लखनऊ में किसानों से सीधा संवाद करेंगे सीएम योगी आदित्यनाथ

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजधानी लखनऊ में किसानों से सीधा संवाद करेंगे। योगी से किसानों को रूबरू होने का मौका अखिल भारतीय किसान संघ के प्रदेश स्तरीय अधिवेशन में मिलेगा। अखिल भारतीय किसान संघ का प्रदेश अधिवेशन आगामी 22-23 सितंबर को सरस्वती कुंज निराला नगर में आयोजित है। प्रदेश अधिवेशन का उद्घाटन 22 सितंबर को किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर धर्मपाल सिंह करेंगे। जबकि समापन मुख्यमंत्री योगी करेंगे।

समापन कार्यक्रम से पहले किसान और मुख्यमंत्री के बीच द्विपक्षीय संवाद सत्र रखा गया है। इस सत्र के माध्यम से जहां मुख्यमंत्री किसानों की स्थिति और उनको मिलने वाली सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत परखेंगे। वहीं सीधे किसान भी अपनी समस्याओं से मुख्यमंत्री को अवगत करा सकेंगे। इस मौके पर किसान संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। किसान संघ के अवध प्रांत के प्रांत संगठन मंत्री रामशिला ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि इस अधिवेशन में संपूर्ण उत्तर प्रदेश के सभी जिला कार्यकारिणी के सदस्यों को आमंत्रित किया गया है। बताया कि अधिवेशन में करीब 1600 प्रतिनिधि भाग लेंगे। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी किसान संघ द्वारा प्रकाशित किसान स्मारिका का विमोचन भी करेंगे।

अवध प्रांत के संगठन मंत्री ने बताया कि अवध के सभी जिलों में कार्यकारिणी गठन का काम पूरा हो चुका है। अधिवेशन में उत्तर प्रदेश के सभी जिलों की नई कार्यकारणी की घोषणा भी होगी। राम चेला ने बताया कि अधिवेशन में 22 सितंबर को ही प्रदेश की नई कार्यकारिणी का गठन होगा। इसके बाद प्रांतीय टोली का गठन किया जाएगा। प्रांतीय टोली के अध्यक्ष ही अपने-अपने जिलों की जिला कार्य समिति की घोषणा करेंगे।

किसानों की समस्याओं के बारे में पूछने पर राम चेला ने बताया कि किसानों की जमीनी हकीकत से सरकार वाकिफ नहीं है। सरकारी अधिकारी गलत रिपोर्टिंग करते हैं। किसानों की सही बात सरकार तक नहीं पहुंचती है। प्रांत संगठन मंत्री ने बताया कि किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या छुट्टा जानवरों की है। पिछड़े जिलों में तो यह समस्या कम है क्योंकि वहां पर अभी किसान पशुपालन करते हैं लेकिन विकसित जिलों में आवारा पशुओं की संख्या अधिक है। बहुत किसान भी देखा देखी दूध निकालने और अपना काम करने के बाद पशुओं को खुला छोड़ देते हैं। यह प्रवृत्ति वैसे ठीक नहीं है।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि जैसे सरकार गौशालाओं को काफी संख्या में अनुदान देती है उसी अनुपात में पशुपालन करने वाले किसानों को पशुओं की संख्या के हिसाब से मुआवजा दिया जाना चाहिए। इससे आवारा पशुओं की संख्या पर लगाम लग सकेगा। उन्होंने बताया कि अधिकांश जिलों में किसानों ने चीनी मिल मालिकों की मनमानी की शिकायत की है। किसानों को समय पर पर्ची नहीं मिली। इस बार चीनी मिलों ने अगेती गन्ने की प्रजाति की ही खरीददारी की।

अधिकांश किसानों की अगेती प्रजाति का गन्ना ही नहीं खरीदा गया। किसानों को सही समय पर सही बीज भी उपलब्ध नहीं हो पाता है। ब्लॉक से जो बीज दिया जाता है वह इलाके के चिन्हित लोगों को ही दिया जाता है। वही किसानों का यह भी कहना है कि बैंक और तहसीलों में भी वाजिब काम के लिए पैसा देना पड़ता है। पहले और अबकी सरकार में जमीनी स्तर पर कोई अंतर नहीं है।

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