लॉकडाउन के बाद नई रणनीति बनाने में जुटी मोदी सरकार

नई दिल्ली: कोरोना से लड़ाई के लिए केंद्र की मोदी सरकार लॉकडाउन के बाद की नई रणनीति बनाने में जुटी है। इसमें बंद के दौरान दी जा रही छूट की स्थितियों का अध्ययन हो रहा है। छूट में बढ़ती भीड़ चिंताजनक है जो संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकती है। ऐसे में अति महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए सेक्टरवार व्यवस्था बनाई जाएगी जबकि आर्थिक दृष्टि से कम महत्वपूर्ण सेक्टरों को लंबे समय तक बंद रखा जा सकता है। वैक्सीन आने तक दो गज की दूरी सबसे बड़ा मंत्र है, लेकिन आबादी के दबाव से जूझ रहे देश में थोड़ी छूट में इंच भर की दूरी मुश्किल दिख रही है।

लॉकडाउन को अनंत समय तक लागू नहीं रखा जा सकता है, ऐसे में लोगों को इसके साथ जीने के लिए तैयार करना होगा। लोगों को खुद ही नियमों का पालन करना होगा। जैसे स्वच्छता अभियान को लिया गया, उसी तरह अब दो गज की दूरी है जरूरी, सतत रूप से हाथों को धोना और मास्क का प्रयोग जीवन का हिस्सा बनाना होगा। लोगों को डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन प्रयोग पर जाना होगा।

शराब की बिक्री से सरकार को बड़ा राजस्व मिलता है लेकिन उसकी बिक्री में जिस तरह से भीड़ जुट रही है, उसे भी रोकना होगा। इसे रोकने के लिए ऑनलाइन बिक्री को बढ़ावा दिया जा सकता है। छत्तीसगढ़ ने इसकी शुरुआत कर दी है और अन्य राज्यों में भी इसे शुरू किया जा सकता है। विशेषज्ञों की राय है कि भारत को अलग व्यवस्था बनानी होगी, जिसमें वह आत्मनिर्भर हो सके। कई राज्यों ने खर्चों में कटौती शुरू की है। आगे चलकर अन्य राज्य भी ऐसा कर सकते हैं।

महाराष्ट्र में खर्चों में कटौती की गई है। राज्यसभा सचिवालय और उप राष्ट्रपति कार्यालय में भी कटौती हो रही है। धीरे-धीरे अनावश्यक खर्चों को कम करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार लॉकडाउन के बाद व्यापक रणनीति में उन सेक्टर की पहचान कर रही है जहां ज्यादा भीड़ जुटती है, लेकिन जिनको कुछ समय स्थगित रखा जा सकता है। साथ ही सम-विषम व्यवस्था भी लागू हो सकती है। बाजार, दफ्तर, यातायात आदि में इसे प्रयोग में लाया जा सकता है।

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