लता ने हौंसलों से पाई सफलता की उड़ान, स्वरोजगार से दिखाई आर्थिक स्वावलंबन की राह

धर्मशाला: धर्मशाला के रामनगर की रहने वाली लता देवी ने अपने दृढ़-निश्चय व आत्मविश्वास के बूते पर अपनी अलग पहचान बनाई है। लता बताती हैं कि उनके पिता केश सिंह रामनगर में वाहन मुरम्मत का कार्य करते हैं। जिससे प्राप्त आमदनी से वे अपने परिवार का गुजर-बसर कर रहे थे। लता अपने पिता का आर्थिक बोझ कम करना चाहती थी, किन्तु जागरूकता एवं शिक्षा के अभाव के कारण वह ऐसा नहीं कर पा रही थी। लता ने मंत पंचायत से एक साल का स्टीचिंग का कोर्स किया था, जिससे वह लोगों के कपड़े सिलकर थोड़ा बहुत अपना खर्च निकाल लेती थी। लता के दिमाग में हमेशा यह टीस रहती थी कि वह किस प्रकार से अपने पिता की आर्थिक मदद कर सके।

एक दिन लता को पंजाब नैशनल बैंक के धर्मशाला स्थित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के स्टाफ से संस्थान द्वारा करवाए जा रहे निशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी मिली। उन्होंने तुरन्त संस्थान से सम्पर्क किया तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी ली। लता ने फैशन डिजाईनिंग के एक महीने के कोर्स के लिए आवेदन किया। यह प्रशिक्षण उनके लिए काफी ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्व हुआ।

लता देवी बताती हैं कि उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत 50 हजार रूपये अपनी बचत से तथा 50 हजार रूपये का ऋृण पंजाब नैशनल बैंक की शाखा कोतवाली बाजार धर्मशाला से लिया। इसके उपरांत कोतवाली बाजार में एक किराए की दुकान लेकर ड्रैस डिसाईनिंग का कार्य शुरू किया। मेहनत और प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान के बूते पर देखते ही देखते दिन बदलने लगे। आज लता अपने परिवार की आर्थिकी को मजबूत करने में अपने पिता का सहारा बनी हुई है।

लता देवी बताती हैं कि वे महीने में 10 से 15 हजार रूपये तक कमा रही हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने अपनी दुकान पर तीन अन्य महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध करवाया है। जो महीने के लगभग तीन से चार हजार रूपये तक कमा रही हैं। लता के पिताजी  केश सिंह का कहना है कि लता के आत्मविश्वास ने उनके परिवार की जिन्दगी बदल दी है।

पंजाब नैशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक कमल प्रकाश बताते हैं कि संस्थान जरूरतमंद एवं इच्छुक लोगों को स्वरोजगार आरम्भ करने के लिए नि:शुल्क प्रशिक्षण देता है, ताकि वे आर्थिक रूप से सुदृढ़ एवं आत्मनिर्भर हो सकें। वे बताते हैं कि संस्थान 18 से 45 वर्ष तक की महिलाओं और पुरूषों को डेयरी फार्मिंग, खुम्ब उत्पादन, सब्जी नर्सरी प्रबंधन और सब्जियों की खेती, आलू एवं प्याज की खेती और प्राकृतिक संरक्षण, अचार और पापड़ बनाना, खिलौने बनाना, डुने पत्तल बनाना, कपड़े के बैग बनाना तथा मोबाईल रिपेयरिंग जैसे विभिन्न रोजगारपरक व्यवसायों में प्रशिक्षण प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण की समाप्ति पर प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र दिए जाते हैं, जिसके द्वारा वे स्वरोजगार हेतु जिला कांगड़ा के किसी भी बैंक से ऋण प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

जिलाधीश कांगड़ा सीपी वर्मा का कहना है कि महिलाओं का सामाजिक, आर्थिक उत्थान तथा उन्हें विकास के समान अवसर प्रदान करना प्रदेश सरकार की उच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि महिला कल्याण की योजनाओं को जिला में बेहतर ढग़ से कार्यान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी जिलावासियों विशेषकर युवाओं एवं महिलाओं को स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने पर बल दिया जा रहा है, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। प्रशासन के इन प्रयासों में पंजाब नैशनल बैंक के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण जैसे संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जो बेहद सराहनीय है।

इस प्रकार के प्रशिक्षणों से लोग क्षेत्र विशेष के लिए आवश्यक ज्ञान प्राप्त कर एवं कौशल विकास से स्वरोजगार अपनाकर स्वावलंबन की राह पर आगे बढ़ें हैं। उनका कहना है कि जिला प्रशासन लोगों को स्वरोजगार आरम्भ करने के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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