लखनऊ में फूंका गया नाथूराम गोडसे का पुतला

लखनऊ: महात्मा गांधी के शहादत दिवस पर मंगलवार को कई सियासी व सामाजिक संगठनों ने राष्ट्रपिता के हत्यारे नाथूराम गोडसे का पुतला दहन किया। भागीदारी आंदोलन के संयोजक पी.सी. कुरील ने आईपीएन से बातचीत में कहा कि यह बात हर भारतवासी के लिए चिंता का विषय है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या करने वाले गोडसे को आज कुछ आतंकवादी शक्तियां अपना नायक बता रही हैं और गोडसे को शहीद का दर्जा देने की मांग कर रही हैं।

उन्होंने कहा, “हिंदू महासभा नाथूराम गोडसे का मंदिर बनाने का प्रयास कर रहा है। असल आतंकी तो यही लोग हैं। यही लोग देश में अराजकता फैलाकर देश की शांति भंग करना चाहते हैं। भाजपा की राज्य और केंद्र सरकार इन भगवा आतंकियों का समर्थन करते हुए उनके विरुद्ध कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर रही हैं। इससे स्पष्ट है कि देश की सत्ता पर किस तरह के लोग काबिज हो गए हैं। इन लोगों के मन में गांधी के प्रति कोई आदर नहीं है, सिर्फ सत्ता पाने और सत्ता में बने रहने के लिए गांधी का नाम मजबूरी में लेते हैं।”

कुरील की ये बातें निराधार नहीं हैं। वर्ष 2014 में संसद की सीढ़ी पर खड़े साक्षी महाराज ने मीडिया के सामने कहा था कि महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे उनके आदर्श हैं और उनके लिए पूजनीय हैं। उनके इस बयान पर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। बाद में यह बात महाराज ने मीडिया से स्वयं कहा था कि उन्हें चिट्ठी मिली है।

पुतला दहन के समय इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हाजी फहीम सिद्दीकी, सामाजिक कार्यकर्ता मुहम्मद आफाक, मुस्लिम फोरम के अध्यक्ष डॉ. आफताब अहमद, नागरिक परिषद के अध्यक्ष रफी अहमद, लालजी यादव मुस्लिम समाज परिषद के अध्यक्ष मोहम्मद शोएब, शराबबंदी संघर्ष समिति के कार्यकर्ता कमर सीतापुरी, जन एकता मंच के अध्यक्ष डी.के. यादव, राष्ट्रीय प्रवक्ता इंद्र प्रकाश बौद्ध, केदारनाथ व एडवोकेट हामिद अहमद आजाद मौजूद थे।

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