वाराणसी से चुनाव न लड़ने का फैसला सामूहिक था : प्रियंका गांधी

अमेठी: कांग्रेस महासचिव व पूर्वी उप्र की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार को यहां कहा कि वाराणसी से चुनाव न लड़ने का फैसला सामूहिक था। प्रियंका ने कहा, “मैंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और सहयोगियों से सलाह ली। उन्होंने कहा कि मुझे पार्टी ने पूर्वी उत्तरप्रदेश की 41 सीटों पर प्रचार अभियान की जिम्मेदारी दी है। मैंने महसूस किया कि यदि मैं सिर्फ एक सीट पर फोकस करूंगी तो प्रत्याशी निराश होंगे।”

उन्होंने कहा, “पार्टी ने सामूहिक रूप से फैसला किया कि फिलहाल मुझे वाराणसी में चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। कई सीटों पर पार्टी के प्रत्याशी मुझे चुनाव प्रचार के लिए बुलाना चाहते थे, ऐसे में मैं किसी को भी निराश नहीं करना चाहती थी।” प्रियंका ने मंगलवार को सिंहपुर के खरावा गांव में महिलाओं से बातचीत करते हुए कहा, “यहां मेरे भाई चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा सरकार ने पिछले पांच सालों में यहां से रोजगार छीना। फूडपार्क में रोजगार मिल सकता था। आवारा पशुओं के लिए कुछ नहीं किया। किसानों को उपज का दाम नहीं मिलता, खाद, बीज नहीं मिलता।”

उन्होंने कहा कि 43 साल में रोजगार घटाने का रिकॉर्ड इन पांच सालों में बना। मनरेगा में मजदूरी ठेकेदारों से जेसीबी द्वारा कराई जा रही है। उन्होंने कहा, “स्मृति ईरानी अमेठी में जनता का आदर नहीं करतीं। जूते बांट रही हैं। यहां की जनता कभी भीख नहीं मांगती है। भीख मांगनी है तो वह आएं। सारे उपक्रम बंद कराए। केंद्र में सरकार थी तो परियोजना चलने देते।”

कांग्रेस महासचिव ने कहा, “यहां विकास कार्य कभी नहीं देखा। आपके पास विकास करने वाला सांसद है। राहुल अपनी निधि खर्च कर चुके हैं। उसके अलाव 42 लाख रुपये और खर्च किए। मुझे अमेठी की जनता पर गर्व है।”

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