार ने राफेल मामले पर दायर रिव्यू पिटीशन में अपना हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करके कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का 14 दिसम्बर, 2018 का फैसला सही था जिसमें केंद्र सरकार को क्लीन चिट दी गई थी।

इस पर दोबारा विचार नहीं होना चाहिए क्योंकि चोरी के दस्तावेज को आधार बनाकर याचिका दायर की गई है। केंद्र सरकार ने कहा कि 36 राफेल जेट की खरीद से संबंधित सभी फाइलें सीएजी को भेजी गई थी। सीएजी ने अपने ऑडिट में पाया कि राफेल जेट यूपीए सरकार के समय की कीमत से 2.86 फीसदी सस्ते हैं। केंद्र सरकार ने कहा है कि प्रशांत भूषण के नेतृत्व में दायर रिव्यू पिटीशंस में मीडिया रिपोर्ट्स को आधार बनाया गया है। उस पिटीशन में आंतरिक फाइल नोटिंग्स के कुछ चुनिंदा हिस्सों को आधार बनाया गया है। ये दस्तावेज रिव्यू पिटीशन का आधार नहीं हो सकते हैं। केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि ये अधूरी फाइल नोटिंग्स हैं जिसमें अलग-अलग समय पर अलग-अलग लोगों की राय है। ये फाइल नोटिंग्स केंद्र सरकार का अंतिम फैसला नहीं हो सकता। केंद्र सरकार ने कहा है कि भारतीय ऑफसेट पार्टनर चुनने में निजी भारतीय व्यावसायिक घराने का कहीं जिक्र नहीं है।

ऑफसेट कांट्रैक्ट का मतलब 36 राफेल जेटों का भारत में निर्माण करने का नहीं था, चाहे वो सरकार क्षेत्र से हो या निजी क्षेत्र से। आपको बता दें कि पिछले 10 अप्रैल को कोर्ट ने राफेल मामले पर लीक दस्तावेज को साक्ष्य के तौर पर पेश करने के खिलाफ दायर केंद्र सरकार की याचिका को खारिज कर दिया था।पिछले 30 अप्रैल को राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना मामले में राहुल गांधी के हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। कोर्ट के सख्त तेवर देख उनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कदम पीछे खींच लिए थे और कोर्ट में माफी माफी मांगने की बात कही थी । अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हम कोर्ट को संतुष्ट करने वाला हलफनामा दायर करेंगे।

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