लाल किले की प्राचीर से 2019 को साधने की तैयारी में मोदी पीएम

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की लोकसभा चुनाव से पूर्व साल के अंत में होने वाले राजस्थान व मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव जीतना सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि इन तीनों राज्यों के चुनावों के नतीजों से लोकसभा चुनाव को लेकर हवा बनने या बिगडऩे का काम होगा। भाजपा के सामने चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि इनमें से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पिछले 15 साल से भाजपा की सरकार है, यहां पार्टी के खिलाफ सत्ता विरोधी माहौल है। लिहाजा इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से अपने संबोधन द्वारा लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव को साधने की कोशिश में कोई बड़ी घोषणा कर सकते हैं। लाल किले से संबोधन के दौरान ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में जन धन योजना की शुरुआत की थी।

माना जा रहा है कि अगले महीने मोदी लाल किले से अपने कार्यकाल के आखिरी संबोधन में जनता से सरोकर रखने वाली बड़ी घोषणा कर सकते है। जिसका 3 राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा को फायदा मिल सकता है। अपने कार्यकाल के अंतिम संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री जवानों और किसानों के लिए बड़ी घोषणा करने के साथ-साथ किसानों के लिए पेंशन योजना की शुरुआत की घोषणा करने के साथ ही देश के हर नागरिक के लिए न्यूनतम आय की योजना की घोषणा हो सकती है। इससे पहले कांग्रेस ने मनरेगा की घोषणा कर हर नागरिक को रोजगार दिया था लेकिन मोदी सरकार हर नागरिक को न्यूनतम कमाई का ऐलान कर सकती है। सरकारी कर्मचारियों को खुश करने के लिए रियाटरमैंट आयु में वृद्धि का ऐलान होने का भी अनुमान है।

तीनों राज्यों में माइक्रो प्रबंधन पर भी नजर

हालांकि भाजपा ने विधानसभा चुनाव अपने तीनों मुख्यमंत्रियों के चेहरे पर ही लडऩे का फैसला किया है,लेकिन पार्टी के उम्मीदवारों और प्रचार की सारी रणनीति भाजपा हाईकमान और अमित शाह की कोर टीम द्वारा तैयार की जा रही है। मध्यप्रदेश और राजस्थान में भाजपा का कांग्रेस के साथ सीधा मुकाबला है। लिहाजा भाजपा अपना घर दुरुस्त करने के अलावा कांग्रेस का मनोबल गिराने के लिए पार्टी में तोड़-फोड़ करवाने की रणनीति पर भी काम कर रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक भाजपा चुनाव वाले राज्यों में अपने कई विधायकों के टिकट काट सकती है। जिन विधायकों की रिपोर्ट अच्छी नहीं है उनका टिकट काटने की योजना पर काम चल रहा है। इसके अलावा चुनाव के प्रबंधन में संघ को भी शामिल किया जा रहा है। इन तीनों राज्यों में संघ का अच्छा-खासा आधार है और भाजपा इन चुनावों में प्रबंधन के स्तर पर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।

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