लोकसभा के एक साथ हो सकते हैं 13 राज्यों के चुनाव!

नई दिल्ली: भाजपा ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के नारे को आंशिक रूप से साकार करने की ओर एक बड़ा कदम उठा सकती है। भाजपा को अहसास है कि लोकसभा के साथ पूरे देश के सभी राज्यों के विधानसभाओं के चुनाव एकसाथ कराना संभव नहीं है। मई 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के साथ कम से कम 13 राज्यों के विधानसभा चुनाव कराने पर पार्टी मंथन जारी है।

इस साल नवंबर में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के चुनाव होने हैं। इन राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगा कर चुनाव 6 महीने बाद कराया है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में विधानसभा चुनाव वैसे भी लोकसभा चुनाव के साथ ही होने तय हैं।

महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा, बिहार और दिल्ली में चुनाव लोकसभा चुनाव के 6 से 8 महीनों के बाद हुए थे। इनमें सिर्फ दिल्ली ही ऐसा राज्य है जहां भाजपा की सरकार नहीं है। अन्य 4 राज्यों की सरकारें समय से पहले विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर चुनाव लोकसभा के साथ करा सकती हैं। चुनाव आयोग के पूर्व सलाहकार केजे राव ने कहा कि चुनाव का समय तय करना आयोग का काम नहीं है। कानूनन समय से 6 महीने पहले किसी भी वक्त चुनाव कराया जा सकता है।

– संविधान संशोधन की जरूरत

संविधान विशेषज्ञों की माने तो केंद्र सरकार को राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव छह महीने टालने के लिए संविधान संशोधन करना पड़ेगा।लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी अचारी का कहना है कि राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए भी संविधान-सम्मत प्रक्रिया के पालन के साथ संसद के दोनों सदनों से इसका अनुमोदन भी कराना होगा। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के संयोजक प्रो. जगदीप छोकर कहते हैं कि बिना वाजिब वजह के लगाए गए राष्ट्रपति शासन को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

– पार्टी के सामने दो विकल्प

इस स्थिति से निपटने के लिए भाजपा के पास दो रास्ते हैं। पहला लोकसभा और अन्य 10 राज्यों के चुनाव इसी साल नवंबर-दिसंबर में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ करा लिए जाएं। इसके लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं होगी। दूसरा रास्ता थोड़ा पेचीदा है। उसमें पहले इन 4 राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाना है।

दूसरा कदम विपक्ष द्वारा संसद या अदालत में उसे चुनौती देने पर इस प्रस्ताव को गिरने देना है। इसके बाद इसे एक चुनावी मुद्दे में तब्दील करना है। कांग्रेस सहित लगभग सभी विपक्षी दल विधानसभाओं के चुनाव लोकसभा के साथ कराने के खिलाफ हैं। भाजपा इस साल नवंबर में होने वाले राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन की आशंका के मद्देनजर भाजपा यह कदम उठा रही है।

– चार बार हो चुके हैं एक साथ चुनाव

राज्यसभा के पूर्व महासचिव और संविधान विशेषज्ञ योगेंद्र नारायण का कहना है कि आजादी के बाद हुए लोकसभा के 4 चुनावों के साथ ही सभी विधानसभाएं के चुनाव भी हुए थे। यह प्रक्रिया 1967 में टूटी जब इंदिरा गांधी ने राजनीतिक विरोधियों की राज्य सरकारों को एकसाथ बर्खास्त कर दिया था। अब यह परंपरा फिर शुरू हो सकती है।

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