‘लव जिहाद’ पर एनआईए के साथ आई केरल सरकार

नई दिल्ली: केरल में सीपीएम नेतृत्व वाली सरकार ने ‘लव जिहाद’ पर केंद्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच को अपना समर्थन देते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि इस समय राज्य इस समस्या से जूझ रहा है। उल्लेखनीय है कि मार्क्सवादी नेतृत्व वाली सरकार ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी की जांच पर पहले सवाल उठाए थे।

केरल सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि केंद्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अपनी रिपोर्ट तैयार करते हुए हिंदू महिला के विचार जाने बिना ही यह साबित करने की कोशिश की है कि उसे मुस्लिम युवक के साथ शादी के लिए बहलाया-फुसलाया गया है, जो बड़े पैमाने पर धर्मांतरण की एक साजिश है। अखिला अशोकन नाम की लड़की द्वारा इस्लाम धर्म कबूल किए जाने के इस मामले पर सुनवाई के दौरान केरल सरकार की ओर से कोर्ट में पेश हुए एडवोकेट वी. गिरी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कोर्ट को सबसे पहले दस्तावेज देखने चाहिए। हमें सबसे पहले इस समस्या को विस्तार से समझने का प्रयास करना होगा। राज्य लव जिहाद की समस्या से जूझ रहा है।

एनआईए ने अपनी इस रिपोर्ट में बताया है कि केरल में लव जिहाद के जरिए इस्लाम को बढ़ावा देने के लिए एक व्यवस्थित मशीनरी काम कर रही है। इससे पहले राज्य सरकार ने शफीन जहां और अखिला अशोकन के मामले की एनआईए द्वारा जांच कराने के सवाल पर विरोध किया था। उस समय राज्य सरकार ने कहा था कि राज्य पुलिस ने शफीन जहां और अखिला अशोकन की शादी और उनके मुस्लिम धर्म अपनाने की गंभीरता से जांच की है। इसलिए एनआईए के हाथ यह केस देने का कोई मतलब नहीं है। सुप्रीम कोर्ट को दिए अपने एफिडेविट में राज्य सरकार ने कहा था कि राज्य पुलिस ऐसी जांच के लिए पूरी तरह सक्षम है।

उसने इस मामले में सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की है। इस दौरान इस पहलू पर भी जांच की गई थी अखिला को देश से बाहर ले जाने का भी प्लान था। केरल सरकार की ओर से कोर्ट में पेश वकील वी. गिरी ने कोर्ट से कहा सुप्रीम कोर्ट को अखिला पर कोई निर्णय लेने से पहले, एनआईए के पूरे दस्तावेज का अध्ययन करना चाहिए और इसीके बाद कोई निर्णय देना चाहिए।

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