राहुल से ममता की बढ़ती दूरियां, कांग्रेस की परेशानी बढ़ी

दिल्ली ब्यूरो: एक तरफ बीजेपी को घेरने के लिए विपक्षी एकता की राजनीति को मजबूत बनाने की बाते चल रही है तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी ,राहुल गांधी को भाव नहीं दे रही है। ममता बनर्जी का सोनिया गांधी के साथ आज भी बेहतरीन सम्बन्ध हैं लेकिन राहुल को नेता के रूप में अभी ममता स्वीकार करने के मुद में नहीं है। यही वजह है कि विपक्षी गठबंधन की राजनीति आगे नहीं बढ़ रही है। ममता बनर्जी एक तरफ थर्ड फ्रंट बनाने की मुहिम चला रही हैं लेकिन कांग्रेस से उनकी लगातार दूरियां भी बढ़ रही है। ऐसे में कांग्रेस के भीतर उहापोह की स्थिति बनी हुयी है।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने कुछ वरिष्ठ नेताओं को ममता बनर्जी का मूड भांपने के लिए लगाया गया है। अगले कुछ दिनों में ये नेता ममता बनर्जी से मिल सकते हैं। चर्चा तो यह भी है कि दो दिनों के लिए नीति आयोग की बैठक में शामिल होने दिल्ली आई ममता बनर्जी से इसी दौरान ही कांग्रेस के कुछ सीनियर मुलाकात कर सकते हैं। इसी क्रम में अहमद पटेल की मुलाक़ात ममता बनर्जी से हुयी है और ममता ने अहमद के साथ कई मसलों पर बात भी की है। क्या बातें हुयी है इसका खुलासा नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि ममता के साथ अहमद की मुलाक़ात विपक्षी एकता को मजबूत करने को लेकर हुयी है।

दरअसल, ममता बनर्जी की कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से आत्मीयता सर्वविदित है। सोनिया से मिलने में ममता कोई हिचक भी नहीं महसूस करतीं, लेकिन जहां राहुल गांधी का नाम आता है, ममता छिटक कर एक किनारे हो जाती हैं। कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस की सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भी ममता और सोनिया की नजदीकी देखने को मिली थी। लेकिन राहुल से वे कटी-कटी सी दिखीं। बीते दिनों राहुल गांधी की ओर से दी गई इफ्तार पार्टी में भी ममता नहीं पहुंचीं। हालांकि उन्होंने अपना प्रतिनिधि भेज रखा था। ममता विपक्षी एकजुटता के लिए अलग से थर्ड फ्रंट बनाने की कोशिश में लगी हैं।

ममता जहां तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से इस बारे में भेंट कर चुकी हैं, वहीं शरद पवार, नवीन पटनायक, अरविंद केजरीवाल और तेजस्वी जैसे प्रमुख नेताओं से भी बातचीत कर चुकी हैं। ममता की इस कोशिश के चलते कांग्रेस की विपक्ष की एकजुटता की मुहिम पर असर पड़ रहा है। विपक्ष के कई दल असमंजस की स्थिति में हैं। कांग्रेस जहां लोकसभा चुनाव से पहले सभी राज्यों में क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन करने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं भाजपा को केंद्र में वापस आने से रोकने के लिए मजबूत मंच भी बनाने की कोशिश में है।

विपक्ष की एकजुटता की मुहिम यूपीए चेयरपर्सन और कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने शुरू की। उन्होंने समान विचारों वाले दलों को साथ लाने की कोशिश में अपने आवास पर रात्रिभोज का भी आयोजन किया। कई दिग्गज नेता उस रात्रिभोज में पहुंचे भी। कांग्रेस चाहती है कि ममता थर्ड फ्रंट की मुहिम की बजाए यूपीए के साथ ही मिल कर मजबूत विपक्षी गठबंधन बनाने में मदद करें।

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