लॉकडाउन में लड़कियों का अधिकतर वक्त किस काम में बीता, यह जानकर हैरान रह जायेंगे आप

नई दिल्ली: कोरोना लॉकडाउन के दौरान दुनियाभर में 66 फीसदी लड़कियों और महिलाओं का अधिकांश वक्त खाना बनाने में खप गया। द रियल वर्ल्ड नाम की एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने एक सर्वे के आधार पर यह दावा किया है। सर्वे के परिणाम बताते हैं कि खाना बनाने और घरेलू कामों के चलते लड़कियां और महिलाएं अपनी शिक्षा के लिए समय नहीं निकाल सकीं।

सर्वे में पाया गया कि लॉकडाउन के दौरान मर्दों के पूरे वक्त घर में ही मौजूद होने से घरेलू कामों को बोझ बढ़ गया था। तब 14 से 24 साल की उम्र की 66 प्रतिशत लड़कियों और महिलाओं का अधिकतर समय परिवार के सदस्यों के लिए भोजन बनाने में ही बीत रहा था। इस कारण उनके पास पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए वक्त ही नहीं था। जबकि आयुवर्ग के 31 प्रतिशत लड़कों और पुरुषों पर ही भोजन बनाने जैसा बोझ पड़ा। सर्वे में यह भी पाया गया कि जहां 58 प्रतिशत लड़के अथवा पुरुष घर की सफाई में लगे थे, वहीं यह काम करने में 69 प्रतिशत लड़कियों व महिलाओं का समय खप रहा था।

घरेलू सामान की खरीदारी में 52 प्रतिशत महिलाएं व्यस्त थीं जबकि 49 प्रतिशत पुरुषों पर ही ऐसा बोझ पडा। इसी तरह भाई-बहनों की देखभाल की जिम्मेदारी 28 प्रतिशत लड़कियां संभाल रही थीं जबकि 16 प्रतिशत ही लड़कों पर यह जिम्मेदारी आयी। द रियल वर्ल्ड की चेयर पर्सन सारा ब्राउन का कहना है कि सर्वे के परिणाम बताते हैं कि जब लड़कियां स्कूल नहीं जा पातीं, तब वे आसानी से पारंपरिक घरेलू भूमिकाओं में फंस जाती हैं।

यह उनकी शिक्षा को संकट में डाल देता है। उनका कहना है कि समाज में स्त्री और पुरुषों के लिए जेंडर के आधार पर बांट दिए गए कामों का अंतर पाटने के लिए जरूरी है कि महामारी की स्थिति में भी उनकी शिक्षा जारी रखने का प्रयास किया जाए। गौरतलब है कि कई अध्ययनों से पता लग चुका है कि महामारी ने महिलाओं की समानता को 10 साल पीछे धकेल दिया है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper