विकास का नारा भले ही जुमला रहा हो ,कांग्रेस मुक्त भारत का नारा सही निकला

अखिलेश अखिल

विपक्षी दलों का दावा है कि पिछले चार साल में मोदी सरकार सिर्फ जुमलों की सरकार रही। उसने नया कुछ नहीं किया। सोशल मीडिया के जरिये सरकार बनायी और एक बड़ी फ़ौज को सोशल मीडिया में घुसा कर जनता को भ्रमित करने का काम किया। इसके साथ ही सरकार ने जीएसटी ,नोटबंदी के नाम पर लाखो लोगों के रोजगार छीने और तबाही मचाई। विपक्ष की राजनीति कर रहे तमाम दल यह भी मानते हैं कि अब बहुत हो गया ,बीजेपी की राजनीति अब नहीं चल पाएगी। लेकिन तमाम चुनावों के परिणाम काफी चौकाते हैं और गुदगुदाते भी है। चुनाव से पहले विपक्ष की राजनीति धारदार दिखती है लेकिन परिणाम आते ही बीजेपी की राजनीति धारदार हो जाती है। बीजेपी के सामने कोई टिकता नजर नहीं आता।

हालिया उत्तर-पूर्व के तीन राज्यों के चुनावी परिणाम के बाद देश में सत्तारूढ़ भाजपा में जहां खुशी की लहर है वहीं कांग्रेस को अपने संगठन के बारे में एक बार फिर से सोचना होगा। बात राजनीति की है इस लिहाज से गंभीर चर्चा होनी चाहिए। देश में कांग्रेस की स्थिति भी गंभीर चिंता का विषय है। जो हालत कांग्रेस की होती जा रही है उससे अब लोगों को भय होने लगा है कि ना जाने इस पार्टी का अब क्या होगा ? पूर्वोत्तर राज्यों में बीजेपी कभी नहीं रही। उसकी पहुँच ही नहीं हो पा रही थी। लेकिन पिछले तीन सालों में पूर्वोत्तर पूरी तरह से भगवा रंग में रंग गया है। कांग्रेस की जड़ें समाप्त हो गयी है और कई स्थानीय पार्टियां भी कांग्रेस से आगे बढ़ गयी है। गजब का तमाशा होता दिख रहा है। उत्तर भारत तो पहले से ही कांग्रेस के हाथ से निकल चुका है और अब जिस तरह एक एक कर तमाम पूर्वोत्तर भारत के प्रदेश कांग्रेस को विदा करते जा रहे हैं ऐसे में साफ़ हो गया है कि बीजेपी का कांग्रेस मुक्त भारत सफल हो गया है।

कहने के लिए 4 राज्यों में कांग्रेस सिमट गयी है। उत्तर भारत के नाम पर पंजाब और दक्षिण भारत के नाम पर कर्नाटक। इसके अलावा पुडिचेरी और कथित रूप से मेघालय। मेघालय को लेकर अभी भी असमंजस की हालत बानी हुयी है। मेघालय गया तो कांग्रेस उत्तरा पूर्व से बेदखल हो जाएगा। समझ से परे है कि कांग्रेस के नेता ही बीजेपी में जाकर चुनाव जीत रहे हैं और कांग्रेस को जमींदोज भी कर रहे हैं। इस तरह के खेल हर जगह दिखाई पड़ रहे हैं। अगला चुनाव कर्नाटक में हैं। यह चुनाव अगर कांग्रेस हार गयी तो दक्षिण से भी कांग्रेस समाप्त हो जायेगी। ऐसे में मोदी सरकार के बारे में यह तो कहा ही जा सकता है कि उनकी चार साल की सरकार भले ही जुमले पर टिकी रही लेकिन कांग्रेस मुक्त भारत करने का उसका नारा सही निकला।

बीजेपी की उपलब्धि यही रही कि अपने पहले चरण की सरकार में उसने देश को भले ही ठगने का काम किया हो लेकिन कांग्रेस मुक्त भारत करने में उसने कोई कसार नहीं छोड़ी। कांग्रेस को इस मंथन करने की जरूरत है। पिछले 4 सालों की बात करें तो कुल 26 राज्यों में चुनाव हुए जिनमें से कांग्रेस के हाथ सिर्फ 2 राज्य ही आए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते रहे हैं। जैसे-जैसे वक्त गुजर रहा है, देशभर से कांग्रेस का सफाया होता जा रहा है।

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