रेलवे में चंपी का खेल

नई दिल्ली: महान शायर साहिर लुधियानवी ने सोचा भी न होगा कि फिल्म ‘प्यासा’ के लिए उनके लिखे मजाकिया गीत ‘सुन सुन अरे बेटा सुन, इस चंपी में बड़े-बड़े गुण’ को भारतीय रेलवे 62 साल बाद इतनी गंभीरता से लेगी कि पश्चिम रेलवे चंपी मालिश को नवाचारी स्टार्ट अप मानकर रेलवे में इसे लागू करने का ऐलान कर देगी। यह बात दूसरी है कि भारी विरोध के बाद एक पखवाड़े में ही चंपी के जरिए माल कमाने की इस योजना पर उस्तरा चल गया। हो सकता है कुछ चंपी पसंद लोग भारतीय रेलवे के इस नवाचारी स्टार्टअप की भ्रूण हत्या से निराश हों, लेकिन ज्यादातर लोग इस बात से हैरान हैं कि रेलवे के मर्ज की यह कैसी दवा रेल अफसरों ने खोजी।

खासकर तब कि जब भारतीय रेलवे में बुनियादी यात्री सुविधाओं जैसे बेहतर कोच, स्वच्छता, समय पर परिचालन और भीड़ से निजात की तुरंत आवश्यकता है। भला हो, भाजपा नेता सुमित्रा महाजन और सांसद शंकर ललवानी का, जिन्होंने इस योजना को अव्यावहारिक (परोक्ष रूप में मूर्खतापूर्ण) बताकर विरोध किया और पश्चिम रेलवे ने आनन-फानन में योजना वापस ले ली। हालांकि इस कदम से खफा चंपी मालिश कंपनी ने रेलवे के खिलाफ कोर्ट में मामला दायर करने की धमकी दी है। रेल मंत्री पीयूष गोयल से इस फैसले पर पुनॢवचार का अनुरोध करते हुए कंपनी ने कहा है कि इस योजना का टेंडर पास करने के बाद योजना को एकतरफा कार्रवाई करना चंपी कंपनी के पेट पर लात मारने जैसा है।

रेलवे की यह ‘चंपी मालिश योजना’ इंदौर से चलने वाले 39 ट्रेनों में लागू होने वाली थी। नवाचारी स्टार्टअप को बढ़ावा देने की नीति के तहत एक निजी कंपनी ‘कैलिप्सो’ को चलती रेल में यात्रियों के चंपी मालिश का ठेका दिया गया। भोली सोच यह थी कि लंबी दूरी के यात्रियों को हाथ-पैर और सिर की मालिश करवाकर ट्रेन में ही यात्रा की थकान मिटाने में मदद मिलेगी। कंपनी संचालक का दावा है कि उन्हें रेलवे ने एक साल का आशय पत्र भी दिया था। उसी के हिसाब से कंपनी ने तैयारियां भी कर ली थीं। प्रस्ताव था कि रेलों में सुबह 6 से रात 10 बजे के बीच यह सुविधा तीन श्रेणियों में होगी, जिसके लिए क्रमश: सौ, दो सौ और तीन सौ रुपए चार्ज किए जाएंगे। अनुमान यह था कि साल भर में करीब 20 हजार यात्री इस सुविधा का लाभ लेंगे, जिससे पश्चिम रेलवे को 90 लाख रुपए की अतिरिक्त कमाई होगी। कुछ लोगों द्वारा योजना को लेकर ‘गलत फहमियां’  फैलाने की वजह से रेलवे ने योजना रद्द कर दी।

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