वाह! घोंसले में आराम से रह सकें चिड़िया और उसके बच्चे, इसलिए 40 दिनों से अंधेरे में रह रहा गांव

नई दिल्ली: तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में स्थित एक गांव पोत्ताकुडी में पिछले 40 दिनों से स्ट्रीट लाइट्स को बंद रखा गया है, ताकि एक चिड़िया (ओरिएंटल मैगी-रॉबिन) चैन से अपने घोंसले और अंडे के साथ रह सके। यह मामला तब सामने आया, जब इलाके के स्ट्रीट लाइट ऑपरेटर और पोत्ताकुडी के निवासी करुप्पु राजा ने देखा कि मेन स्विचबोर्ड के बाहर एक छोटी सी चिड़िया उड़ रही है। करुप्पु राजा ने कहा, “मेरा घर गली के आखिर में है, जहां 35 स्ट्रीट लाइट्स का मेन स्विच लगाया गया है। मैं बचपन से ही इन स्ट्रीट लाइटों को शाम में करीब 6 बजे ऑन करता हूं और सुबह 5 बजे ऑफ कर देता हूं। एक दोपहर को जब मैं अपने घर से बाहर निकला, तो मैंने देखा कि एक नीले रंग का पक्षी स्विचबोर्ड के अंदर और बाहर आ जा रहा है। उत्सुकता के मारे मैं उसके नजदीक गया और देखा कि वह काफी तिनके जमा कर रहा था। मैं नहीं जानता कि वह कौन सा पक्षी था, लेकिन वो एक घोंसला तैयार कर रहा था।”

अगले तीन दिनों तक जब भी वह (करुप्पु राजा) स्ट्रीट लाइट्स को ऑन करने गया, उस दौरान घोंसला बनाने के लिए जो तिनका लेकर पक्षी आता था उसे वह गिरा देता और फिर सुरक्षित वहां से उड़ जाता। लेकिन चौथे दिन, उसने वहां घोंसले में भूरे धब्बे के साथ तीन छोटे हरे-नीले रंग के अंडे देखे। वह पक्षी को परेशान किए बिना अगले महीने के लिए उस स्थान पर उसे आराम से रहने देना चाहता था। लेकिन, ऐसा करने का मतलब था कि वह 100 घरों के बीच के 35 स्ट्रीट लाइटों को चालू नहीं कर सकता है। राजा ने ‘द बेटर इंडिया’ से कहा, “मैंने उस घोंसले की तस्वीर लेकर उसे अपने इलाके के सभी निवासियों के साथ एक व्हाट्सएप ग्रुप पर साझा किया। मैंने समझाया कि कैसे मैं इस पक्षी को अपने अंडे देने के लिए एक सुरक्षित स्थान देना चाहता था। इसके साथ ही मैंने बिजली लाइन को काटने के लिए उनका समर्थन मांगा। अधिकांश ग्रामीणों ने इसके लिए अपनी सहमति जाहिर की, लेकिन कुछ लोगों ने सोचा कि यह एक छोटी-सी चिड़िया के लिए एक बड़ा कदम था।”

अगले दिन, उन्होंने ग्राम पंचायत के प्रमुखों- अरसुनन और एच कालेश्वरी से संपर्क किया और उनसे घोंसले वाली जगह पर जाने का आग्रह किया। अरसुन ने कहा, “जब लड़के ने मुझसे एक चिड़िया के लिए बिजली की लाइन काटने का अनुरोध किया, तो मैं हैरान रह गया। इसलिए, मैंने फैसला किया कि मैं खुद वहां जाकर देखूंगा। चिड़िया ने घोंसला बनाना समाप्त कर दिया था और एक पनाहगाह बनाने के लिए चारों तरफ पत्ते, घास और तिनके रख दिए थे। लॉकडाउन के दौरान मैंने कई ऐसे लोगों को देखा जिनके पास रहने के लिए जगह नहीं थी और वो सड़कों पर गुजर-बसर कर रहे थे। मैं पक्षी के साथ ऐसा होते हुए नहीं देखना चाहता था और इसके बाद पावर (बिजली) लाइन को काटने के लिए मैं राजी हो गया।” एक बार जब स्विचबोर्ड के मुख्य तार को काट दिया गया, तो यह सुनिश्चित करने के लिए कि कहीं किसी तार के संपर्क में आकर पक्षी को करंट ना लगे तार को टेप से कवर कर दिया गया। इस दौरान, पंचायत प्रमुख ने हर दरवाजे पर जाकर लोगों को सलाह दी कि वे रात के अंधेरे में सतर्क रहें। करुप्पु राजा कहते हैं कि पक्षी को अंडे दिए अब 40 दिन हो चुके हैं और अब तीन स्वस्थ बच्चे हैं। उनके छोटे पंख हैं, और वो धीरे-धीरे उड़ना सीख रहे हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि लोगों की आवाजाही से कहीं पक्षी चौंक ना जाए, करुप्पु राजा इस बात की निगरानी करता है कि कोई भी घोंसले के करीब ना जाए या फिर काफी लोग एकसाथ वहां ना पहुंचें। पंचायत प्रमुखों ने कहा है कि पक्षियों के घोंसला छोड़कर जाने के बाद ही स्ट्रीट लाइटों की बिजली ऑन की जाएगी।

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