लम्पी स्किन डिसीज की वैक्सीन बनाने की तकनीक को मार्केट में उप्लब्धता हेतु आई सी ए आर ने बायोवेट प्रा.लि.कर्नाटक को हस्तांतरित किया

बरेली 17 सितंबर । आईसीएआर-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, (आईवीआरआई) इज़्ज़तनगर एवं आईसीएआर- राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार के वैज्ञानिकों द्वारा संयुक्त रूप से विकसित “लम्पि -प्रोवैक इंड” तकनीक को कल दिल्ली में आयोजित समारोह में बायोवेट प्राइवेट लिमिटेड, कर्नाटक को हस्तांतरित कर दिया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की वाणिज्यिक शाखा, नई दिल्ली द्वारा किया गया था। समारोह में डॉ. हिमांशु पाठक, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), डॉ. बी. एन. त्रिपाठी, उप महानिदेशक (पशु विज्ञान), डॉ. त्रिवेणी दत्त, निदेशक, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, (आईवीआरआई), इज़्ज़तनगर, डॉ. यश पाल, निदेशक, राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार, हरियाणा, डॉ. सुधा मैसूर, सीईओ, एग्रोनेट, डॉ. श्रीनिवासुलु किलारी, कार्यकारी निदेशक, बायोवोल्ट प्रा. लिमिटेड एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के एग्रीनोवेट आदि के अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

इस अवसर पर डॉ हिमांशु पाठक , सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (आईसीएआर) ने वैक्सीन के विकास में शामिल वैज्ञानिकों के सफल प्रयासों एवं सफल प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की सराहना की। उन्होने आईवीआरआई, इज़्ज़तनगर तथा राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार को बधाई देते हुए कहा की बायोवेट प्रा. लिमिटेड, निश्चित रूप मानकों के अनुरूप वेक्सीन का निर्माण करेगी जिससे पशुओं बीमारी को रोकने में कारगर सिद्ध होगी । डॉ. बीएन त्रिपाठी, उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) ने इस प्रौद्योगिकी की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला और कहा कि वैक्सीन कंपनी को जल्द से जल्द निर्माण शुरू करने में मदद कर सकती है ताकि इस बीमारी को दूर करने के लिए किसानों को आगे प्रसार के लिए वैक्सीन बाजार के लिए तैयार किया जा सके।

आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने टीके को विकसित करने वाले सभी वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि इस टीके के प्रयोग से किसानों को हो रहे आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा तथा देश आत्म निर्भरता की ओर तेजी से आगे बड़ेगा । डॉ. सुधा मैसूर, सीईओ, एग्रीनोवेट इंडिया लिमिटेड ने संकेत दिया कि यह प्रौद्योगिकी हस्तांतरण AgIn के लिए एक प्रमुख गेम चेंजर है, इस हस्तांतरण के साथ AgIn का सकल कारोबार 2018-19 से 17 करोड़ पहुँच सकता है ।

राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार निदेशक डॉ. यश पाल, ने लुंपी-प्रोवाकिंड तकनीक के बारे में बताते हुए कहा की की इसके परिणाम उत्साहजनक हैं। उन्होने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त, निदेशक को समय पर सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त किया। बायोवेट प्रा. लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक डॉ. श्रीनिवासुलु किलारी ने कहा कि लुंपी-प्रोवैक इंड” तकनीक का लाइसेंस लेकर खुश है और जल्द से जल्द वैक्सीन के व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा ।

Lumpi-ProVacind जानवरों में सुरक्षित है और घातक LSDV चुनौती के खिलाफ पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने के अलावा, एलएसडीवी-विशिष्ट एंटीबॉडी और सेल-मध्यस्थता प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रेरित करता है। Lumpi-ProVacind का उपयोग ढेलेदार त्वचा रोग के खिलाफ जानवरों के रोगनिरोधी टीकाकरण के लिए किया जाता है। सजातीय जीवित-क्षीण एलएसडी टीकों से प्रेरित प्रतिरक्षा आमतौर पर कम से कम 1 वर्ष की अवधि के लिए बनी रहती है। टीके की एक एकल खुराक में जीवित क्षीणित एलएसडीवी (रांची स्ट्रेन) की 103.5 टीसीआईडी50 होती है। भारत में वैक्सीन की काफी मांग है। इसके अलावा, प्रौद्योगिकी के लिए पेटेंट दायर किया गया है।

बरेली से ए सी सक्सेना की रिपोर्ट

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