लखनऊ पुस्तक मेले में नाम रोशन कर गया प्रलेक प्रकाशन

लखनऊ: बाल संग्रहालय लॉन, चारबाग स्थित लखनऊ पुस्तक मेले में पुस्तक प्रेमी के रूप में बच्चे, बुजुर्ग ही नहीं युवा वर्ग में उत्साह, उमंग का माहौल रहा। 05 मार्च 2021 से 14 मार्च 2021 तक चले पुस्तक मेले में जहाँ कई प्रतिष्ठित प्रकाशकों के स्टॉल लगे हैं, वहीं मुम्बई के प्रतिष्ठित प्रकाशक प्रलेक प्रकाशन ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रलेक प्रकाशन, मुम्बई की स्टॉल 27 और 28 पर साहित्य प्रेमियों की अपार उपस्थिति ने दर्शाया कि प्रलेक प्रकाशन ने भी नए और प्रतिष्ठित लेखकों में समन्वय स्थापित कर पाठकों के समक्ष उनकी रुचि अनुसार उत्कृष्ट साहित्य प्रकाशित किया है। पाठक द्वारा जीवनी, उपन्यास, कहानी व कविता संग्रह तथा विशेष विमर्श की पुस्तकों को पसंद किया गया।

पाठकों द्वारा प्रलेक प्रकाशन से प्रकाशित चित्रा मुद्गल द्वारा लिखित हथियार, उषा किरण खान द्वारा लिखित दूबधान, अशोक चक्रधर द्वारा लिखित गई दुनिया नई दुनिया, आशीष कुलश्रेष्ठ द्वारा लिखित काव्यानुवाद किन्नर काव्य, राज गोपाल सिंह वर्मा का इश्क़ लखनवी मिज़ाज़ का, शची मिश्र का भोजपुरी की लोककथाएं तथा नकटा, सूर्यबाला की सूर्य बाला:एक शिनाख्त, प्रवीण दुबे की मैं तुम्हारी कोशी, प्रेम जनमेजय की व्यंग्य रचनायें, लालित्य ललित, राजेश कुमार के संपादन की इक्कीसवीं सदी के 131 श्रेष्ठ व्यंग्यकार, प्रताप सहगल की मेरी चुनिंदा यात्राएं, राकेश कुमार सिंह की ठहरिये आगे जंगल है, अभिलाष अवस्थी की पीपल पर घोंसले नहीं होते आदि पुस्तकों को पसंद और खरीदा गया।

जहाँ मेले के प्रारंभ के दिनों में महेंद्र भीष्म का उपन्यास बैरी, अर्पण कुमार की सह-अस्तित्व, मयंक पांडेय की पलायन पीड़ा प्रेरणा, गीताश्री का बलम कलकत्ता, रजनी गुप्त की सतह पर चाँद, आभा काला की हरी पत्तियाँ पीले फूल और सूखा दरख़्त तथा मेरी भी तो सुनो, स्वाति चौधरी की विद्यापति: एक दृष्टिकोण, वंदना यादव की ज़िंदगी और मौत के बीच, रश्मि रविजा की ऑरेंज बार पिघलती रही, निवेदिता झा की अब के बसंत आदि का लोकार्पण हुआ। वहीं पुस्तक मेले के अंतिम दिन दयानंद पांडेय के तीन चर्चित उपन्यास-मन्ना जल्दी आना, मुजरिम चाँद, मैत्रयी की मुश्किलें, सुरेंद्र मनन की कैद में किताब, रूबी मोहंती की ख्वाहिशों का मेन्यू कार्ड, तेजेन्द्र शर्मा की टेम्स नदी की तट पर, तनुजा मिश्रा की सीढियाँ, अजय कुलश्रेष्ठ ‘अजेय’ की ऊँट की ओट, डॉ एम डी सिंह की रोजनामचा, जयंती नाथन की आसपास से गुजरते हुए, शक्ति प्रकाश को अंतहीन आदि लोकार्पित हुईं। अंतिम दिन के लोकार्पण समारोह में मुख्य रूप से कोशी सिन्हा, उदय भान पांडेय ‘भान’, रश्मि कुलश्रेष्ठ आदि उपस्थित थे।

साहित्य प्रेमियों के उत्साह से उत्साहित प्रलेक प्रकाशन, मुम्बई के प्रमुख श्री जितेंद्र पात्रो ने वार्ता में बताया कि पाठकों का प्रेम ही नया साहित्य प्रकाशित करने का जोश उत्पन्न करता है। एक ओर जहाँ प्रलेक प्रकाशन प्रतिष्ठित रचनाकारों की पुस्तकों को प्रकाशित कर रहा है, वहीं युवा लेखकों की पुस्तकों को प्रकाशित कर उनमें छिपी प्रतिभाओं को साहित्य संसार के मध्य उपस्थिति दर्ज कराने के लिए प्रयासरत हैं। पात्रो कहते हैं कि कमाना उद्देश्य नहीं है बल्कि उत्कृष्ट रचनाओं को साहित्य जगत में लाना और युवा रचनाकारों को एक कदम साहित्य रचना की ओर बढ़ाना मुख्य ध्येय है। उन्होंने बताया कि आगामी भविष्य में भी प्रत्येक वर्ष लखनऊ के पुस्तक मेले में पाठकों के लिए नवीन पुस्तकें लाते रहेंगे।

वार्ता के अंत में प्रकाशक जितेंद्र पात्रो ने महेन्द्र भीष्म, आशीष कुलश्रेष्ठ, स्वाति चौधरी, अतुल कुमार मिश्रा, बाल गोपाल शुक्ला, विश्वम फाउंडेशन के यूबी त्रिपाठी, लखनऊ पुस्तक मेला के आयोजक मनोज सिंह चंदेल आदि सभी का आभार व्यक्त किया।

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