लालू ने बनाया नया एमबी समीकरण ,मनोज झा को बनाया राज्यसभा उम्मीदवार

अखिलेश अखिल

वैसे राजनीति में कौन कब पलटी मारे कोई नहीं जानता। और लालू प्रसाद की राजनीति कब सब को घायल कर दे इसे भला कौन जाने ! बिहार की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले लालू यादव भले ही चारा घोटाला में रांची जेल में बंद हैं लेकिन बिहार से लेकर देश की बदलती राजनीति पर उनकी पैनी नजर है। इसलिए कि राजनीति लालू प्रसाद के खून में है और राजनीती के सिवा वे कुछ सोंचते नहीं। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए राजद मुखिया लालू प्रसाद ने अब एक नया दाव खेला है ब्राह्मण को राज्य सभा उम्मीदवार बनाकर। लालू के इस खेल को राजनीतिक जानकार एमबी समीकरण के रूप में देख परख रहे हैं। मुस्लिम -ब्राह्मण समीकरण। लालू प्रसाद पहले से ही मुस्लिम -यादव समीकरण को आगे बढ़ाते रहे हैं और बिहार में कम से कम माय समीकरण के वे चैम्पियन माने जाते हैं।

लालू प्रसाद ने अपनी पार्टी राजद की तरफ से राज्यसभा में भेजने के लिए जिन दो उम्मीदवारों का चयन किया है उसमें एक मुस्लिम तबके से आते हैं और एक ब्राह्मण समाज से। राजनीतिक प्रेक्षकों की मानें, तो लालू ने शरद यादव तक को भी दरकिनार करते हुए पार्टी के ऊर्जावान नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा को राज्यसभा का टिकट दिया है। संदेश साफ है, लालू अब सवर्णों को नाराज करके बिहार में राजनीति करना नहीं चाहते हैं। बता दें कि लालू पर अक्सर सवर्ण विरोधी होने का आरोप लगता रहा है।

बिहार की सियासत में लालू को अब तक पिछड़ों का सबसे बड़ा नुमाईंदा और सत्ता तक पहुंचने के लिए यादव मुस्लिम समीकरण को साधने वाला नेता माना जाता रहा है। खासकर, अन्य ऊंची जातियों में लालू की छवि सवर्ण विरोधी आज भी बनी हुई है। अपनी पार्टी में हाल के दिनों में लालू ने कई ब्राह्मणों को जगह दी है। शिवानंद तिवारी को पार्टी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तक बनाया है। इन सारी कवायदों के बाद भी लालू के पूर्व के बयानों को कोट करते हुए सवर्ण जातियों के लोग उन्हें अपना विरोधी मानते हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें, तो राज्यसभा में इस बार के उम्मीदवार का चयन, इसी धारणा को बदलने का प्रयास है। मनोज झा दिल्ली विवि में प्रोफेसर हैं और काफी तेज तर्रार हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए चाणक्य की भूमिका निभाने वाले मनोज झा ने, अक्रामक चुनाव प्रचार की प्लानिंग की थी और मोहन भागवत के आरक्षण वाले बयान को मुद्दा बनाने की सलाह मनोज झा ने ही लालू को दी थी। लालू ने मनोज झा की पार्टी के प्रति निष्ठा और मेहनत को आगे रखते हुए, उन्हें उसका इनाम राज्यसभा की टिकट के रूप में दिया है। राजनीतिक प्रेक्षक कहते हैं कि लालू को बिहार में आगे भी सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने की राजनीति करनी है, उन्हें पता है कि मुस्लिम और यादव उनके पारंपरिक सपोर्टर हैं, उन्हें कोई तोड़ नहीं सकता। हाल के दिनों में सवर्ण विरोधी बनी छवि को एमबी समीकरण के जरिए ठीक किया जा सकता है। लालू ने मनोज झा को टिकट देकर सवर्णों में यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह उनके दुश्मन नहीं हैं।

राज्यसभा के दूसरे उम्मीदवार अशफाक करीब काफी पैसे वाले बताये जाते हैं, साथ ही सीमांचल के पिछड़े जिले कटिहार से आते हैं। अशफाक सीमांचल में काफी लोकप्रिय हैं और खासकर गरीब मुस्लिम समुदाय पर उनका खासा प्रभाव है। अशफाक ने लगे हाथों लालू को इस फैसले के लिए धन्यवाद दिया है और मीडिया से बातचीत में कहा है कि विकास उनकी पहली प्राथमिकता है और मेरी कोशिश होगी कि मैं जिस इलाके से आता हूं, वहां काम करूं और वहां के लोगों की समस्याओं का समाधान करूं. करीम ने कहा कि मेरा फोकस शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर रहेगा। राजद के इस फैसले के बाद पार्टी के अंदर उठ रही चर्चा पर बोलते हुए करीम ने यह भी कहा कि मुझे और मनोज झा को टिकट देने का फैसला लालू का है, इसलिए पार्टी में कोई नाराजगी नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे ने कहा कि उम्मीद है कि दोनों नेता राज्यसभा में पार्टी की आवाज को बुलंद करेंगे।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper